बारमेर के गौरव मेघवाल ने बिना कोचिंग के 10वीं में हासिल किया 96% अंक, मां की याद में समर्पित सफलता
बाड़मेर के गौरव मेघवाल ने मात्र 10 महीने की उम्र में मां को खोने के बाद भी बिना कोचिंग के RBSE कक्षा 10वीं में 96% अंक हासिल किए। भादासर (जैसलमेर) निवासी गौरव सक्सेश प्वाइंट स्कूल, महावीर नगर बाड़मेर से पढ़ते हैं और कृष्णाभूमि छात्रावास में रहकर अपनी इस उपलब्धि को हासिल किया। गणित में 99 अंक सहित शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने गरीबी और विपरीत परिस्थितियों में भी सफलता की मिसाल पेश की है।
बाड़मेर। राजस्थान बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (RBSE) कक्षा 10वीं के परिणाम घोषित होने के साथ ही बाड़मेर जिले के एक गरीब छात्र गौरव मेघवाल की मेहनत और लगन की कहानी एक बार फिर सबका मन छू रही है। मात्र 10 महीने की उम्र में मां को खो देने वाले इस छात्र ने बिना किसी कोचिंग की मदद के 96 प्रतिशत अंक हासिल कर एक मिसाल पेश की है।
गौरव पुत्र श्री रावताराम मेघवाल, निवासी भादासर, जिला जैसलमेर मूल रूप से रहने वाले हैं। वर्तमान में वे बाड़मेर के महावीर नगर स्थित सक्सेश प्वाइंट स्कूल में अध्ययनरत हैं। उन्होंने कृष्णाभूमि छात्रावास, नेहरू नगर, बाड़मेर में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी की। इस छात्रावास के संस्थापक गोविंद जी का गौरव ने विशेष आभार व्यक्त किया है।
मां की छाया मात्र 10 महीने की उम्र में ही उठ गई थी। पिता रावताराम मेघवाल और परिवार की कठिन परिस्थितियों के बावजूद गौरव ने कभी हार नहीं मानी। लगातार कठोर मेहनत, अनुशासन और अटूट लगन के बल पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। परिवार और शिक्षकों के अनुसार गौरव रोजाना रात भर जागकर पढ़ाई करते थे और स्कूल के नियमित अध्ययन के साथ-साथ स्वयं की रणनीति बनाकर तैयारी करते रहे।
परिणाम इस प्रकार है:
हिंदी : 95 अंक
अंग्रेजी : 97 अंक
विज्ञान : 95 अंक
सामाजिक विज्ञान : 96 अंक
गणित : 99 अंक
संस्कृत : 94 अंक
कुल अंक : 96%
सबसे खास बात यह है कि गौरव ने पूरी तैयारी बिना किसी कोचिंग संस्थान की मदद के की। वे कहते हैं, “मां की कमी हमेशा खलती है, लेकिन मैंने उनकी याद को अपनी ताकत बनाया। हर किताब में मुझे लगता था जैसे मां मुझे पढ़ा रही हैं।”स्कूल प्रबंधन और छात्रावास संचालक गोविंद जी ने गौरव की इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी और कहा कि ऐसे छात्र ही समाज के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं। गौरव अब आगे 12वीं में विज्ञान संकाय से पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं और डॉक्टर बनने का सपना देख रहे हैं।
यह सफलता साबित करती है कि सही लगन, मेहनत और सकारात्मक सोच के साथ कोई भी मुश्किल परिस्थिति को पार कर सकता है। गौरव मेघवाल की कहानी ग्रामीण क्षेत्रों के उन हजारों छात्रों के लिए एक संदेश है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।