राजस्थान में ब्यूरोक्रेसी बेलगाम होने के कांग्रेस के आरोप: सीकर विवाद से शुरू हुई बहस

राजस्थान में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भजनलाल शर्मा के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ब्यूरोक्रेसी पूरी तरह बेलगाम हो गई है। सीकर में वन मंत्री संजय शर्मा और कलेक्टर मुकुल शर्मा के बीच हुई बहस को उदाहरण देते हुए डोटासरा ने कहा कि अधिकारी जनप्रतिनिधियों की नहीं सुन रहे। बीकानेर, जयपुर, उदयपुर समेत कई जिलों में मंत्री-सांसदों की शिकायतों का हवाला देते हुए कांग्रेस ने सरकार पर सुशासन के दावों की पोल खोलने का आरोप लगाया।

Dec 24, 2025 - 16:04
राजस्थान में ब्यूरोक्रेसी बेलगाम होने के कांग्रेस के आरोप: सीकर विवाद से शुरू हुई बहस

राजस्थान में भाजपा की भजनलाल शर्मा सरकार पर कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि मुख्यमंत्री बनने के बाद से ब्यूरोक्रेसी पूरी तरह बेलगाम हो गई है। जनप्रतिनिधियों की नहीं सुनी जा रही और अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। यह आरोप कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मुख्य रूप से उठाए हैं, जो सीकर जिले से जुड़े एक विवाद से शुरू हुए।

सीकर विवाद की शुरुआत मामला सीकर जिले का है, जहां वन मंत्री संजय शर्मा (या प्रभारी मंत्री) और जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा के बीच जनसुनवाई या किसी कार्यक्रम के दौरान बहस हो गई। सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों और वीडियो में दिखा कि मंत्री और कलेक्टर के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कांग्रेस का दावा है कि यह तस्वीर पूरे राजस्थान की हकीकत बयां करती है – अधिकारी जनप्रतिनिधियों का सम्मान नहीं कर रहे।कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुनीता गठाला ने इस विवाद को "अहंकार की लड़ाई" करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के शिविरों में लोगों के काम नहीं हो रहे, जैसा कि वीडियो में साफ दिख रहा है। नगरीय विकास मंत्री के सीकर में होने के बावजूद नगर परिषद के अधिकारी गायब थे, जो कई सवाल खड़े करता है। गठाला ने कहा कि इस सरकार में अधिकारी बेलगाम हो गए हैं – न मुख्यमंत्री की सुनते हैं, न मंत्रियों-विधायकों की। जनसुनवाई बंद कर दी गई है, जबकि जनता महंगाई, बेरोजगारी, जंगल-जमीन की लड़ाई और रोजमर्रा की समस्याओं से जूझ रही है।

डोटासरा के मुख्य आरोप गोविंद सिंह डोटासरा ने इस घटना को पूरे प्रदेश की स्थिति का प्रतीक बताया। उनके अनुसार:भजनलाल शर्मा के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ब्यूरोक्रेसी हावी हो गई है।जनप्रतिनिधियों (मंत्रियों, विधायकों, सांसदों) की कोई सुनवाई नहीं हो रही।अगर मंत्री का यह हाल है, तो आम जनता की स्थिति क्या होगी?

विशिष्ट उदाहरण देते हुए डोटासरा ने कहा:जयपुर में सांसद मंजू शर्मा ने अधिकारियों से कहा कि "काम करो नहीं तो यहां से जाना पड़ेगा" (हालांकि पाकिस्तान नहीं भेजेंगे, लेकिन काम करवाओ)।उदयपुर के सांसद ने चिट्ठी लिखकर शिकायत की कि ब्यूरोक्रेसी इतनी हावी है कि उनकी बात नहीं सुनी जाती।बीकानेर में पुलिस अधीक्षक (एसपी) मंत्री सुमित गोदारा का फोन नहीं उठाते।सबसे चर्चित उदाहरण: मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल (जिन्हें "चिपकू मंत्री" कहा गया) को किसी जिले के कलेक्टर और एसपी ने बैठने तक नहीं कहा। उनसे खड़े-खड़े ही पूछा गया कि "क्या काम है?"डोटासरा ने इसे पूरे प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी के हावी होने का सबूत बताया।

कांग्रेस का समग्र हमला कांग्रेस ने सरकार पर "दिखावे" का आरोप लगाया। उनका कहना है कि शिविर और कार्यक्रम तो हो रहे हैं, लेकिन असल काम नहीं। जनता की समस्याओं का निस्तारण नहीं हो रहा, जबकि अधिकारी और मंत्री अहंकार में डूबे हैं। यह आरोप भाजपा सरकार के सुशासन के दावों पर सीधा प्रहार है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ भजनलाल शर्मा दिसंबर 2023 में राजस्थान के मुख्यमंत्री बने। उनकी सरकार पर पहले भी कांग्रेस ने ब्यूरोक्रेसी के हावी होने के आरोप लगाए हैं, जैसे ट्रांसफर-पोस्टिंग में भ्रष्टाचार या योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी। हालांकि, भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है और सुशासन के कई उदाहरण पेश करती है। इस विवाद से राजस्थान की सियासत में एक नई बहस छिड़ गई है – क्या वाकई ब्यूरोक्रेसी जनप्रतिनिधियों पर भारी पड़ रही है?

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.