जोधपुर में शराब ठेकेदार के साथ 77 लाख की ठगी: निवेश के नाम पर लालच देकर उड़ाए पैसे, दो साल में मुनाफे का झूठा वादा कर भागे आरोपी, अब कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज
जोधपुर के मंगरा पूजला निवासी शराब ठेकेदार प्रीतम सिंह गहलोत को एवरग्रीन इंफोसॉफ्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने दो साल में मोटा मुनाफा देने का लालच देकर 77.50 लाख रुपये की ठगी की। कंपनी बंद होने और पैसा गायब होने के बाद कोर्ट के आदेश पर माता का थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया।
जोधपुर, 21 नवंबर 2025: राजस्थान के जोधपुर शहर में एक बड़ा निवेश घोटाला सामने आया है, जिसमें एक शराब ठेकेदार को 77 लाख 50 हजार रुपये की चपत लगाई गई। मंगला पूजला इलाके के निवासी प्रीतम सिंह गहलोत ने एवरग्रीन इंफोसॉफ्ट प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के संचालकों पर ठगी का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। यह मामला इतना जटिल है कि प्रीतम सिंह को कोर्ट का सहारा लेना पड़ा, क्योंकि स्थानीय थाने ने शुरुआत में कार्रवाई करने में टालमटोल किया। आरोपी कंपनी के मालिक अब फरार हैं, जबकि कंपनी का ऑफिस बंद हो चुका है। इस घटना ने स्थानीय निवेशकों में दहशत पैदा कर दी है, खासकर उन लोगों में जो तथाकथित 'हाई रिटर्न' वाली स्कीम्स के जाल में फंसने का खतरा झेल रहे हैं।
ठगी की पूरी साजिश: कैसे फंसाया गया शिकार? जानकारी के अनुसार, प्रीतम सिंह गहलोत जोधपुर के मंगला पूजला क्षेत्र में रहने वाले एक प्रमुख शराब ठेकेदार हैं। वे अपने कारोबार से अच्छी कमाई करते हैं, लेकिन भविष्य की सुरक्षा के लिए निवेश के अवसर तलाशते रहते हैं। इसी क्रम में करीब दो साल पहले (2023 के आसपास) एवरग्रीन इंफोसॉफ्ट प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने उनसे संपर्क किया। कंपनी के संचालकों ने प्रीतम को एक 'लाभकारी निवेश योजना' का लालच दिया, जिसमें सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और आईटी सेक्टर में निवेश करने पर दो साल के अंदर कई गुना मुनाफा मिलने का वादा किया गया।आरोपियों ने प्रीतम को विश्वास दिलाने के लिए फर्जी दस्तावेज, सफलता की कहानियां और हाई-प्रोफाइल मीटिंग्स का सहारा लिया। उन्होंने दावा किया कि कंपनी आईटी क्षेत्र की प्रमुख प्लेयर है और उसके प्रोजेक्ट्स में निवेश करने वाले कई निवेशकों ने पहले ही लाखों का लाभ कमाया है। लालच में आकर प्रीतम सिंह ने कुल 77 लाख 50 हजार रुपये की राशि कंपनी के खातों में ट्रांसफर कर दी। यह राशि विभिन्न किस्तों में दी गई, जिसमें कुछ बड़ी रकम एकमुश्त थी। कंपनी ने शुरुआती कुछ महीनों में छोटे-मोटे 'रिटर्न' भी दिए, ताकि प्रीतम का भरोसा बना रहे। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, वैसे-वैसे बहाने बनने लगे—प्रोजेक्ट में देरी, मार्केट की अस्थिरता आदि।दो साल पूरे होने पर जब प्रीतम ने अपना मुनाफा मांगा, तो कंपनी के दरवाजे बंद मिले। ऑफिस खाली था, फोन बंद, और वेबसाइट भी गायब। पता चला कि एवरग्रीन इंफोसॉफ्ट प्राइवेट लिमिटेड एक फर्जी कंपनी थी, जो केवल निवेशकों को लूटने के लिए रजिस्टर्ड की गई थी। प्रीतम की शिकायत पर जांच में सामने आया कि कंपनी के संचालक पहले भी इसी तरह के घोटालों में लिप्त रहे हैं।
आरोपी कौन? जेल में बंद या फरार? मामले में मुख्य आरोपी कंपनी के डायरेक्टर हैं, जिनके नाम अभी गोपनीय रखे गए हैं, लेकिन प्रीतम की शिकायत में उनका उल्लेख है। एक आरोपी पहले से ही किसी अन्य मामले में जेल में बंद बताया जा रहा है, जबकि बाकी फरार हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये लोग जोधपुर और आसपास के इलाकों में कई अन्य लोगों को भी इसी तरह फंसाने की कोशिश कर चुके हैं। एवरग्रीन कंपनी का रजिस्ट्रेशन दिल्ली या मुंबई से किया गया था, लेकिन इसका ऑपरेशन जोधपुर में चल रहा था।
कोर्ट का हस्तक्षेप: थाने की सुस्ती पर लगी लगाम सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रीतम सिंह ने जब माता का थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, तो पुलिस ने इसे 'सिविल मामला' बताकर टाल दिया। हताश होकर प्रीतम को जोधपुर की एक निचली अदालत का रुख करना पड़ा। कोर्ट ने उनकी याचिका पर संज्ञान लेते हुए थाने को निर्देश दिए कि ठगी के तहत IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक विश्वासघात) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की जाए। कोर्ट के आदेश के बाद माता का थाने में मामला दर्ज हो सका। अब पुलिस आरोपी संचालकों की तलाश में जुटी है और बैंक खातों की जांच कर रही है।
निवेशकों के लिए सबक: सावधानी बरतें, फर्जी स्कीम्स से दूर रहें
यह घटना जोधपुर के निवेशकों के लिए एक बड़ा सबक है। विशेषज्ञों का कहना है कि आईटी और स्टार्टअप सेक्टर में 'हाई रिटर्न' का लालच देने वाली योजनाएं अक्सर घोटालों का रूप ले लेती हैं। प्रीतम सिंह का मामला भी इसी का उदाहरण है—एक सफल कारोबारी भी लालच में फंस गया। पुलिस ने अपील की है कि कोई भी निवेश करने से पहले कंपनी का बैकग्राउंड चेक करें, ROC (रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज) से वेरिफिकेशन कराएं और SEBI रजिस्टर्ड एजेंट्स के माध्यम से ही निवेश करें।