PM मोदी के बयान पर अशोक गहलोत का पलटवार “विरोध को देश विरोध बताना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं”
अजमेर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस पर की गई टिप्पणी के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तीखी प्रतिक्रिया दी। गहलोत ने कहा कि किसी नेता का विरोध करना देश का विरोध नहीं होता और लोकतंत्र में असहमति जरूरी है। उन्होंने केंद्र सरकार पर सरकारी मंच के राजनीतिक उपयोग, जनहित मुद्दों की अनदेखी, ERCP, राइट टू हेल्थ, पेपर लीक कानून और युवाओं से जुड़े विषयों पर सवाल उठाए।
राजस्थान की सियासत में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। अजमेर दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस पर की गई टिप्पणी के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लंबा बयान जारी करते हुए प्रधानमंत्री के आरोपों को राजनीतिक निराशा का परिणाम बताया और कहा कि किसी भी नेता को खुद को देश से बड़ा मानने की भूल नहीं करनी चाहिए।
अजमेर की टिप्पणी पर दिया कड़ा जवाब
गहलोत ने अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा कांग्रेस पर लगाए गए आरोप इतिहास और तथ्यों से मेल नहीं खाते। उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाली कांग्रेस पर देश को बांटने जैसे आरोप लगाना न केवल अनुचित है बल्कि राजनीतिक हताशा को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी सरकार या नेता का विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है और इसे देश विरोध नहीं माना जा सकता।
सरकारी मंच के राजनीतिक उपयोग का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने सरकारी कार्यक्रम के मंच का उपयोग जनहित के मुद्दों की बजाय राजनीतिक टिप्पणी के लिए किया। गहलोत ने कहा कि जनता उम्मीद कर रही थी कि राजस्थान और देश से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
उन्होंने अपने पहले भेजे गए पत्र का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या केंद्र सरकार पूरे देश में “राइट टू हेल्थ” जैसे कानून लागू करने पर विचार करेगी। साथ ही गिग वर्कर्स वेलफेयर और शहरी रोजगार गारंटी जैसी योजनाओं पर भी केंद्र की चुप्पी पर सवाल उठाए।
ईआरसीपी और योजनाओं को लेकर भी उठाए सवाल
गहलोत ने कहा कि पूर्ववर्ती राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं और परियोजनाओं का नाम बदलने से विकास नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) को लेकर केवल राजनीतिक बयान दिए जा रहे हैं, जबकि जमीनी काम अपेक्षित गति से नहीं हो रहा।
पेपर लीक कानून का किया बचाव
पेपर लीक मुद्दे पर भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार ने इस अपराध को रोकने के लिए देश के सबसे सख्त कानूनों में से एक बनाया था। इस कानून में आजीवन कारावास, भारी जुर्माना और दोषियों की संपत्ति जब्त करने जैसे प्रावधान शामिल किए गए थे।
उन्होंने कहा कि युवाओं के मुद्दों पर राजनीति करने की बजाय पूरे देश में सख्त कानून बनाने की दिशा में काम होना चाहिए।
युवाओं और चुनावी गारंटी का मुद्दा भी उठाया
गहलोत ने भाजपा पर युवाओं को भ्रमित करने का आरोप लगाया और कहा कि केंद्र को रोजगार और पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर ठोस कदम उठाने चाहिए। साथ ही उन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस सरकार की योजनाएं बंद नहीं करने के दिए गए वादों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन पर अमल होना चाहिए था।
राजनीतिक बयानबाजी से गरमाई राजस्थान की सियासत
प्रधानमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के बीच इस बयानबाजी के बाद राजस्थान की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। आने वाले समय में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बन सकता है, खासकर तब जब लोकसभा चुनावी माहौल धीरे-धीरे गर्म हो रहा है।