बाड़मेर पुलिस में बड़े फेरबदल: मनोज कुमार बने कोतवाल, कई थानों के इंचार्ज बदले
बाड़मेर जिले में पुलिस विभाग के बड़े फेरबदल में मनोज कुमार को शहर कोतवाली का नया कोतवाल बनाया गया है। अशोक कुमार नागाणा, भंवरसिंह रीको थाने सहित कई थाना प्रभारियों के साथ 8 सब-इंस्पेक्टर के भी ट्रांसफर किए गए हैं।
बाड़मेर, 21 नवंबर 2025: राजस्थान के बाड़मेर जिले में पुलिस प्रशासन में व्यापक स्तर पर फेरबदल किया गया है। जिला पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक साथ कई महत्वपूर्ण पदों पर स्थानांतरण आदेश जारी किए गए हैं। इस फेरबदल का मुख्य फोकस थाना प्रभारियों (इंचार्ज) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के पुनर्वितरण पर है, जिससे स्थानीय कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और नई ऊर्जा करने का प्रयास किया जा रहा है।प्रमुख बदलाव: मनोज कुमार बने कोतवालइस फेरबदल की सबसे चर्चित नियुक्ति मनोज कुमार की है, जिन्हें बाड़मेर शहर कोतवाल (सदर कोतवाली) का दायित्व सौंपा गया है। मनोज कुमार एक अनुभवी अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं, जिन्होंने पहले विभिन्न थानों में उत्कृष्ट कार्य किया है। उनकी नियुक्ति से शहर की कोतवाली में निगरानी और अपराध नियंत्रण पर विशेष जोर दिया जाएगा। कोतवाल के पद पर उनकी तैनाती से अपेक्षा की जा रही है कि शहर के व्यस्त इलाकों में बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगेगा।
थाना प्रभारियों में बड़े बदलाव
8 एसआई के ट्रांसफर: युवा अधिकारियों को नई जिम्मेदारियांफेरबदल का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा 8 सब-इंस्पेक्टर (एसआई) के स्थानांतरण है। इन युवा अधिकारियों को विभिन्न थानों और विभागों में पुनर्वितरित किया गया है, ताकि उनकी क्षमताओं का बेहतर उपयोग हो सके। हालांकि, विशिष्ट नामों और उनके नए पदस्थानों की पूरी सूची अभी आधिकारिक रूप से जारी नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह कदम पुलिस महकमे में ताजगी लाने के उद्देश्य से उठाया गया है। इन ट्रांसफर से एसआई स्तर पर तैनाती में संतुलन आना सुनिश्चित होगा, खासकर ग्रामीण और शहरी थानों के बीच।
फेरबदल का पृष्ठभूमि और उद्देश्य; यह स्थानांतरण बाड़मेर जिले की बदलती सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। बाड़मेर, जो राजस्थान-पाकिस्तान सीमा से सटा हुआ जिला है, में तस्करी, अवैध हथियारों की आवक और सामुदायिक विवाद जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि ये बदलाव प्रदर्शन के आधार पर हैं, जिसमें पिछले कुछ महीनों में अपराध दर, FIR निस्तारण और जनसंपर्क जैसे पैरामीटर्स शामिल हैं। इससे न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि आमजन का पुलिस पर विश्वास भी मजबूत होगा।