राजस्थान की हजारों प्राइवेट बसों और टैक्सियों पर संकट: नए नियमों से परिचालन मुश्किल, ऑपरेटर्स चिंतित

1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए नियमों के कारण राजस्थान में चल रही 8000 से ज्यादा प्राइवेट बसों पर बड़ा संकट आ गया है। अब ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट केवल उसी राज्य से मिलेगा जहां वाहन रजिस्टर्ड है और ऑपरेटर का कारोबार भी उसी राज्य में होना जरूरी है। रास्ते में सवारी लेना, टोल न भरना, पुराने चालान और यात्रियों की लिस्ट न रखने पर सख्त कार्रवाई होगी। राजस्थान में ज्यादा टैक्स के कारण दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड बसें अब परेशानी में पड़ गई हैं।

Mar 25, 2026 - 12:31
राजस्थान की हजारों प्राइवेट बसों और टैक्सियों पर संकट: नए नियमों से परिचालन मुश्किल, ऑपरेटर्स चिंतित

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट (All India Tourist Permit) की शर्तों में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन प्राइवेट बसों और टूरिस्ट वाहनों पर पड़ेगा, जो एक राज्य में रजिस्टर्ड होकर दूसरे राज्यों में नियमित रूप से चल रही हैं। राजस्थान में ऐसी 8 हजार से ज्यादा प्राइवेट बसें प्रभावित होने वाली हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन अन्य राज्यों में है लेकिन मालिक और परिचालन मुख्य रूप से राजस्थान में होता है।

नए नियम क्या कहते हैं?

नए प्रावधानों के अनुसार: ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट अब केवल उसी राज्य से जारी या रिन्यू होगा, जहां वाहन रजिस्टर्ड है। साथ ही, ऑपरेटर का कारोबार या स्थायी निवास भी उसी राज्य में होना अनिवार्य होगा। इससे फर्जी या सुविधा के लिए दूसरे राज्यों से परमिट लेने की प्रक्रिया पर लगाम लगेगी।वाहन को अपने गृह राज्य (रजिस्ट्रेशन वाले राज्य) से बाहर लगातार 60 दिनों से ज्यादा समय तक नहीं रहना होगा (पहले यह सीमा 90 दिन थी)।

परमिट जारी या रिन्यू करने से पहले सभी दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच होगी, जिसमें बीमा, फिटनेस सर्टिफिकेट, पॉल्यूशन कंट्रोल सर्टिफिकेट और टैक्स की स्थिति शामिल है। कोई भी दस्तावेज अधूरा या एक्सपायर होने पर परमिट नहीं मिलेगा।45 दिनों से पुराने बकाया चालान होने पर परमिट प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। चालान क्लियर या उसका जवाब पोर्टल पर देना जरूरी होगा।टोल भुगतान में सख्ती: अगर वाहन नेशनल हाईवे पर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में दर्ज हुआ लेकिन टोल नहीं भरा गया, तो उसे बकाया माना जाएगा और परमिट प्रभावित होगा।

यात्रियों की लिस्ट और रूट का सख्त नियम

टूरिस्ट वाहनों के ऑपरेटरों को अब हर समय यात्रियों की पूरी लिस्ट और यात्रा का विस्तृत रूट (शुरुआत, गंतव्य और बीच के राज्यों की जानकारी) साथ रखना होगा।रास्ते में सवारी उठाना या उतारना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।टूरिस्ट परमिट वाले वाहनों को सामान्य बस सेवा की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।बिना लिस्ट के सवारी बैठाने या नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई होगी।ये नियम केवल 1 अप्रैल 2026 के बाद नए परमिट या रिन्यूअल पर लागू होंगे। पहले से वैध परमिट वाली बसें अपनी अवधि पूरी होने तक पुराने नियमों से चल सकेंगी, लेकिन रिन्यूअल के समय नए नियमों का पालन अनिवार्य होगा। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को इन संशोधित नियमों को लागू करने के निर्देश दिए हैं।

राजस्थान के ऑपरेटर्स की परेशानी

राजस्थान में डेली सर्विस देने वाली हजारों प्राइवेट बसों का रजिस्ट्रेशन अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसे अन्य राज्यों में किया गया है। ऑपरेटर्स का कहना है कि राजस्थान में टैक्स कई गुना ज्यादा है, इसलिए वे कम टैक्स वाले राज्यों में रजिस्ट्रेशन कराते हैं। नए नियमों से दूसरे राज्यों से परमिट रिन्यू नहीं हो पाएगा, जिससे इन बसों का परिचालन ठप हो सकता है।टोल चोरी, पेंडिंग चालान, यात्रियों की लिस्ट न रखने और बीच रास्ते में सवारी लेने जैसी गतिविधियों पर भी अब सख्त कार्रवाई होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव का सबसे बड़ा बोझ प्राइवेट बस ऑपरेटर्स पर ही पड़ेगा।

हालिया हड़ताल का संदर्भ

फरवरी 2026 के अंत में राजस्थान के प्राइवेट बस ऑपरेटर्स ने परिवहन विभाग की कार्रवाइयों के विरोध में हड़ताल की थी, जिसमें करीब 35 हजार बसें बंद रहीं। ऑपरेटर्स ने मनमाने चालान, बिना सूचना के जुर्माना और बसों की जब्ती जैसे मुद्दों पर विरोध जताया था। विभाग का पक्ष था कि केवल नियम तोड़ने वाली बसों पर ही कार्रवाई हो रही है। इससे पहले वर्ष 2025 में भी ऐसी हड़ताल हो चुकी है।नए नियमों से राजस्थान की सड़क परिवहन व्यवस्था पर काफी असर पड़ने की आशंका है। ऑपरेटर्स मांग कर रहे हैं कि राजस्थान में भी अन्य राज्यों के बराबर टैक्स नीति अपनाई जाए, ताकि फर्जी रजिस्ट्रेशन की जरूरत ही न पड़े। इस बदलाव का मकसद टोल अनुपालन सुनिश्चित करना, यात्री सुरक्षा बढ़ाना और टूरिस्ट परमिट का दुरुपयोग रोकना बताया जा रहा है, लेकिन छोटे और मध्यम ऑपरेटर्स के लिए यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित हो सकता है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.