सस्ते ड्राई फ्रूट्स बेचने के नाम पर ठगी करने वाले बड़े साइबर गैंग का भंडाफोड़: डीग पुलिस की बड़ी कार्रवाई

भरतपुर के डीग क्षेत्र में पुलिस ने 'ऑपरेशन एंटीवायरस' के तहत सस्ते ड्राई फ्रूट्स और कपड़े बेचने के नाम पर सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन चलाकर ठगी करने वाले बड़े साइबर गैंग का भंडाफोड़ किया। 7 ठगों को गिरफ्तार किया गया, 2 बाल अपराधियों को हिरासत में लिया गया। गैंग ने पिछले 5 सालों में 2000 से ज्यादा लोगों से करीब 6 करोड़ रुपये की ठगी की। पुलिस ने 9 मोबाइल, 11 फर्जी सिम और एक पिकअप गाड़ी बरामद की।

Dec 20, 2025 - 15:45
सस्ते ड्राई फ्रूट्स बेचने के नाम पर ठगी करने वाले बड़े साइबर गैंग का भंडाफोड़: डीग पुलिस की बड़ी कार्रवाई

भरतपुर जिले के डीग क्षेत्र में साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान 'ऑपरेशन एंटीवायरस' के तहत पुलिस ने एक बड़े ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गैंग सोशल मीडिया पर सस्ते दामों में ड्राई फ्रूट्स और कपड़ों की बिक्री का लालच देकर लोगों को ठगता था। पुलिस की इस कार्रवाई में 7 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 2 बाल अपराधियों को निरुद्ध (हिरासत में लिया गया) किया गया है।

कार्रवाई की जगह और बरामदगी डीग एसपी ओमप्रकाश मीणा के निर्देशन में कैथवाड़ा पुलिस थाने की टीम ने जाजमका गांव के पहाड़ की तलहटी में छापेमारी की। यहां जंगल क्षेत्र में छिपकर ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहे इस गिरोह को रंगे हाथों पकड़ा गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से निम्न सामान बरामद किया: 9 मोबाइल फोन, 11 फर्जी सिम कार्ड,1 पिकअप गाड़ी (जिसका इस्तेमाल ठगी की गतिविधियों में किया जाता था)।

ठगी का तरीका: सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन यह गिरोह बेहद शातिराना अंदाज में काम करता था। ठग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे फेसबुक, व्हाट्सएप आदि) पर सक्रिय रहते थे। उनका मुख्य तरीका यह था:किसी शहर की प्रसिद्ध और भरोसेमंद दुकान के मूल विज्ञापन को सोशल मीडिया से डाउनलोड करते थे।उस विज्ञापन में अपना फर्जी मोबाइल नंबर जोड़कर एडिट कर देते थे।फिर उसे उसी शहर की लोकेशन सेट करके दोबारा प्रसारित करते थे, ताकि यह स्थानीय और विश्वसनीय लगे।विज्ञापन में सस्ते दामों पर ड्राई फ्रूट्स (जैसे बादाम, काजू, पिस्ता आदि) और कपड़े बेचने का झांसा दिया जाता था।जब कोई व्यक्ति संपर्क करता, तो ठग डिलीवरी चार्ज, कूरियर चार्ज या एडवांस पेमेंट के नाम पर पैसे मंगवा लेते थे।पैसे मिलने के बाद न तो सामान भेजते थे और न ही पैसे वापस करते थे। पीड़ित को ब्लॉक कर देते थे।इस तरह वे लोगों की भरोसे को तोड़कर आसानी से ठगी कर लेते थे।

ठगी का पैमाना: 6 करोड़ रुपये और 2000 से अधिक पीड़ित पुलिस जांच से पता चला है कि यह गैंग पिछले पांच वर्षों से सक्रिय था। अब तक देश के विभिन्न राज्यों में 2000 से अधिक लोगों से ठगी की वारदातें की गई हैं। अनुमानित ठगी की राशि लगभग 6 करोड़ रुपये है। पीड़ितों में आम नागरिक, छोटे व्यापारी और घरेलू ग्राहक शामिल हैं, जो सस्ते सामान के लालच में फंस गए।

आगे की जांच और कार्रवाई पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है। मुख्य बिंदु: फर्जी सिम कार्ड कहां से और कैसे प्राप्त किए जाते थे?ठगी के पैसे बैंक खातों से कैसे निकाले और ट्रांसफर किए जाते थे? आरोपियों की संपत्ति (घर, वाहन आदि) की जांच की जा रही है। अगर यह ठगी की कमाई से बनी है, तो नए साइबर क्राइम कानूनों के तहत कुर्की की कार्रवाई होगी।

'ऑपरेशन एंटीवायरस' का व्यापक प्रभाव डीग और भरतपुर क्षेत्र (मेवात इलाका) लंबे समय से साइबर ठगी के हॉटस्पॉट के रूप में जाना जाता था। यहां के कई गांवों से संगठित गिरोह ठगी की वारदातें करते थे। एसपी ओमप्रकाश मीणा के नेतृत्व में चलाया जा रहा 'ऑपरेशन एंटीवायरस' अभियान साइबर अपराधियों पर लगाम कसने में सफल साबित हो रहा है। इस अभियान के तहत: साइबर ठगी के हॉटस्पॉट गांवों को चिह्नित किया जा रहा है।लगातार छापेमारी और गिरफ्तारियां की जा रही हैं।इससे क्षेत्र में साइबर क्राइम में काफी कमी आई है।यह कार्रवाई न केवल ठगों को सलाखों के पीछे भेज रही है, बल्कि आम लोगों को साइबर ठगी से सतर्क रहने का संदेश भी दे रही है। पुलिस का सुझाव है कि ऑनलाइन खरीदारी करते समय हमेशा विश्वसनीय प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करें, एडवांस पेमेंट से बचें और संदिग्ध विज्ञापनों पर क्लिक न करें।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.