बाड़मेर जिला अस्पताल में खुशियों की बहार एक साथ जन्मे दो बेटियां और एक बेटा.

बाड़मेर जिला अस्पताल में एक महिला ने एक साथ तीन बच्चों को जन्म दिया। महिला ने दो बेटियों और एक बेटे को सिजेरियन डिलीवरी से जन्म दिया। तीनों नवजात प्रीमेच्योर हैं, लेकिन पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें निगरानी के लिए एनएनसीयू वार्ड में रखा गया है। डॉक्टरों के अनुसार यह जिला अस्पताल का दुर्लभ और संभवतः पहला ट्रिपलेट्स केस है।

Jan 18, 2026 - 09:09
Jan 18, 2026 - 10:04
बाड़मेर जिला अस्पताल में खुशियों की बहार एक साथ जन्मे दो बेटियां और एक बेटा.

बाड़मेर:- जिले के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के लिए यह पल खास रहा, जब जिला अस्पताल में एक महिला ने एक साथ तीन बच्चों को जन्म दिया। इस दुर्लभ प्रसव में महिला ने दो बेटियों और एक बेटे को जन्म दिया। जच्चा और तीनों नवजात सुरक्षित हैं, जिससे परिवार के साथ-साथ अस्पताल स्टाफ में भी खुशी का माहौल है।

सिजेरियन से कराई गई सुरक्षित डिलीवरी

अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पवन धारीवाल ने बताया कि गर्भवती महिला की यह दूसरी डिलीवरी थी। पहले एक बच्चे का जन्म सामान्य प्रसव से हुआ था, लेकिन इस बार गर्भ में तीन शिशु होने के कारण सामान्य डिलीवरी में जोखिम था। मां और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों की टीम ने सिजेरियन ऑपरेशन का फैसला लिया और सफलतापूर्वक प्रसव कराया।

प्रीमेच्योर होने के कारण एनएनसीयू में निगरानी

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. हरीश चौहान के अनुसार, तीनों नवजात लगभग आठ माह के प्रीमेच्योर हैं। सावधानी के तौर पर उन्हें एनएनसीयू वार्ड में रखा गया है। प्रत्येक बच्चे का वजन करीब दो किलो है और उनकी सेहत स्थिर बनी हुई है। चिकित्सकों का कहना है कि सभी पैरामीटर सामान्य हैं और जल्द ही बच्चों को डिस्चार्ज किया जा सकता है।

परिवार में खुशी, अस्पताल के लिए भी दुर्लभ मामला

प्रसूता मधु ने बताया कि उनका ससुराल पायला और मायका भुरटिया में है। डिलीवरी के लिए वह पिछले तीन महीनों से मायके में रह रही थीं। पेट दर्द शुरू होने पर परिजन उन्हें जिला अस्पताल लेकर आए, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने भर्ती किया। देर शाम सफल ऑपरेशन के बाद तीनों बच्चों का जन्म हुआ।

डॉक्टरों के मुताबिक जिला अस्पताल में एक साथ तीन बच्चों (ट्रिपलेट्स) का जन्म बेहद कम देखने को मिलता है और संभवतः यह यहां का पहला ऐसा मामला है। यह घटना न केवल परिवार के लिए बल्कि बाड़मेर जिला अस्पताल के लिए भी गर्व का क्षण बन गई है।