पेट्रोल प्रकरण के बाद अब चीन का उदाहरण क्यों दे रहे रविंद्र सिंह भाटी? गिरल माइंस आंदोलन पर उठाए बड़े सवाल..

बाड़मेर की गिरल लिग्नाइट माइंस में स्थानीय मजदूरों का आंदोलन करीब 45 दिनों से जारी है। निर्दलीय विधायक Ravindra Singh Bhati भी आंदोलन के समर्थन में सक्रिय हैं। हाल ही में उन्होंने चीन की खदान दुर्घटना का उदाहरण देकर मजदूरों की सुरक्षा, स्थानीय रोजगार और श्रमिक अधिकारों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं।

May 24, 2026 - 13:27
पेट्रोल प्रकरण के बाद अब चीन का उदाहरण क्यों दे रहे रविंद्र सिंह भाटी? गिरल माइंस आंदोलन पर उठाए बड़े सवाल..

बाड़मेर जिले में गिरल लिग्नाइट माइंस को लेकर चल रहा श्रमिक आंदोलन अब लगातार नए राजनीतिक और सामाजिक मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। करीब 45 दिनों से जारी इस आंदोलन में स्थानीय मजदूर अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं, जबकि निर्दलीय विधायक Ravindra Singh Bhati भी लगभग 20 दिनों से आंदोलन के समर्थन में डटे हुए हैं। इसके बावजूद अब तक विवाद के समाधान को लेकर कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।

इस आंदोलन के दौरान पहले विधायक भाटी का खुद पर पेट्रोल छिड़ककर विरोध दर्ज कराने का मामला काफी चर्चा में रहा था। अब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर की एक घटना का उल्लेख करते हुए मजदूर सुरक्षा और खदानों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

चीन की खदान दुर्घटना का उदाहरण देकर उठाए बड़े सवाल

विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने हाल ही में चीन के शांक्सी प्रांत में कथित कोयला खदान हादसे का जिक्र करते हुए मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि दुनिया के किसी भी हिस्से में खदान दुर्घटनाएं केवल स्थानीय घटना नहीं होतीं, बल्कि वे श्रमिकों की सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों पर वैश्विक चिंता पैदा करती हैं।

भाटी का मानना है कि खदानों में काम करने वाले मजदूर लगातार जोखिम के बीच काम करते हैं और ऐसे मामलों से यह सवाल उठता है कि सुरक्षा मानकों का वास्तविक स्तर क्या है।

चीन से गिरल माइंस तक जोड़ा मुद्दा

चीन की घटना का उल्लेख करने के बाद विधायक ने सीधे बाड़मेर की गिरल ओपन लिग्नाइट माइंस की स्थिति पर बात रखी। उनका कहना है कि यदि मजदूर लगातार अपनी सुरक्षा, रोजगार और श्रमिक अधिकारों को लेकर आवाज उठा रहे हैं तो प्रशासन और संबंधित तंत्र को समय रहते ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि किसी संभावित दुर्घटना या बड़े संकट के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से समस्याओं का समाधान किया जाना अधिक जरूरी है।

गिरल माइंस के श्रमिकों की मुख्य मांगें क्या हैं?

धरने पर बैठे स्थानीय मजदूरों और ट्रक चालकों ने कई मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार बताई जा रही हैं—

स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिले

मजदूरों का कहना है कि बाड़मेर क्षेत्र के संसाधनों से जुड़े रोजगार में सबसे पहले स्थानीय युवाओं और भूमिपुत्रों को अवसर दिया जाए।

पुराने कर्मचारियों को हटाने पर विरोध

आंदोलनकारी आरोप लगा रहे हैं कि नए ठेके की प्रक्रिया के बाद लंबे समय से काम कर रहे स्थानीय श्रमिकों और चालकों को हटाने की कोशिश हो रही है।

श्रम नियमों के अनुसार कार्य व्यवस्था

श्रमिकों की मांग है कि उनसे निर्धारित समय सीमा के अनुसार कार्य लिया जाए तथा न्यूनतम वेतन और अन्य अधिकारों की गारंटी सुनिश्चित की जाए।

अब आंदोलन किस दिशा में बढ़ सकता है?

गिरल आंदोलन केवल मजदूरों की मांगों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह स्थानीय रोजगार, श्रमिक सुरक्षा और प्रशासनिक कार्रवाई के मुद्दे के रूप में भी उभरता दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर सरकार और संबंधित पक्षों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर भी लोगों की नजर बनी हुई है।

फिलहाल आंदोलन जारी है और समाधान को लेकर सभी पक्षों की अगली रणनीति पर नजरें टिकी हुई हैं।