शादी में रोटी-पराठे कम बनाओ, कुछ और खाओ": बड़वानी DM जयति सिंह का वायरल सुझाव, गैस बचत की अपील
मध्य प्रदेश के बड़वानी की डीएम जयति सिंह ने शादियों में गैस बचाने के लिए सुझाव दिया कि रोटी-पराठे कम बनाएं, इनकी जगह अन्य व्यंजन खाएं और इंडक्शन चूल्हा या डीजल भट्टी का उपयोग करें। उन्होंने कहा गैस की कमी नहीं है, लेकिन विवेकपूर्ण फैसले से स्थिति बेहतर हो सकती है। बयान वायरल, बहस छिड़ी।
मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले की कलेक्टर जयति सिंह (IAS) के एक बयान ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। उन्होंने शादी-विवाह के मौसम में गैस की बचत के लिए सुझाव दिया है कि शादियों के मेन्यू में बदलाव किया जाए। रोटी और पराठे जैसे व्यंजनों में ज्यादा ईंधन (गैस) लगता है, इसलिए इनकी जगह कुछ और खाना खाया जा सकता है। साथ ही, शादियों में इंडक्शन चूल्हा या डीजल भट्टी का उपयोग करने की सलाह दी है। जयति सिंह ने स्पष्ट किया कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा, "थोड़ा विवेकपूर्ण निर्णय लेकर प्रतिकूल स्थिति का सामना कर सकते हैं!!"
यह बयान 14-15 मार्च 2026 के आसपास सामने आया, जब मध्य प्रदेश में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर चर्चा चल रही थी। हालांकि प्रशासन बार-बार दावा कर रहा है कि प्रदेश में गैस की कोई किल्लत नहीं है, लेकिन कई जिलों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें और उपभोक्ताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में बड़वानी की डीएम जयति सिंह का यह सुझाव लोगों को गैस बचाने के लिए व्यावहारिक कदम उठाने की अपील के रूप में देखा जा रहा है, खासकर शादी के सीजन में जहां बड़े पैमाने पर खाना बनता है और गैस का खपत बहुत ज्यादा होता है।
जयति सिंह ने होटल, मैरिज गार्डन और थिएटर एसोसिएशन से भी अपील की कि वे अपने मेन्यू पर पुनर्विचार करें। उन्होंने कहा, "हम लोग अपने मेन्यू में भी एक बार फिर से पुनर्विचार कर सकते हैं। अगर विवेकपूर्ण निर्णय लेने से परिस्थितियां बेहतर हो सकती हैं।" उनका मुख्य जोर रोटी-पराठे पर था, क्योंकि ये तवे पर सीधे गैस की लौ से बनते हैं और लंबे समय तक गैस जलती रहती है। एक बड़े विवाह में सैकड़ों रोटियां बनती हैं, जिससे गैस का भारी खपत होता है। उनकी सलाह है कि ऐसे में पूड़ी, नान, ब्रेड, इडली, डोसा, पोहा, उपमा या अन्य ऐसे व्यंजन शामिल किए जा सकते हैं जो कम समय या वैकल्पिक ईंधन से बन सकें।
यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। कई यूजर्स ने इसे व्यावहारिक और पर्यावरण-अनुकूल बताया, जबकि कुछ ने इसे अतिरंजित और आम जनता पर बोझ डालने वाला करार दिया। एक यूजर ने लिखा, "शादी में रोटी नहीं तो क्या खाएं? यह तो भारतीय संस्कृति का हिस्सा है!" वहीं दूसरे ने कहा, "अच्छी सलाह है, गैस बचाओ, इंडक्शन यूज करो।" वीडियो में जयति सिंह स्पष्ट रूप से कह रही हैं कि गैस की कमी नहीं है, लेकिन बचत के उपाय अपनाने चाहिए।
जयति सिंह 2016 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। वे पहले उज्जैन जिला पंचायत में सीईओ रह चुकी हैं और बड़वानी में पानसेमल, पाटी जैसे क्षेत्रों में भी काम कर चुकी हैं। उनकी छवि एक सख्त और जन-कल्याणकारी अफसर की है। पहले भी उन्होंने जिले में कई सुधार किए हैं, जैसे माफिया पर नकेल कसना और विकास कार्यों को गति देना। यह बयान भी उनके इसी दृष्टिकोण का हिस्सा लगता है – संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग।
शादी के सीजन में मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में गैस की मांग बहुत बढ़ जाती है। बड़े-बड़े भोज में दर्जनों सिलेंडर इस्तेमाल होते हैं। इंडक्शन चूल्हे बिजली पर चलते हैं, जो ग्रामीण इलाकों में उपलब्ध नहीं होती, लेकिन शहरों में यह विकल्प अच्छा हो सकता है। डीजल भट्टी भी बड़े आयोजनों में इस्तेमाल होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि रोटी-पराठे की जगह राइस-बेस्ड डिशेज या बेकरी आइटम्स से गैस की 30-40% बचत हो सकती है।
यह मुद्दा अब बहस का विषय बन गया है। क्या शादियों में परंपरा बदलनी चाहिए? या यह सिर्फ अस्थायी संकट के लिए सलाह है? जयति सिंह का बयान दिखाता है कि प्रशासन न सिर्फ दावे करता है, बल्कि व्यावहारिक समाधान भी सुझा रहा है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि इस सलाह पर कितने लोग अमल करते हैं। फिलहाल, यह बयान भारतीय शादियों की परंपरा और आधुनिक संसाधन प्रबंधन के बीच संतुलन की जरूरत को रेखांकित करता है।