जयपुर में अवैध वसूली का सनसनीखेज मामला: कैफे ऑनर और तीन पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी, दोस्त से पैसे ऐंठने की थी साजिश
जयपुर के मानसरोवर इलाके में एक कैफे मालिक पवन कुमार गुर्जर ने अपने चचेरे भाई योगेश पटेल की मदद से तीन पुलिस कॉन्स्टेबलों के साथ मिलकर अपने दोस्त गोपाल सिंह से पैसे ऐंठने की साजिश रची। पुलिसकर्मियों ने वर्दी का दुरुपयोग कर गोपाल को डरा-धमकाया और पैसे वसूले। मामले में कैफे ऑनर और तीनों कॉन्स्टेबल गिरफ्तार कर लिए गए हैं, जबकि पैसे लेकर फरार योगेश की तलाश जारी है।
जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक कैफे ऑनर ने अपने चचेरे भाई की मदद से तीन पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर अपने ही दोस्त से अवैध तरीके से पैसे वसूलने की साजिश रची थी। इस मामले में कैफे मालिक और तीन कॉन्स्टेबलों को पुलिस ने गुरुवार रात गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, पैसे लेकर फरार हुए मुख्य आरोपी की तलाश जारी है। यह घटना पुलिस की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है और दिखाती है कि कैसे कुछ लोग वर्दी का दुरुपयोग करके निजी विवादों को सुलझाने की कोशिश करते हैं।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम और विवरण डीसीपी (साउथ) राजर्षि राज के अनुसार, अवैध वसूली के इस मामले में निम्नलिखित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है:पवन कुमार गुर्जर (उम्र 36 वर्ष), निवासी नदबई (भरतपुर), वर्तमान में रजत पथ, मानसरोवर में रहते हैं। यह आरोपी रजत पथ पर एक कैफे चलाता है।बाबूलाल मीणा (उम्र 40 वर्ष), निवासी श्यामपुरा (चंदवाजी)।कैलाश चंद (उम्र 37 वर्ष), निवासी श्रीमाधोपुर (सीकर)। यह नारायण विहार थाने में कॉन्स्टेबल है।अनिल कुमार रागेरा (उम्र 38 वर्ष), निवासी बानूसर (अलवर)।बाबूलाल मीणा और अनिल कुमार रागेरा मानसरोवर थाने में कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात हैं। इन सभी पर अवैध वसूली और साजिश रचने का आरोप है। पुलिस ने इनकी भूमिका की पुष्टि होने के बाद तत्काल गिरफ्तारी की कार्रवाई की।
घटना की पूरी कहानी: कैसे रची गई साजिश? यह पूरा मामला निजी पैसे के लेन-देन के विवाद से जुड़ा है। पीड़ित गोपाल सिंह गुर्जर और उसका दोस्त योगेश पटेल (जो कैफे ऑनर पवन कुमार गुर्जर का चचेरा भाई है) के बीच पुराने पैसे के लेन-देन को लेकर झगड़ा चल रहा था। योगेश को पता चला कि गोपाल के पास हाल ही में कुछ पैसे आए हैं, जो वह अपने पीजी हॉस्टल में रखता है।इसके बाद योगेश ने अपने चचेरे भाई पवन कुमार गुर्जर से संपर्क किया। पवन ने अपने परिचित पुलिसकर्मियों (बाबूलाल मीणा, अनिल कुमार रागेरा और कैलाश चंद) के साथ मिलकर एक प्री-प्लान्ड साजिश रची। प्लान के तहत:योगेश खुद अपनी थार गाड़ी में गोपाल सिंह को बैठाकर भारत माता सर्किल वाली रोड पर घुमाने ले गया।वहां पहले से मौजूद पुलिसकर्मियों ने गाड़ी रोकी और गोपाल को डरा-धमकाना शुरू कर दिया।पुलिसकर्मियों ने कहा कि "तुम उल्टा-सीधा काम करते हो, जॉब से सस्पेंड करवा देंगे" और पैसे की डिमांड की।योगेश को हॉस्टल भेजकर उसके छोटे भाई से पैसे मंगवाए गए।पुलिसकर्मी गोपाल को अपनी गाड़ी में बैठाकर घुमाते रहे और दबाव बनाते रहे।योगेश पैसे लेकर स्वर्ण गार्डन के सामने आया, तब दो पुलिसकर्मी उसे कहीं दूर ले गए।20 मिनट बाद लौटकर पुलिसकर्मियों ने गोपाल से कहा कि "तेरे दोस्त ने कुछ नहीं दिया"।इसके बाद वे स्वर्ण पथ की तरफ घुमाकर मेट्रो स्टेशन के पास ले गए और फिर कहा कि "योगेश से बात हो गई, हमें पैसे मिल गए"।अंत में गोपाल को ऑटो रिक्शा में बैठाकर छोड़ दिया।दरअसल, यह सब नाटकीय ढंग से रचा गया ड्रामा था। योगेश पैसे लेकर मौके से फरार हो गया, जबकि पुलिसकर्मी गोपाल को डराकर रखे हुए थे।
शिकायत और पुलिस कार्रवाई 31 दिसंबर को पीड़ित गोपाल सिंह गुर्जर ने मानसरोवर थाने में इस घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट में उसने पूरी घटना का वर्णन किया। पुलिस जांच में साजिश का खुलासा हुआ और पता चला कि यह सब योगेश पटेल की प्लानिंग थी, जो पवन कुमार गुर्जर और पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर किया गया।पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों को गुरुवार रात गिरफ्तार कर लिया। वहीं, पैसे लेकर फरार योगेश पटेल की तलाश में टीमें दबिश दे रही हैं।