गहलोत का तीखा प्रहार: मुख्य सचिव सुधांश पंत की दिल्ली प्रतिनियुक्ति पर सवाल, बोले- सीएम भजनलाल शर्मा की स्थिति भी ऐसी न हो जाए; वसुंधरा राजे को घर बैठाने पर अफसोस, बीजेपी कार्यक्रमों को इवेंट की तरह चला रही सरकार

पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने मुख्य सचिव सुधांश पंत की अचानक दिल्ली प्रतिनियुक्ति पर चिंता जताई, कहा- कहीं सीएम भजनलाल शर्मा की स्थिति ऐसी न हो जाए; वसुंधरा राजे को घर बैठाने पर अफसोस, भाजपा कार्यक्रमों को इवेंट बता निशाना साधा।

Nov 12, 2025 - 13:34
गहलोत का तीखा प्रहार: मुख्य सचिव सुधांश पंत की दिल्ली प्रतिनियुक्ति पर सवाल, बोले- सीएम भजनलाल शर्मा की स्थिति भी ऐसी न हो जाए; वसुंधरा राजे को घर बैठाने पर अफसोस, बीजेपी कार्यक्रमों को इवेंट की तरह चला रही सरकार

राजस्थान की सियासत में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बेबाकी ने हलचल मचा दी है। मंगलवार शाम को उदयपुर के सर्किट हाउस में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत के दौरान गहलोत ने वर्तमान भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव (सीएस) सुधांश पंत की अचानक दिल्ली प्रतिनियुक्ति पर चिंता जताई और चेतावनी दी कि कहीं यह स्थिति मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की न हो जाए। साथ ही, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की अनदेखी पर अफसोस जताते हुए कहा कि वे योग्य नेता थीं, न जाने उन्हें घर क्यों बैठा दिया गया। गहलोत ने सरकार के शहरी सेवा शिविरों की मॉनिटरिंग पर भी सवाल उठाए और विपक्ष की भूमिका निभाने का ऐलान किया।

मुख्य सचिव सुधांश पंत की दिल्ली ट्रांसफर पर गहलोत की चिंता:  राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के वरिष्ठ अधिकारी सुधांश पंत को हाल ही में मुख्य सचिव के पद पर नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति के बाद से ही वे राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण फैसलों में अहम भूमिका निभा रहे थे। लेकिन अचानक दिल्ली में केंद्र सरकार के किसी विभाग में प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने की खबर ने राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैला दी। इस कदम को विपक्ष ने सत्ता पक्ष की आंतरिक कलह का संकेत माना है।पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "यह जानकारी अचानक सामने आई। मुझे चिंता है कि यह स्थिति मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की न हो जाए।" गहलोत ने शर्मा पर तंज कसते हुए जोड़ा, "इनको पहली बार मौका मिला, पहली बार मुख्यमंत्री बने, पहली बार के एमएलए हैं। भगवान ने इनको मौका दे दिया है और वह व्यक्ति ऐसा है कि समझ नहीं पा रहा है।" उनका यह बयान मुख्यमंत्री की अनुभवहीनता पर सीधा हमला था। गहलोत ने इशारा किया कि पंत जैसे अनुभवी नौकरशाह को हटाने से प्रशासनिक अस्थिरता बढ़ेगी, जो अंततः शर्मा सरकार की छवि को प्रभावित कर सकती है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंत की प्रतिनियुक्ति केंद्र-राज्य संबंधों के दबाव या आंतरिक सिफारिशों का नतीजा हो सकती है। लेकिन गहलोत ने इसे भाजपा सरकार की कमजोरी का प्रतीक बताया, जो सत्ता संभालने के एक साल बाद भी स्थिरता हासिल नहीं कर पाई है।

वसुंधरा राजे की अनदेखी पर गहलोत का भावुक पक्ष;  गहलोत के बयान का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से जुड़ा था। राजे, जो भाजपा की वरिष्ठ नेता और राजस्थान की राजनीति की दिग्गज शख्सियत हैं, हाल के दिनों में पार्टी के कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए हैं। बजट सत्र के दौरान उनकी अनुपस्थिति और संगठनात्मक मीटिंग्स से बहिष्कार ने अटकलों को जन्म दिया था। गहलोत ने राजे की तारीफ करते हुए कहा, "वसुंधरा योग्य थीं, न जाने घर क्यों बैठा दिया गया।"यह बयान राजे के समर्थकों के बीच तो खुशी का विषय बना, लेकिन भाजपा के लिए असहज साबित हो सकता है। गहलोत ने आगे कहा कि राजे जैसी अनुभवी नेता को दरकिनार करना पार्टी की रणनीतिक भूल है। राजस्थान में राजे का प्रभाव जाट और महिलाओं के बीच मजबूत माना जाता है, और उनकी अनदेखी से भाजपा का वोट बैंक प्रभावित हो सकता है। गहलोत का यह कदम विपक्ष की रणनीति का हिस्सा लगता है, जहां वे भाजपा के आंतरिक विभाजन को उजागर करने की कोशिश कर रहे हैं।

शहरी सेवा शिविरों पर सवाल, विपक्ष की भूमिका पर जोर;  बातचीत के दौरान गहलोत ने वर्तमान सरकार के एक प्रमुख कार्यक्रम 'राजस्थान के शहरी सेवा शिविर' पर भी निशाना साधा। यह शिविर राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में विभिन्न सरकारी सेवाओं को एक छत के नीचे उपलब्ध कराना है। लेकिन गहलोत ने कहा, "शहरी सेवा शिविर की मॉनिटरिंग कौन कर रहा है? से भी पता नहीं चल रहा है कि चल रहे हैं या नहीं।"उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार इन कार्यक्रमों को महज 'इवेंट' की तरह चला रही है, जहां प्रचार तो भरपूर होता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई असर नहीं दिखता। गहलोत ने कहा कि शिविरों में घोषणाओं की भरमार है, लेकिन उनका क्रियान्वयन कमजोर है। यह आलोचना कांग्रेस की पुरानी रणनीति को दर्शाती है, जहां वे कल्याणकारी योजनाओं पर फोकस करते हुए सत्ता पक्ष की कमियों को उजागर करते हैं।

विपक्ष की भूमिका निभाने का ऐलान;  अपने बयान के अंत में गहलोत ने विपक्ष की भूमिका पर स्पष्टता लाई। उन्होंने कहा, "मैं कहना चाहता हूं कि हम विपक्ष में हैं तो हम उसकी भूमिका निभाएंगे, कमियां बताएंगे, आलोचना करेंगे। सरकार को इस पर अन्यथा नहीं लेना चाहिए।" यह बयान लोकतंत्र की मजबूती पर जोर देता नजर आया, लेकिन साथ ही सरकार को चुनौती भी था। गहलोत ने इशारा किया कि कांग्रेस पूर्ण रूप से विपक्षी मोर्चे पर सक्रिय होगी और जन मुद्दों को विधानसभा से लेकर सड़क तक उठाएगी।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और संभावित प्रभाव;   यह बयान राजस्थान विधानसभा चुनावों के नजदीक आते हुए महत्वपूर्ण है। 2023 के चुनावों में भाजपा ने भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाकर वसुंधरा राजे के समर्थकों को नाराज किया था। गहलोत, जो खुद दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं, इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश में लगे हैं। सुधांश पंत की ट्रांसफर को लेकर अफसरशाही और राजनीति के गठजोड़ पर भी सवाल उठे हैं। राज्य में मुख्य सचिव का पद अत्यंत संवेदनशील होता है, और इसकी अचानक बदलाव से नीतिगत फैसलों पर असर पड़ सकता है।

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.