जयपुर: सरकारी वाहन में जा रहे RTO अधिकारी को रोककर दी गई जान से मारने की धमकी, वर्दी उतरवाने की भी चेतावनी
जयपुर के चौमूं थाना क्षेत्र में टाटियावास टोल के पास एक फॉर्च्यूनर कार चालक ने सरकारी वाहन में जा रहे परिवहन निरीक्षक (आरटीओ) अनिल बसवाल को रोककर गंभीर धमकी दी। आरोपी ने वर्दी उतरवाने और जान से मारने की बात कही। पीड़ित ने चौमूं थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर नामजद FIR हुई और पुलिस जांच कर रही है। यह घटना आरटीओ अधिकारियों की सुरक्षा पर सवाल उठाती है।
जयपुर जिले के चौमूं थाना क्षेत्र में एक गंभीर घटना सामने आई है, जहां परिवहन विभाग (RTO) के एक अधिकारी को उनकी सरकारी गाड़ी में यात्रा करते समय रोककर धमकी दी गई। आरोपी ने न केवल अधिकारी की वर्दी उतरवाने की बात कही, बल्कि जान से मारने की भी धमकी दी। यह घटना टाटियावास टोल प्लाजा के पास हुई, जिसके बाद पीड़ित अधिकारी अनिल बसवाल ने चौमूं थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले में एक फॉर्च्यूनर वाहन के चालक के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है और जांच शुरू कर दी है।
घटना का विवरण
परिवहन निरीक्षक (RTO इंस्पेक्टर) अनिल बसवाल सरकारी ड्यूटी पर थे और अपनी आधिकारिक गाड़ी में जा रहे थे। टाटियावास टोल के नजदीक एक फॉर्च्यूनर कार ने उनकी गाड़ी को रोक लिया। कार चालक ने उतरकर अधिकारी से बहस शुरू की और गुस्से में आकर उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। आरोपी ने कहा कि वह उनकी वर्दी उतरवाएगा और यहां तक कि जान से मार डालेगा। यह धमकी सुनकर अधिकारी ने तुरंत स्थिति को संभाला और मौके से सुरक्षित निकलकर चौमूं थाने पहुंचे।
शिकायत और पुलिस कार्रवाई
अनिल बसवाल ने थाने में लिखित शिकायत दी, जिसमें फॉर्च्यूनर चालक पर नामजद आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में धमकी देने, सरकारी अधिकारी को डराने-धमकाने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप शामिल हैं। चौमूं थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस जांच कर रही है कि आरोपी ने ऐसा क्यों किया, क्या कोई पुरानी रंजिश थी या यह सड़क विवाद का मामला है।
आरटीओ अधिकारियों पर हमलों का बढ़ता खतरा
यह घटना राजस्थान में आरटीओ अधिकारियों पर हो रहे हमलों और धमकियों की एक और कड़ी है। पहले भी ओवरलोड वाहनों की चेकिंग के दौरान ट्रक-ट्रैक्टर चालकों से झड़पें और हमले हो चुके हैं, जैसे कि मारपीट, पत्थरबाजी या गाड़ी को नुकसान पहुंचाना। ऐसे मामलों में अधिकारी अक्सर असुरक्षित महसूस करते हैं, क्योंकि वे ड्यूटी के दौरान बिना पर्याप्त सुरक्षा के सड़कों पर चेकिंग करते हैं।