बांसवाड़ा के आबादी क्षेत्र में घुसा 7 फीट लंबा मगरमच्छ, कुत्तों की भौंकने की आवाज पर हुआ खुलासा; 2 घंटे की मुश्किल रेस्क्यू के बाद चाप नदी में छोड़ा गया
बांसवाड़ा के गढ़ी थाना क्षेत्र के निचला मंडेला बोरी गांव में रात 2 बजे 7 फीट लंबा मगरमच्छ रिहायशी बस्ती में घुस आया। कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनकर ग्रामीणों ने टॉर्च जलाकर देखा तो सड़क पर मगरमच्छ नजर आया। रात 3 बजे गौ-रक्षा दल और पुलिस की रेस्क्यू टीम ने 2 घंटे की मुश्किल कार्रवाई के बाद मगरमच्छ को काबू में लिया और सुबह 5 बजे चाप नदी में सुरक्षित छोड़ दिया। समय पर रेस्क्यू से बड़ा हादसा टल गया।
बांसवाड़ा जिले के गढ़ी थाना क्षेत्र के निचला मंडेला बोरी गांव में रविवार तड़के एक दिल दहला देने वाला वाकया सामने आया। रात के सन्नाटे में अचानक 7 फीट लंबा मगरमच्छ रिहायशी बस्ती के अंदर घुस आया। खेतों और नालों के रास्ते भटकता हुआ यह मगरमच्छ रात करीब 2 बजे मोहल्ले की सड़क पर पहुंच गया, जहां स्थानीय लोगों को कुत्तों के भौंकने की आवाज ने इसकी मौजूदगी का पता चलाया।
घटना का क्रम
रात करीब 2 बजे जब पूरा गांव सो रहा था, तभी मोहल्ले में कुत्ते अचानक जोर-जोर से भौंकने लगे। ग्रामीणों को शक हुआ और उन्होंने टॉर्च जलाकर देखा तो सड़क पर एक बड़ा मगरमच्छ लहराता हुआ नजर आया। इसे देखकर लोग घबरा गए और तुरंत पुलिस तथा गौ-रक्षा दल को सूचना दे दी।
गढ़ी थाना प्रभारी SHO रमेश मीणा ने बताया कि कस्बे के आसपास कोई बड़ी नदी नहीं है। इसलिए माना जा रहा है कि मगरमच्छ खेतों और छोटे नालों के रास्ते भटककर रिहायशी इलाके में पहुंच गया। रात का समय होने और अंधेरा होने के कारण इसकी मूवमेंट भी स्पष्ट रूप से नजर नहीं आ रही थी।
रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू
ग्रामीणों की सूचना मिलते ही रात 3 बजे सर्वेश्वर गौशाला परतापुर की रेस्क्यू टीम और गढ़ी थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई। रेस्क्यू टीम में मयंक डाबी, भव्य बुनकर, जयेश सुथार, सुभाष डोडियार और नयन डाबी शामिल थे। स्थानीय युवाओं और गांव वालों के सहयोग से रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया।
पशु बचावकर्मी मयंक डाबी ने बताया कि मगरमच्छ को पकड़ना काफी चुनौतीपूर्ण था। वह बार-बार दिशा बदल रहा था और अंधेरे में उसकी हरकतें साफ नजर नहीं आ रही थीं। टीम ने सबसे पहले आसपास के लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखा ताकि कोई भी व्यक्ति मगरमच्छ के करीब न आए। फिर टॉर्च की रोशनी में मगरमच्छ की लोकेशन तय की गई और धीरे-धीरे उसे चारों तरफ से घेर लिया गया।
मयंक डाबी ने आगे बताया, “मगरमच्छ अचानक झपट्टा मार सकता है, इसलिए हमने दूरी बनाए रखते हुए रस्सियों की मदद से उसके मुंह और शरीर को कंट्रोल करने की कोशिश की। करीब दो घंटे की लगातार मेहनत के बाद हम उसे सुरक्षित तरीके से काबू में ले पाए।”
सफल रेस्क्यू और रिहाई
रेस्क्यू के बाद मगरमच्छ को सावधानी से टेंपो में रखा गया। फिर उसे चाप नदी ले जाया गया, जहां सुबह करीब 5 बजे उसे सुरक्षित रूप से नदी में छोड़ दिया गया।रेस्क्यू टीम के अन्य सदस्यों और गौ-रक्षा दल बोरी के सदस्यों के अलावा स्थानीय पुलिसकर्मी भी पूरे समय मौजूद रहे। ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और बताया कि अगर समय पर मगरमच्छ की सूचना नहीं मिलती या रेस्क्यू में देरी होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। कई लोग सो रहे थे और मगरमच्छ बस्ती के अंदर घूम रहा था, इसलिए जान-माल की काफी खतरा था।
समय पर कार्रवाई से बचा संकट
इस सफल रेस्क्यू से न सिर्फ ग्रामीणों की जान बची, बल्कि मगरमच्छ को भी सुरक्षित उसके प्राकृतिक वातावरण में वापस छोड़ा गया। गौ-रक्षा दल और स्थानीय युवाओं की त्वरित प्रतिक्रिया और टीम वर्क की सराहना की जा रही है।