कोटा में भैंस के मालिकाना हक पर अनोखा विवाद: पुलिस ने थाने लाई भैंस, मंदिर में कसम के बाद भी पड़ा मेडिकल कराना

कोटा के कुन्हाड़ी थाने में एक भैंस और उसके बछड़े के मालिकाना हक को लेकर दो लोगों के बीच झगड़ा हो गया। दोनों ने भैंस को अपना बताया। पुलिस ने भैंस को थाने लाकर मंदिर में कसम खिलवाई और पशु चिकित्सालय में मेडिकल कराया। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर भैंस रामलाल मेघवाल को सौंप दी गई, जबकि दूसरे पक्ष को ठोस सबूत पेश करने को कहा गया।

Jan 4, 2026 - 11:54
कोटा में भैंस के मालिकाना हक पर अनोखा विवाद: पुलिस ने थाने लाई भैंस, मंदिर में कसम के बाद भी पड़ा मेडिकल कराना

राजस्थान के कोटा जिले में एक भैंस और उसके बछड़े के मालिकाना हक को लेकर दो लोगों के बीच इतना गंभीर विवाद हो गया कि मामला सीधे पुलिस थाने पहुंच गया। दोनों दावेदार भैंस को अपना बता रहे थे, जिससे पुलिस भी दुविधा में पड़ गई। असली मालिक का पता लगाने के लिए पुलिस को न केवल भैंस को थाने लाना पड़ा, बल्कि मंदिर में कसम खिलवाने और पशु चिकित्सालय में मेडिकल कराने जैसी असामान्य प्रक्रियाएं अपनानी पड़ीं। करीब 4 घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस ने मामले का समाधान निकाला।यह घटना शनिवार दोपहर कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र की है। कुन्हाड़ी थाना अधिकारी कौशल्या गालव के अनुसार, दोनों पक्षों के झगड़े के बाद भैंस और उसके बछड़े को गाड़ी में लादकर थाने लाया गया। विवाद इतना बढ़ गया था कि सामान्य पूछताछ से बात नहीं बन रही थी। पुलिस ने असली मालिक की पहचान के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाए।

विवाद की शुरुआत: गुमशुदा भैंस के दो दावेदार हेड कॉन्स्टेबल नरेंद्र सिंह ने बताया कि बालिता रोड निवासी इंद्रजीत केवट की भैंस करीब 4 महीने पहले गुम हो गई थी। उन्होंने काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। दो दिन पहले उनके बाड़े में एक भैंस आ गई, जिसे उन्होंने अपनी गुमशुदा भैंस मानकर बांध लिया। इसी बीच दूसरे दावेदार रामलाल मेघवाल ने किया कि उनकी भैंस भी दो दिन पहले गुम हुई थी और वही भैंस इंद्रजीत के बाड़े में बंधी मिली। रामलाल ने भैंस को वहां से ले आए। इस पर इंद्रजीत ने अपना दावा ठोंक दिया और एसपी कार्यालय में परिवाद दे दिया। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर कुन्हाड़ी पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

मंदिर में कसम, फिर भी नहीं सुलझा मामला दोनों पक्षों को समझाने-बुझाने के प्रयास में पुलिस ने उन्हें मंदिर ले जाकर भैंस के सामने कसम खिलवाई। दोनों ने ही हाथ जोड़कर कसम खाई कि भैंस उनकी ही है। लेकिन इससे भी विवाद सुलझा नहीं, क्योंकि दोनों अड़े रहे।आखिरकार पुलिस ने भैंस और उसके बछड़े को मौखापाड़ा स्थित बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय ले जाकर मेडिकल कराया। इंद्रजीत केवट ने भैंस की उम्र 7 साल बताई, जबकि रामलाल मेघवाल ने साढ़े 4 साल। पशु चिकित्सकों की जांच में भैंस की उम्र 4 से 5 साल के बीच पाई गई।मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद भी इंद्रजीत का पक्ष पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुआ। दोनों दावेदारों ने डॉक्टरों को भैंस के साथ अपनी-अपनी पुरानी फोटो दिखाईं, लेकिन फोटो से भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी।

पुलिस का फैसला: भैंस रामलाल को सौंपी लंबी जांच और सभी प्रयासों के बाद पुलिस ने भैंस रामलाल मेघवाल को सौंप दी, क्योंकि उनकी बताई उम्र मेडिकल रिपोर्ट से ज्यादा मेल खा रही थी और भैंस के गुम होने का समय भी हालिया था। इंद्रजीत केवट को कहा गया कि यदि उनके पास कोई ठोस सबूत (जैसे पुरानी फोटो, दूध का रिकॉर्ड या अन्य प्रमाण) हों तो थाने में पेश करें।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.