माउंट आबू का नाम बदलकर ‘आबुराज’ करने की घोषणा, विधानसभा में उठा बड़ा मुद्दा — पर्यटन और राजनीति में नई बहस शुरू...
राजस्थान विधानसभा में माउंट आबू का नाम बदलकर “आबुराज” करने की मांग और घोषणा स्तर पर चर्चा हुई। जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्र के प्राचीन और धार्मिक महत्व का हवाला देते हुए ऐतिहासिक नाम बहाल करने की बात कही। हालांकि सरकार ने अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया है और नाम परिवर्तन की प्रक्रिया विचाराधीन है। पर्यटन और स्थानीय व्यापार पर संभावित असर को लेकर बहस भी शुरू हो गई है।
राजस्थान की राजनीति और पर्यटन जगत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन माउंट आबू का नाम बदलकर “आबुराज” (या “आबू राज तीर्थ”) करने का प्रस्ताव राज्य की राजस्थान विधानसभा में उठाया गया, जिसके बाद यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बन गया है। हालांकि अभी यह अंतिम सरकारी फैसला नहीं है, बल्कि प्रस्ताव और मांग के स्तर पर चल रही प्रक्रिया है।
नीचे पूरी सच्ची और विस्तृत जानकारी दी जा रही है —
विधानसभा में क्या हुई घोषणा और किसने उठाया मुद्दा?
राजस्थान विधानसभा की कार्यवाही के दौरान क्षेत्र से जुड़े जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों ने माउंट आबू के ऐतिहासिक नाम को वापस “आबुराज” करने की मांग रखी। उनका तर्क है कि:
प्राचीन और धार्मिक ग्रंथों में इस क्षेत्र का नाम “आबुराज” या “अर्बुदांचल” बताया गया है।
अंग्रेजों के समय में इसका नाम बदलकर “Mount Abu” रखा गया था।
धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए पुराने नाम को पुनः लागू किया जाना चाहिए।
कुछ विधायकों ने इसे धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल बताते हुए यहां शराब और मांस बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी सदन में रखी।
क्या सरकार ने नाम बदलने का अंतिम फैसला कर दिया?
अभी तक सरकार ने आधिकारिक रूप से नाम बदलने की अंतिम अधिसूचना जारी नहीं की है।
वर्तमान स्थिति:
विधानसभा में प्रस्ताव/मांग रखी गई है।
स्थानीय निकायों और संबंधित विभागों से राय मांगी गई है।
सरकार विभिन्न पक्षों — पर्यटन, स्थानीय व्यापार, जनता और प्रशासन — से सुझाव ले रही है।
यानी प्रक्रिया प्रारंभिक चरण में है, अंतिम निर्णय बाकी है।
नाम बदलने के समर्थन में क्या तर्क दिए जा रहे हैं?
समर्थकों का कहना है कि:
माउंट आबू का धार्मिक महत्व बहुत प्राचीन है।
इसे ऋषियों और तपस्थली से जुड़ा क्षेत्र माना जाता है।
“आबुराज” नाम क्षेत्र की मूल सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है।
इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है।
कुछ नेताओं का दावा है कि ऐतिहासिक नाम बहाल करने से क्षेत्र की विरासत को सम्मान मिलेगा।
विरोध क्यों हो रहा है?
स्थानीय व्यापारियों, होटल एसोसिएशन और पर्यटन से जुड़े लोगों ने चिंता जताई है कि:
माउंट आबू राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन और बड़ा पर्यटन केंद्र है।
नाम बदलने से इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान प्रभावित हो सकती है।
अगर इसे धार्मिक स्थल के रूप में प्रचारित किया गया तो सामान्य पर्यटन घट सकता है।
पर्यटन कम होने से रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा।
कई संगठनों ने सार्वजनिक सहमति लेने की मांग भी उठाई है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि क्या है?
माना जाता है कि प्राचीन काल में इस क्षेत्र को “आबुराज” कहा जाता था।
ब्रिटिश काल में अंग्रेज अधिकारियों ने इसे “Mount Abu” नाम दिया।
पिछले कुछ वर्षों से स्थानीय जनप्रतिनिधि पुराने नाम को पुनर्स्थापित करने की मांग करते रहे हैं।
आगे क्या होगा?
नाम परिवर्तन की प्रक्रिया में सामान्यतः ये चरण होते हैं:
राज्य सरकार की मंजूरी
विधानसभा स्तर पर प्रस्ताव
केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय की स्वीकृति
राजपत्र (गजट) अधिसूचना
इन सभी प्रक्रियाओं के बाद ही आधिकारिक नाम बदलता है।