राजस्थान चतुर्थ श्रेणी भर्ती में जीरो अंक पर भी सरकारी नौकरी: हाईकोर्ट ने जताई हैरानी, न्यूनतम अंक निर्धारित न करने पर सरकार से सवाल

राजस्थान हाईकोर्ट ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती 2024 में जीरो या नेगेटिव अंक लाने वालों को भी नियुक्ति देने की संभावना पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि सरकारी सेवा में बेसिक स्टैंडर्ड जरूरी है और न्यूनतम अंक निर्धारित न करने पर सरकार से सवाल किए। कुछ आरक्षित श्रेणियों में कटऑफ मात्र 0.0033 रही, जबकि याचिकाकर्ता के नेगेटिव अंक आने पर उसे बाहर किया गया। अदालत ने विभागों से शपथ पत्र मांगकर कारण और सुधार बताने को कहा, अन्यथा सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। अगली सुनवाई 7 अप्रैल को।

Mar 9, 2026 - 14:19
राजस्थान चतुर्थ श्रेणी भर्ती में जीरो अंक पर भी सरकारी नौकरी: हाईकोर्ट ने जताई हैरानी, न्यूनतम अंक निर्धारित न करने पर सरकार से सवाल

राजस्थान में चल रही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (चपरासी/फोर्थ क्लास) भर्ती 2024 का एक मामला राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचा है, जहां जीरो (0) अंक या नेगेटिव मार्क्स लाने वाले अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति देने की संभावना पर अदालत ने गहरी नाराजगी और आश्चर्य व्यक्त किया है। हाईकोर्ट ने सवाल उठाया है कि भर्ती प्रक्रिया में न्यूनतम अंक (कट-ऑफ) निर्धारित क्यों नहीं किए गए, जबकि सरकारी सेवा में बेसिक स्टैंडर्ड का होना अनिवार्य है।

यह मामला जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ के समक्ष विनोद कुमार नामक याचिकाकर्ता की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ता ने एक्स-सर्विसमैन (ओबीसी कैटेगरी) के तहत आवेदन किया था। परीक्षा में उनके नेगेटिव (माइनस) अंक आए, जबकि उनकी कैटेगरी में कट-ऑफ मात्र 0.0033 (लगभग जीरो) रही। याचिकाकर्ता के वकील हरेंद्र नील ने अदालत को बताया कि भर्ती विज्ञप्ति और सेवा नियमों में न्यूनतम अंक प्राप्त करने की कोई शर्त नहीं है। इसलिए, जब जीरो अंक वाले अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं मिल रहे और सैकड़ों पद खाली हैं, तो माइनस अंक लाने वालों को भी नियुक्ति दी जानी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जीरो और नेगेटिव अंक लाने वालों की योग्यता में कोई अंतर नहीं है।

अदालत ने इस तर्क पर कड़ी टिप्पणी की। जस्टिस शर्मा ने कहा, "चाहे पद चतुर्थ श्रेणी का ही क्यों न हो, सरकारी सेवा में एक बेसिक स्टैंडर्ड का होना जरूरी है।" कोर्ट ने पूछा कि जो व्यक्ति शून्य या नेगेटिव अंक लाता है, उसे किसी भी पद के लिए उपयुक्त कैसे माना जा सकता है? सरकार को न्यूनतम मापदंडों का पालन करना चाहिए, ताकि चयनित अभ्यर्थी अपना मूल काम संतोषजनक तरीके से कर सके।

कोर्ट ने इस स्थिति के दो संभावित कारण बताए:

या तो परीक्षा का पेपर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के स्तर से ज्यादा कठिन था।या फिर भर्ती के मानक जानबूझकर इतने नीचे रखे गए कि योग्यता का कोई अर्थ ही नहीं रह गया।अदालत ने दोनों स्थितियों को अस्वीकार्य बताया। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से न्यूनतम अंक न निर्धारित करने का कोई ठोस कारण नहीं दिया जा सका।

कोर्ट ने पहले संबंधित विभाग के प्रमुख शासन सचिव से शपथ पत्र मांगा था, जिसमें ऐसी स्थिति उत्पन्न होने का कारण और सुधार के उपाय बताए जाते। लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग ने कहा कि उनका काम केवल सफल अभ्यर्थियों को विभाग आवंटित करना है। नियम बनाने और न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने का दायित्व कार्मिक विभाग तथा कर्मचारी चयन बोर्ड का है। इससे नाराज होकर कोर्ट ने कहा, "हमने संबंधित विभाग का शपथ पत्र मांगा था, लेकिन विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं।"अदालत ने विभागों को अंतिम मौका देते हुए कहा, "अगली सुनवाई तक संबंधित विभाग शपथ पत्र पेश करें, अन्यथा कोर्ट को सख्त कदम उठाने होंगे।" मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.