फर्जी एक्सीडेंट दिखाकर 20.50 लाख का बीमा क्लेम मांगा: कोर्ट ने याचिका खारिज कर लगाया 1 लाख का भारी जुर्माना, पत्नी और ट्रक मालिक को आर्मी वेलफेयर फंड में जमा कराने होंगे पैसे
दौसा के अजय सिंह उर्फ पप्पू सिंह ने 2009 में ट्रक हादसे में पैर कटने का फर्जी दावा करके 20.50 लाख रुपये का बीमा क्लेम मांगा। जांच में FIR देर से दर्ज, कोई सबूत नहीं, ट्रक मालिक गैरहाजिर मिलने पर लेबर कोर्ट-1 जयपुर एवं कर्मचारी क्षतिपूर्ति कमिश्नर दौसा ने याचिका खारिज कर दी। अजय की मौत के बाद पत्नी पुष्पा कंवर ने पैरवी की। कोर्ट ने फर्जीवाड़े पर 1 लाख रुपये का हर्जाना लगाया, जिसे पत्नी और ट्रक मालिक राजेश कुमार को 50-50 हजार रुपये के हिसाब से 6 अप्रैल 2026 तक आर्मी वेलफेयर युद्ध हताहत कल्याण फंड में जमा करना होगा।
दौसा (राजस्थान): एक ट्रक ड्राइवर के कथित हादसे में पैर कटने का दावा करके बीमा कंपनी से करीब 20.50 लाख रुपये की मुआवजा राशि हासिल करने की कोशिश आखिरकार कोर्ट में फेल हो गई। लेबर कोर्ट-1 जयपुर और कर्मचारी क्षतिपूर्ति आयुक्त दौसा ने गहन जांच के बाद पूरे मामले को फर्जी करार देते हुए याचिका खारिज कर दी। साथ ही, याचिकाकर्ता पक्ष और ट्रक मालिक पर कुल 1 लाख रुपये का विशेष हर्जाना (जुर्माना) लगाया गया है, जिसे आर्मी वेलफेयर युद्ध हताहत कल्याण फंड में जमा करना अनिवार्य किया गया है।
मामले की पूरी कहानी
यह पूरा प्रकरण दौसा जिले के अयोध्या नगर निवासी अजय सिंह उर्फ पप्पू सिंह से जुड़ा है। अजय सिंह ने कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत लेबर कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनके अनुसार, वे दौसा में रेलवे स्टेशन के सामने रहने वाले ट्रक मालिक राजेश कुमार के यहां ड्राइवर के पद पर कार्यरत थे।
याचिका में दावा किया गया कि 11 दिसंबर 2009 को अजय सिंह सीकर से जयपुर की ओर ट्रक चला रहे थे। रास्ते में ग्राम अणतपुरा मोड़ के पास एक नीलगाय को बचाने की कोशिश में ट्रक पेड़ से टकरा गया। इस हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए और इलाज के दौरान उनका बायां पैर घुटने के पास से काटना पड़ा।
क्लेम में अजय सिंह की उम्र लगभग 40 वर्ष और मासिक आय 9 हजार रुपये बताई गई। इसी आधार पर ट्रक मालिक और बीमा कंपनी से 20 लाख 50 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
मामले की लंबी सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने कई ऐसे प्रमाण और तथ्य आए, जिन्होंने पूरे दावे की सत्यता पर गहरा संदेह पैदा कर दिया:कथित दुर्घटना की FIR हादसे के डेढ़ महीने बाद दर्ज कराई गई, जबकि इसके पीछे कोई ठोस वजह नहीं बताई गई।हादसे से जुड़े कोई ठोस दस्तावेज या सबूत पेश नहीं किए गए, जैसे ट्रक को हुए नुकसान की तस्वीरें, मरम्मत के बिल आदि।थाने के रोजनामचे में भी ऐसी किसी दुर्घटना का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला (बीमा कंपनी की ओर से यह जानकारी दी गई)।ट्रक मालिक राजेश कुमार खुद गवाही के लिए कोर्ट में पेश नहीं हुए।याचिकाकर्ता पक्ष (अजय सिंह की पत्नी) यह भी साबित नहीं कर सका कि अजय सिंह वास्तव में उस ट्रक पर ड्राइवर के रूप में काम करता था।इन सभी कमजोरियों और संदिग्ध तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने क्लेम को झूठे और मनगढ़ंत तथ्यों पर आधारित मानते हुए याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करार दिया।
अजय सिंह की मौत के बाद पत्नी बनीं पक्षकार
याचिका दायर होने के बाद सुनवाई के दौरान ही अजय सिंह की मौत हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी पुष्पा कंवर को केस में पक्षकार बनाया गया और उन्होंने ही मुकदमे की आगे पैरवी की।
1 लाख का जुर्माना और जमा करने की समयसीमा
कोर्ट ने फर्जीवाड़े को गंभीरता से लेते हुए याचिकाकर्ता पक्ष (पुष्पा कंवर) और ट्रक मालिक राजेश कुमार पर कुल 1 लाख रुपये का हर्जाना लगाया। इसमें से:50 हजार रुपये पुष्पा कंवर को,50 हजार रुपये राजेश कुमार को। जमा कराने होंगे। यह पूरी राशि 6 अप्रैल 2026 तक आर्मी वेलफेयर युद्ध हताहत कल्याण फंड में जमा करनी होगी। यदि तय समयसीमा में पैसे जमा नहीं हुए, तो यह रकम राजस्व बकाया की तरह वसूली की जाएगी।