जयपुर-भरतपुर नवजात मौत मामला: एम्बुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने से मासूम की तड़पकर मौत, पिता शव सीने से लगाए भटकता रहा
राजस्थान के भरतपुर से जयपुर ले जाए जा रहे एक नवजात शिशु की एम्बुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म होने से मौत हो गई। ड्राइवर फरार हो गया, जबकि बस्सी पुलिस ने FIR दर्ज करने से इनकार कर पिता को बच्चे के शव के साथ बस में भरतपुर भेज दिया। पीड़ित पिता मुकेश कुमार ने लापरवाही का आरोप लगाया।
राजस्थान के भरतपुर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक नवजात शिशु की मौत एम्बुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म होने के कारण हो गई। पिता मुकेश कुमार का आरोप है कि एम्बुलेंस ड्राइवर लापरवाही बरतते हुए फरार हो गया, जबकि बस्सी पुलिस ने न तो कोई मदद की और न ही FIR दर्ज की। पुलिस ने तो पिता को बच्चे के शव के साथ बस में बैठाकर भरतपुर भेज दिया। यह घटना 12 दिसंबर 2025 (शुक्रवार) की बताई जा रही है।
बच्चे का जन्म और शुरुआती इलाज भरतपुर जिले के सिकंदरा थाना क्षेत्र के निवासी मुकेश कुमार के घर 11 दिसंबर को एक पुत्र का जन्म हुआ। जन्म बयाना के सरकारी अस्पताल में हुआ था। जन्म के तुरंत बाद बच्चे को सांस लेने में गंभीर परेशानी हुई। डॉक्टरों ने उसे भरतपुर के जनाना अस्पताल रेफर कर दिया। वहां इलाज के बाद बच्चे की हालत में सुधार नहीं हुआ, इसलिए 12 दिसंबर को सुबह करीब 10:30 बजे जयपुर के बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।मुकेश ने बताया कि बच्चे को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया था। एम्बुलेंस में सिलेंडर से जुड़ी नली के जरिए ऑक्सीजन दी जा रही थी। पिता खुद बच्चे को गोद में लेकर एम्बुलेंस में सवार हुए और जयपुर की ओर रवाना हुए।
रास्ते में ऑक्सीजन खत्म, बच्चे ने तड़पकर तोड़ा दम जयपुर पहुंचने से पहले बस्सी (जयपुर जिले) के पास दोपहर करीब 12:30 बजे एम्बुलेंस के सिलेंडर में ऑक्सीजन खत्म हो गई। बच्चा अचानक तड़पने लगा। मुकेश ने ड्राइवर को रोका, लेकिन ड्राइवर ने बस्सी के सरकारी अस्पताल में बच्चे को उतारा और खुद वहां से फरार हो गया।पिता के अनुसार, उनकी गोद में ही एक दिन के मासूम बच्चे ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। एम्बुलेंस ड्राइवर की लापरवाही से यह हादसा हुआ। बच्चे की मौत के बाद मुकेश शव को सीने से लगाए अस्पताल परिसर में इधर-उधर भटकता रहा।
पुलिस की उदासीनता: FIR नहीं, शव के साथ बस में बैठाया मुकेश ने बस्सी पुलिस को फोन कर पूरी घटना बताई। पुलिस मौके पर पहुंची और एम्बुलेंस को जब्त कर लिया, लेकिन पिता की कोई मदद नहीं की। मुकेश का आरोप है कि पुलिस ने कहा कि यहां इस मामले में FIR दर्ज नहीं होगी। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसे बच्चे के शव के साथ एक साधारण बस में बैठा दिया और भरतपुर भेज दिया।रात करीब 9 बजे मुकेश भरतपुर के जनाना अस्पताल पहुंचे। वहां स्टाफ को पूरी घटना बताई, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। फिर वे मथुरा गेट थाने गए, जहां पुलिस ने कहा कि FIR बस्सी थाने में ही दर्ज होगी। अंत में थके-हारे मुकेश बच्चे के शव को लेकर अपने गांव लौट आए और रात में ही नवजात का अंतिम संस्कार कर दिया।
पिता का दर्द: कोई सुनवाई नहीं मुकेश कुमार ने मीडिया से बातचीत में अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा, "मैं बच्चे के शव को लेकर भरतपुर जनाना अस्पताल पहुंचा, स्टाफ को सब बताया, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। मथुरा गेट थाने में भी FIR बस्सी में होगी कहा गया। अंत में गांव आकर रात में ही दफना दिया।" मुकेश ने एम्बुलेंस ड्राइवर की लापरवाही और पुलिस की उदासीनता को बच्चे की मौत का जिम्मेदार ठहराया।यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन व्यवस्थाओं में गंभीर खामियों को उजागर करती है। एम्बुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर की पर्याप्त व्यवस्था न होना और ड्राइवर का फरार हो जाना लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। वहीं पुलिस का FIR दर्ज न करना और शव के साथ बस में भेजना मानवीय संवेदना की कमी दर्शाता है।