राजस्थान में साइबर ठगी पर लगाम लगाने के लिए बन रहा है R4C: 275 विशेषज्ञ तैनात होंगे, सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई

राजस्थान सरकार साइबर ठगी के बढ़ते मामलों (2023 में 80 हजार से 2025 में 1.25 लाख तक) को रोकने और पीड़ितों को त्वरित राहत देने के लिए राजस्थान साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (R4C) स्थापित कर रही है। केंद्र सरकार के I4C की तर्ज पर बनने वाले इस केंद्र पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें IG रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में 275 कार्मिक (पुलिस अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और बैंक नोडल अधिकारी) तैनात किए जाएंगे। सूचना मिलते ही ठगों को ट्रेस करने, पैसे फ्रीज करने और FIR दर्ज करने की प्रक्रिया तेज हो जाएगी, जिससे कार्रवाई की रफ्तार दोगुनी होने की उम्मीद है। यह राजस्थान को साइबर अपराध नियंत्रण में देश का पहला ऐसा राज्य बना सकता है।

Mar 28, 2026 - 11:38
राजस्थान में साइबर ठगी पर लगाम लगाने के लिए बन रहा है R4C: 275 विशेषज्ञ तैनात होंगे, सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई

राजस्थान में साइबर अपराध और ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हर साल औसतन 25 हजार नए मामले सामने आ रहे हैं। वर्ष 2023 में जहां लगभग 80 हजार साइबर ठगी के मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2025 तक यह संख्या सवा लाख (1.25 लाख) तक पहुंच गई है। इन मामलों में पीड़ितों को होने वाले आर्थिक नुकसान भी करोड़ों रुपये में है। इस बढ़ते खतरे को देखते हुए राजस्थान सरकार ने केंद्र सरकार के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की तर्ज पर प्रदेश स्तर पर राजस्थान साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (R4C) स्थापित करने का फैसला किया है।यह केंद्र साइबर ठगी को रोकने और पीड़ितों को उनके पैसे की रिफंड प्रक्रिया को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अनुमानित लागत लगभग 100 करोड़ रुपये है।

घोषणा कब और कैसे हुई?

10 जनवरी 2026 को राजस्थान पुलिस अकादमी (RPA) में नियुक्ति पत्र वितरण समारोह के दौरान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने R4C की स्थापना की घोषणा की। यह कदम राजस्थान को साइबर अपराध नियंत्रण में एक मॉडल राज्य बनाने की दिशा में उठाया गया है। राजस्थान संभवतः देश का पहला ऐसा राज्य है जो केंद्र के I4C की तर्ज पर अपना राज्य स्तरीय समन्वय केंद्र बना रहा है।

R4C में कितने अधिकारी और विशेषज्ञ तैनात होंगे?

R4C का इंचार्ज आईजी रैंक का वरिष्ठ पुलिस अधिकारी होगा। उनके अधीन निम्नलिखित स्टाफ तैनात किया जाएगा: 1 DIG, 4 SP, 5 ASP, 7 DSP, 8 इंस्पेक्टर, 7 तकनीकी विशेषज्ञ। कुल 275 कार्मिक (पुलिस अधिकारी, तकनीकी एक्सपर्ट और अन्य स्टाफ) इस केंद्र में काम करेंगे। इसमें पुलिस के अलावा तकनीकी विशेषज्ञ और बैंकों के नोडल अधिकारी भी शामिल होंगे।चयनित सभी स्टाफ को I4C और देश के अन्य प्रमुख संस्थानों से विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद वे अन्य साथी अधिकारियों और कर्मचारियों को ट्रेनिंग प्रदान करेंगे।

R4C क्यों जरूरी है? वर्तमान व्यवस्था की समस्या

वर्तमान में साइबर ठगी की शिकायत I4C (केंद्र स्तर) पर जाती है। वहां से सूचना राज्य की नोडल एजेंसी को, फिर जिलों और अंत में थानों तक पहुंचती है। इस लंबी प्रक्रिया में काफी समय लग जाता है, जिसके कारण ज्यादातर मामलों में न तो समय पर FIR दर्ज हो पाती है और न ही ठगे गए पैसे की रिकवरी संभव हो पाती है।R4C बनने के बाद सूचना सीधे थानों तक पहुंचेगी। इससे कार्रवाई की रफ्तार दोगुनी होने की उम्मीद है।

R4C में काम कैसे होगा? तीन स्टेप में त्वरित राहत

सूचना प्राप्ति: साइबर ठगी की कोई भी जानकारी मिलते ही R4C की टीमें तुरंत सक्रिय हो जाएंगी।ट्रेसिंग और फ्रीजिंग: पुलिस अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ ठगों को ट्रेस करेंगे। साथ ही बैंक के नोडल अधिकारी ट्रांजेक्शन ट्रैक करके ठगे गए पैसे को तुरंत फ्रीज (रोक) करवाएंगे।एक्शन: मामले की संक्षिप्त ब्रीफ नोट तैयार करके संबंधित थाने या जिले की साइबर सेल को भेजा जाएगा। वहां FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी और रिफंड प्रक्रिया तेज होगी।इस व्यवस्था से पुलिस, तकनीकी टीम और बैंक प्रतिनिधि एक ही छत के नीचे काम करेंगे, जिससे समन्वय बेहतर होगा और देरी कम होगी।

R4C को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने की योजना

राजस्थान पुलिस के डीजीपी राजीव शर्मा ने कहा है कि R4C को साइबर अपराध नियंत्रण का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा। इसमें सभी जिलों के बीच सूचना साझाकरण, समन्वय और अनुसंधान के लिए केंद्रीकृत सिस्टम विकसित किया जाएगा।

साइबर ठगी से बचाव: सरकार का संदेश

सरकार का प्रयास सिर्फ प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि निवारक भी है। R4C के साथ-साथ जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि आम नागरिक साइबर ठगी के शिकार न हों। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अनजान नंबरों से आने वाली कॉल्स, OTP शेयर न करें, और संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.