जो बच्चे कहते हैं मां हमारे लिए करती ही क्या है? जबलपुर के इस हादसे ने ये बता दिया मां अपने बच्चों को मरते दम तक अकेला नहीं छोड़ती...

बरगी डैम में 30 अप्रैल की शाम तूफान ने क्रूज को डुबो दिया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह रह गया कि आखिर उस पल में मां और बेटे के साथ क्या हुआ…

May 2, 2026 - 20:59
जो बच्चे कहते हैं मां हमारे लिए करती ही क्या है? जबलपुर के इस हादसे ने ये बता दिया मां अपने बच्चों को मरते दम तक अकेला नहीं छोड़ती...

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में स्थित बरगी डैम (नर्मदा नदी) पर 30 अप्रैल की शाम जो हादसा हुआ, उसने पूरे इलाके को हिला दिया। तेज आंधी, अचानक शुरू हुई मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं ने मिलकर ऐसा हालात बना दिया कि नर्मदा की शांत दिखने वाली लहरें कुछ ही मिनटों में मौत का सैलाब बन गईं।

जबलपुर के बरगी डैम पर घूमने निकली खुशी, बन गई आखिरी यात्रा

यह घटना जबलपुर से करीब 40–50 किलोमीटर दूर स्थित बरगी डैम क्षेत्र में हुई, जहां पर्यटकों के लिए क्रूज राइड कराई जाती है। उस दिन भी कई परिवार घूमने पहुंचे थे। दिल्ली का मैसी परिवार भी इसी उम्मीद के साथ यहां आया था कि कुछ यादगार पल साथ बिताए जाएंगे।

परिवार में एक पारिवारिक कार्यक्रम था, जिसके बाद सभी ने नर्मदा नदी पर क्रूज राइड का प्लान बनाया। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर जिंदगी का सबसे दर्दनाक मोड़ ले लेगा।

मौसम का बिगड़ना और क्रूज का असंतुलन

जैसे ही शाम हुई, बरगी डैम क्षेत्र में अचानक मौसम बदल गया। तेज हवाएं चलने लगीं और फिर मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। नर्मदा नदी का पानी उफान पर आने लगा और उसी समय क्रूज बोट असंतुलित होने लगी।

यात्रियों के बीच घबराहट फैल गई। कई लोगों ने स्टाफ से बार-बार कहा कि बोट को तुरंत किनारे लगाया जाए क्योंकि मौसम बेहद खराब हो रहा है, लेकिन हालात पर नियंत्रण नहीं हो सका। कुछ ही मिनटों में क्रूज पलट गया और पानी में समा गया।

छुट्टियों का सफर बना दर्दनाक हादसा

दिल्ली का मैसी परिवार कुछ दिनों की छुट्टियां मनाने जबलपुर आया था। परिवार में एक पारिवारिक कार्यक्रम भी था, जिसके बाद सभी ने घूमने का प्लान बनाया। लेकिन यह खुशी का सफर कब मातम में बदल गया, किसी ने सोचा भी नहीं था।

खमरिया टापू के पास जब मौसम अचानक बिगड़ा, तो तेज हवाएं और भारी बारिश शुरू हो गई। उसी समय क्रूज बोट पानी में असंतुलित होने लगी। यात्रियों के बीच घबराहट फैल गई और लोग मदद की गुहार लगाने लगे, लेकिन हालात तेजी से बेकाबू होते गए।

मां-बेटे की सबसे दर्दनाक कहानी

इस पूरे हादसे में सबसे दिल दहला देने वाली तस्वीर मरीना मैसी और उनके 4 साल के बेटे त्रिशान की सामने आई। बताया जाता है कि जब क्रूज डूब रहा था, तब मरीना ने अपने बच्चे को किसी भी हालत में खुद से अलग नहीं होने दिया।

उन्होंने लाइफ जैकेट में बेटे को कसकर अपने सीने से लगाए रखा और आखिरी सांस तक उसे बचाने की कोशिश करती रहीं। जब दोनों के शव बाहर निकाले गए, तो यह साफ था कि मां ने अपने बच्चे को बचाने के लिए हर संभव कोशिश की थी। यह दृश्य देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।

परिवार बिखर गया, कुछ बचे लेकिन दर्द रह गया

इस हादसे में मरीना, उनका बेटा और उनकी मां की मौत हो गई। वहीं दूसरी तरफ पति प्रदीप मैसी, बेटी सिया और परिवार के कुछ लोग किसी तरह बच गए। लेकिन बच जाना उनके लिए राहत नहीं, बल्कि जिंदगी भर का दर्द बन गया।

सिया की आंखों ने देखा पूरा मंजर

हादसे के बाद अस्पताल के बाहर खड़ी सिया लगातार रोती रही। उसने बताया कि घटना अचानक हुई और किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला।

उसके अनुसार, मौसम खराब होने पर कई यात्रियों ने क्रू मेंबर्स से कहा था कि बोट को किनारे लगा दिया जाए, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया। धीरे-धीरे हालात बिगड़ते गए और फिर सब कुछ कुछ ही मिनटों में खत्म हो गया।

सिया ने बताया कि यह यात्रा सिर्फ घूमने के लिए थी। लंबे समय बाद पूरा परिवार एक साथ आया था, लेकिन वही खुशी एक बड़े हादसे में बदल गई।

किनारे तक पहुंचा दर्द

सिया ने कहा कि जब वह किसी तरह बाहर निकली, तो सबसे पहले उसने अपने पिता को देखा और उनका हाथ पकड़ लिया। दोनों सुरक्षित बाहर आ गए, लेकिन मां और भाई कहीं नहीं दिखे। यह खालीपन अब उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा घाव बन चुका है।

जांच के घेरे में प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था

अब इस पूरे हादसे के बाद कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं—क्या क्रूज में ओवरलोडिंग थी? क्या मौसम चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया? क्या सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त थी?

प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और शुरुआती स्तर पर कई खामियों की बात सामने आ रही है।

नर्मदा का यह हादसा जो कभी नहीं भूला जाएगा

बरगी डैम, नर्मदा नदी का यह हादसा सिर्फ एक नाव दुर्घटना नहीं है। यह एक ऐसी त्रासदी है जिसने एक मां की ममता, एक बच्चे की जिंदगी और एक पूरे परिवार की खुशियों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।

मरीना मैसी की वह तस्वीर, जिसमें वह अपने बेटे को आखिरी पल तक सीने से लगाए रहीं, इस हादसे की सबसे दर्दनाक और हमेशा याद रहने वाली कहानी बन चुकी है।

एक मां की आखिरी जंग

बरगी डैम का यह हादसा सिर्फ एक नाव के डूबने की घटना नहीं है, बल्कि एक ऐसी कहानी है जो हमेशा याद रखी जाएगी। मरीना मैसी की वह तस्वीर, जिसमें वह अपने बच्चे को आखिरी सांस तक सीने से लगाए रहीं, इस हादसे की सबसे दर्दनाक पहचान बन चुकी है।

यह कहानी सिर्फ मौत की नहीं, बल्कि एक मां के प्यार और उसकी आखिरी लड़ाई की है, जो शायद अब कभी किसी की यादों से नहीं मिटेगी।

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