कोटा में मिट्टी ढहने से 2 इंजीनियरों की मौत: 3 महीने पहले रेलवे में लगा था JE प्रभात, परिवार बोला- ट्रेनिंग में था फिर भी जोखिम भरे प्रोजेक्ट में लगाया
कोटा में रेलवे अंडरपास निर्माण के दौरान मिट्टी ढहने से दो इंजीनियरों की मौत हो गई। मृतक जूनियर इंजीनियर प्रभात सिंह सोलंकी की रेलवे में नियुक्ति महज तीन महीने पहले हुई थी।
राजस्थान के कोटा जिले में रेलवे अंडरपास निर्माण कार्य के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में दो इंजीनियरों की मौत हो गई। हादसा गुरुवार रात नेशनल हाईवे-52 स्थित दरा घाटी के पास हुआ, जहां रेलवे अंडर ब्रिज निर्माण का काम चल रहा था। निर्माण स्थल पर अचानक मिट्टी ढहने से दो इंजीनियर उसके नीचे दब गए। दोनों को रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
मृतकों में भोपाल निवासी जूनियर इंजीनियर प्रभात सिंह सोलंकी और बिहार निवासी इंजीनियर पंकज कुमार झा शामिल हैं। शुक्रवार सुबह प्रभात सिंह सोलंकी का पोस्टमार्टम किया गया। इस दौरान परिवार ने रेलवे प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए।
परिवार बोला- सिर्फ 3 महीने पहले मिली थी नौकरी
परिजनों के अनुसार प्रभात सिंह सोलंकी की रेलवे में जूनियर इंजीनियर के पद पर नियुक्ति महज तीन महीने पहले ही हुई थी और वह अभी ट्रेनिंग पीरियड में था। परिवार का आरोप है कि इसके बावजूद उसे इतने बड़े और जोखिम भरे प्रोजेक्ट में लगा दिया गया।
परिवार ने हादसे को साफ तौर पर लापरवाही का परिणाम बताया है। उनका कहना है कि अनुभवहीन इंजीनियरों को ऐसे संवेदनशील निर्माण कार्य में भेजना गंभीर चूक है।
परिवार का इकलौता बेटा था प्रभात
प्रभात सिंह सोलंकी भोपाल का रहने वाला था और परिवार में दो बहनों का इकलौता भाई था। इतना ही नहीं, पिता और तीन चाचाओं के परिवार में भी वह अकेला लड़का था। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी भी उसी के कंधों पर थी।
हादसे की खबर के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। पोस्टमार्टम के दौरान एमबीएस हॉस्पिटल में रेलवे अधिकारियों और परिजनों की मौजूदगी रही।
गुरुवार रात निरीक्षण के दौरान हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस कॉरिडोर के तहत दरा टनल और रेलवे अंडर ब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा था। गुरुवार रात करीब 8 बजे रेलवे अंडर ब्रिज पर बॉक्स फिशिंग का काम किया जा रहा था।
इसी दौरान जूनियर इंजीनियर प्रभात सिंह सोलंकी और इंजीनियर पंकज कुमार झा निर्माण कार्य का निरीक्षण कर रहे थे। तभी अचानक मिट्टी भरभराकर ढह गई और दोनों इंजीनियर उसके नीचे दब गए।
सूचना मिलते ही प्रशासन और राहत टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। काफी मशक्कत के बाद दोनों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
रेलवे प्रशासन ने सहायता का भरोसा दिया
सीनियर डीसीएम सौरभ जैन ने बताया कि रेलवे प्रशासन नियमानुसार दोनों पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगा। वहीं बिहार निवासी इंजीनियर पंकज कुमार झा के परिजनों के कोटा पहुंचने के बाद उनके शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
फिलहाल हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।