बांसवाड़ा में चमका सोने का तीसरा सूरज कांकरिया गांव की खान ने रचा इतिहास, राजस्थान बनेगा स्वर्ण साम्राज्य.
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के घाटोल क्षेत्र में कांकरिया गांव में तीसरी सोने की खान की पुष्टि हुई है। 3 किमी क्षेत्र में स्वर्ण अयस्क के विशाल भंडार मिले हैं, जो जिले को 'सोने का गढ़' बना रहे हैं। खनन शुरू होने से रोजगार और आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। पहले भूकिया और जगपुरिया में भी सोने की खानें मिल चुकी हैं। बांसवाड़ा अब आदिवासी संस्कृति के साथ-साथ भारत के स्वर्ण खजाने के केंद्र के रूप में चमक रहा है।
बांसवाड़ा, 25 अक्टूबर 2025: राजस्थान के दक्षिणी छोर पर बसा आदिवासी बहुल बांसवाड़ा जिला, जो हमेशा से अपनी हरी-भरी वादियों, माही नदी की लहरों और समृद्ध जनजातीय संस्कृति के लिए जाना जाता रहा है, अब एक नई ऊंचाई छू रहा है। यहां घाटोल तहसील के कांकरिया गांव में तीसरी सोने की खान के ब्लॉक की आधिकारिक पुष्टि ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। भूवैज्ञानिक सर्वेक्षणों के बाद मिले ठोस प्रमाणों से साबित हो गया है कि यह इलाका लगभग 3 किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में स्वर्ण अयस्क से लबालब भरा पड़ा है। यह खोज न केवल जिले की आर्थिक तस्वीर बदलने वाली है, बल्कि बांसवाड़ा को 'सोने का गढ़' के रूप में अमिट पहचान दिला रही है।
खोज की पूरी कहानी: कैसे मिला सोने का यह अनमोल खजाना?
यह खबर अचानक नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और वैज्ञानिक खोज का नतीजा है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग (जीएसआई) और राज्य खनिज विभाग के विशेषज्ञों ने घाटोल क्षेत्र में विस्तृत सर्वेक्षण किया, जिसमें ड्रिलिंग, सैंपल टेस्टिंग और जियोलॉजिकल मैपिंग शामिल थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांकरिया गांव के आसपास के 3 किलोमीटर वर्ग क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले स्वर्ण अयस्क के संकेत मिले हैं। अनुमानित भंडार इतना विशाल है कि यह आने वाले दशकों तक खनन के लिए पर्याप्त रहेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रति टन अयस्क में सोने की मात्रा औसतन 2-3 ग्राम तक हो सकती है, जो व्यावसायिक खनन के लिए आदर्श है।यह तीसरी खान है जो बांसवाड़ा को सोने की दुनिया में मजबूत बनाएगी। याद रहे, इससे पहले घाटोल तहसील के ही जगपुरिया और भूकिया क्षेत्रों में दो प्रमुख सोने की खानों की पुष्टि हो चुकी है। जगपुरिया ब्लॉक में 1990-91 के सर्वेक्षण के दौरान ही सोने के संकेत मिले थे, जिसके बाद 69.68 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तीन ब्लॉकों में बांटा गया। भूकिया-जगपुरा इलाके में हाल ही में नीलामी प्रक्रिया पूरी हुई, जहां ऑस्ट्रेलियाई कंपनी मेटल्स माइनिंग ने बोली लगाई। इन खानों का कुल मूल्यांकन करीब 1.34 लाख करोड़ रुपये का है, जो देश के छह प्रमुख स्वर्ण भंडारों में से 25 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान को देता है। कांकरिया की यह नई खोज इन दोनों को जोड़ते हुए एक संयुक्त स्वर्ण पट्टी का निर्माण कर रही है, जो बांसवाड़ा को भारत के प्रमुख माइनिंग हब में तब्दील कर देगी।
आर्थिक उछाल: रोजगार और विकास के नए द्वार खुलेंगे
इस खोज का सबसे बड़ा असर जिले की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। माइनिंग लाइसेंस जारी होते ही खनन कार्य शुरू हो जाएगा, जिससे हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। विशेष रूप से आदिवासी समुदाय, जो जिले की 80 प्रतिशत आबादी है, को प्राथमिकता मिलेगी। राज्य सरकार ने पहले ही घोषणा की है कि खनन परियोजनाओं में स्थानीय युवाओं को ट्रेनिंग और नौकरियां दी जाएंगी। इसके अलावा, सड़कें, बुनियादी ढांचा और पर्यटन विकास को गति मिलेगी। भूकिया क्षेत्र में पहले से ही सड़क निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, जहां मात्र 5 फीट खुदाई में ही पत्थरों पर सुनहरे कण चमक उठे थे। कांकरिया में भी इसी तरह की तैयारियां तेज हो रही हैं।हालांकि, चुनौतियां भी हैं। स्थानीय आदिवासी समुदायों में कुछ विरोध की आवाजें उठ रही हैं। वे मांग कर रहे हैं कि जमीन मालिकों को लीज पर पट्टा, सरकारी ऋण सुविधा और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। चूंकि यह क्षेत्र आरक्षित भूमि है, इसलिए खनन कंपनी को विशेष अनुमतियां लेनी पड़ेंगी। जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी हितधारकों से परामर्श के बाद ही प्रोजेक्ट आगे बढ़ेगा, ताकि विकास और संस्कृति का संतुलन बना रहे।
बांसवाड़ा: आदिवासी धरोहर से स्वर्ण साम्राज्य तक का सफर
बांसवाड़ा को 'दक्षिण राजस्थान का चेरापूंजी' कहा जाता है, जहां औसतन 1,000 मिलीमीटर से अधिक वर्षा होती है। बांस के घने जंगलों से घिरा यह जिला माही नदी के किनारे बसा है, जो मध्य प्रदेश से प्रवेश कर गुजरात की ओर बहती है। ऐतिहासिक रूप से, यह बांसवाड़ा रियासत की राजधानी रहा, जिसकी स्थापना 16वीं शताब्दी में महारावल जगमाल सिंह ने की। यहां की वागड़ संस्कृति गुजराती, मालवी और राजस्थानी तत्वों का अनोखा मिश्रण है। लेकिन अब, सोने की इन खानों से बांसवाड़ा केवल प्राकृतिक सौंदर्य का नहीं, बल्कि आर्थिक शक्ति का प्रतीक बन रहा है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 'स्वर्ण ट्रेल' जैसी योजनाएं भी प्रस्तावित हैं, जहां पर्यटक खनन स्थलों के साथ-साथ स्थानीय मंदिरों और जनजातीय बाजारों का लुत्फ उठा सकेंगे।
कांकरिया की यह सोने की खान बांसवाड़ा के लिए एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ रही है। यह न केवल राजस्थान को देश के स्वर्ण उत्पादन में अग्रणी बनाएगी, बल्कि स्थानीय समुदायों को समृद्धि का सच्चा उपहार देगी। आने वाले समय में यह जिला नई ऊंचाइयों को छुएगा, जहां हर कण सोने की चमक से जगमगा उठेगा!