यूनिवर्सिटी भर्ती घोटाले में बड़ा एक्शन: चहेतों को 49 नंबर, योग्य उम्मीदवारों को सिर्फ 10; पूर्व VC प्रो. देवस्वरूप हटाए गए

राजस्थान यूनिवर्सिटी में 294 सहायक आचार्य भर्ती में भारी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि इंटरव्यू में चहेते अभ्यर्थियों को मनमाने तरीके से ज्यादा नंबर दिए गए, जबकि योग्य उम्मीदवारों को कम अंक देकर बाहर कर दिया गया। मामले में कार्रवाई करते हुए राज्यपाल ने पूर्व VC प्रो. देवस्वरूप को पद से हटा दिया है।

May 29, 2026 - 16:57
यूनिवर्सिटी भर्ती घोटाले में बड़ा एक्शन: चहेतों को 49 नंबर, योग्य उम्मीदवारों को सिर्फ 10; पूर्व VC प्रो. देवस्वरूप हटाए गए

राजस्थान यूनिवर्सिटी में साल 2011-12 और 2013-14 के दौरान हुई 294 सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) भर्ती अब बड़े विवाद और कार्रवाई का कारण बन गई है। भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और पक्षपात के आरोपों की जांच के बाद राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने बड़ा फैसला लेते हुए बाबा आमटे दिव्यांग यूनिवर्सिटी के कुलगुरु और विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलगुरु प्रो. देवस्वरूप को पद से हटा दिया है।

जांच रिपोर्ट में भर्ती प्रक्रिया के दौरान इंटरव्यू अंकों में बड़े स्तर पर हेरफेर और चहेते अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने की बात सामने आई है।

इंटरव्यू में नंबरों का खेल, योग्य उम्मीदवार बाहर

पूरे मामले की शुरुआत भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायत से हुई थी। शिकायतकर्ता डॉ. प्रेमलता सिंगारिया ने आरोप लगाया था कि बेहतर शैक्षणिक रिकॉर्ड और शोध कार्य होने के बावजूद उन्हें इंटरव्यू में बेहद कम अंक दिए गए।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. प्रेमलता सिंगारिया को इंटरव्यू में 50 में से केवल 10 अंक दिए गए, जबकि कुछ पसंदीदा उम्मीदवारों को 49 तक अंक देकर चयनित कर लिया गया।

आरोप है कि चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता और मेरिट की अनदेखी कर चहेते उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाया गया।

जांच समिति ने उजागर की गंभीर अनियमितताएं

मामले की शिकायत मिलने के बाद राजभवन ने कोटा यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. भगवती प्रसाद सारस्वत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी।

जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई। रिपोर्ट में कहा गया कि भर्ती प्रक्रिया में यूजीसी नियमों की खुलकर अवहेलना की गई और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए नियमों को बदला गया।

जाली दस्तावेज और मिनट्स में हेरफेर के आरोप

जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सिलेक्शन कमेटी और सिंडिकेट बैठकों के मिनट्स में कथित रूप से हेरफेर की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक भर्ती प्रक्रिया को सही ठहराने के लिए कूटरचित, जाली और झूठे दस्तावेज तैयार किए गए। यूनिवर्सिटी की प्रचलित चयन पद्धति में बदलाव कर नियमों के विपरीत फैसले लिए गए।

इन खुलासों के बाद राजस्थान की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

राज्यपाल ने लिया बड़ा एक्शन

जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने कार्रवाई करते हुए प्रो. देवस्वरूप को दोनों विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी से हटा दिया।

प्रो. देवस्वरूप पर आरोप है कि राजस्थान यूनिवर्सिटी के कुलपति रहते हुए उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर अपने करीबी उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाया।

हालांकि प्रो. देवस्वरूप ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे राज्यपाल के आदेश को सभी पहलुओं से समझने का प्रयास कर रहे हैं।

नियुक्त अभ्यर्थियों पर भी उठे सवाल

इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए नियुक्त किए गए अभ्यर्थियों की नियुक्तियों पर भी अब सवाल उठने लगे हैं।

हालांकि अभी तक नियुक्त उम्मीदवारों के खिलाफ कोई सीधा फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग पर दबाव बढ़ गया है।

संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में भर्ती प्रक्रिया और नियुक्तियों की कानूनी समीक्षा भी हो सकती है।

दोनों यूनिवर्सिटी में सौंपा गया अतिरिक्त कार्यभार

राजभवन ने प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए दोनों विश्वविद्यालयों में अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी सौंप दी हैं।

श्री करण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय (राजुवास), जोबनेर के कुलपति प्रो. त्रिभुवन शर्मा को बाबा आमटे दिव्यांग यूनिवर्सिटी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

वहीं हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन.के. पाण्डेय को विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।

उच्च शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल

राजस्थान यूनिवर्सिटी भर्ती विवाद ने प्रदेश की उच्च शिक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और राजभवन आगे इस मामले में क्या बड़े फैसले लेते हैं और क्या विवादित नियुक्तियों की भी जांच होगी।

Web Desk Web Desk The Khatak