राजस्थान के जैसलमेर के MBBS छात्र रतन कुमार मेघवाल ने राजकोट में ट्रेन के आगे कूदकर दी जान: पहले भी किया था सुसाइड अटेम्प्ट, सुसाइड नोट में बताई मानसिक परेशानी
राजस्थान के जैसलमेर जिले के 23 वर्षीय MBBS अंतिम वर्ष के छात्र रतन कुमार मेघवाल ने गुजरात के राजकोट में AIIMS हॉस्टल से निकलकर परापीपलिया रेलवे ट्रैक पर ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में मानसिक परेशानी का जिक्र है। डेढ़ महीने पहले (28 जनवरी) भी उन्होंने इसी जगह सुसाइड का प्रयास किया था, जिसे गांव वालों ने रोका था। शव राजकोट सिविल हॉस्पिटल में रखा गया है, परिवार सदमे में है।
राजस्थान के जैसलमेर जिले के एक युवा MBBS छात्र रतन कुमार मेघवाल (उम्र 23 वर्ष) ने गुजरात के राजकोट में ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। यह दुखद घटना शनिवार सुबह हुई, जब रतन ने राजकोट के परापीपलिया रेलवे फाटक के पास यह कदम उठाया। रतन राजकोट स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में MBBS के अंतिम वर्ष (फाइनल ईयर) के छात्र थे और वहां हॉस्टल में रहते थे।
घटना का विवरण
पुलिस जांच के अनुसार, रतन कुमार शनिवार सुबह लगभग 4:00 बजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से बाहर निकले। मात्र 45 मिनट बाद, यानी सुबह 4:45 बजे के आसपास उन्होंने परापीपलिया रेलवे ट्रैक पर ट्रेन के सामने कूदकर अपनी जान दे दी। घटनास्थल पर पहुंची गांधीग्राम पुलिस ने शव बरामद किया और जांच शुरू की। शव के पास से एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें रतन ने खुद को मानसिक रूप से गंभीर रूप से परेशान बताते हुए इस कदम का जिक्र किया है। नोट में उनकी मानसिक स्थिति और परेशानियों का उल्लेख है, जो उन्हें इस फैसले तक ले गया।
पहले भी किया था सुसाइड का प्रयास
यह पहली बार नहीं था जब रतन ने जान देने की कोशिश की। डेढ़ महीने पहले, 28 जनवरी को भी उन्होंने इसी परापीपलिया रेलवे ट्रैक पर सुसाइड का प्रयास किया था। उस समय भी वे सुबह जल्दी हॉस्टल से निकले थे, लेकिन समय रहते स्थानीय गांव वालों ने उन्हें बचा लिया था। इस बार दुर्भाग्यवश वे सफल हो गए।
परिवार में मचा कोहराम
रतन के माता-पिता जैसलमेर में रहते हैं और बेटे के डॉक्टर बनने का सपना देख रहे थे। खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया, चीख-पुकार और रोना-धोना शुरू हो गया। परिवार के सदस्य तुरंत राजकोट के लिए रवाना हो गए हैं। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए राजकोट सिविल हॉस्पिटल की मोर्चरी में रखा गया है। परिजनों के पहुंचने के बाद ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
AIIMS प्रशासन का बयान और विरोधाभास
AIIMS प्रशासन का कहना है कि रतन कैंपस में नहीं रहते थे, लेकिन हॉस्टल वार्डन ने ही शव की पहचान की है, जो इस बात की पुष्टि करता है कि वे हॉस्टल में ही रह रहे थे। यह घटना मेडिकल छात्रों में बढ़ते तनाव और मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों की ओर इशारा करती है, जहां पढ़ाई का दबाव, व्यक्तिगत परेशानियां और अन्य कारक युवाओं को इस कदम तक पहुंचा देते हैं।