जोधपुर में बड़ा बदलाव दो निगमों का अंत, एक शक्तिशाली निगम का उदय – अब प्रशासन की कमान में तेज विकास की उम्मीद!

जोधपुर में दो निगमों का अंत! उत्तर-दक्षिण मिलकर बने एक शक्तिशाली निगम, 100 वार्डों वाला नया सिस्टम। प्रशासक प्रतिभा सिंह के हाथों कमान, अब बिना पार्षद तेज़ विकास की उम्मीद!

Nov 10, 2025 - 10:32
जोधपुर में बड़ा बदलाव दो निगमों का अंत, एक शक्तिशाली निगम का उदय – अब प्रशासन की कमान में तेज विकास की उम्मीद!

10 नवम्बर 2025 जोधपुर (राजस्थान): जोधपुर शहर में नगर निगम की सत्ता अब चुने हुए पार्षदों से हटकर प्रशासनिक अधिकारियों के कंधों पर आ गई है। पांच साल के कार्यकाल पूरा होने के बाद राजस्थान सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिससे शहर की पूरी कमान प्रशासन के हाथों में सौंप दी गई है। इससे विकास कार्यों में गति आने और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जागी है।

दो निगमों का अंत और एक नए निगम का जन्म

रविवार को जोधपुर नगर निगम उत्तर और दक्षिण के निर्वाचित बोर्डों का कार्यकाल समाप्त हो गया। उत्तर निगम में कांग्रेस का बोर्ड था, जबकि दक्षिण में भाजपा की सत्ता कायम थी। दोनों निगमों में 80-80 पार्षद थे, जो शहर के विभिन्न हिस्सों की जिम्मेदारी संभालते थे। अब राज्य सरकार ने दोनों को विलय करके एक एकल नगर निगम बनाने का ऐलान किया है, जिसमें कुल 100 वार्ड होंगे। इस कदम से शहर की प्रशासनिक व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित होगी, अनावश्यक खर्च में कटौती होगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा। जोधपुर जैसे अपेक्षाकृत छोटे शहर में दो अलग-अलग निगमों के कारण अक्सर कार्यों में समन्वय की कमी और देरी होती थी, जिसे अब एक छत के नीचे लाकर दूर करने की कोशिश की जा रही है।

प्रशासक के रूप में प्रतिभा सिंह की एंट्री

सरकार ने संभागीय आयुक्त प्रतिभा सिंह को नए नगर निगम का प्रशासक नियुक्त किया है। सोमवार से सभी कार्य उनके निर्देशन में संचालित होंगे। नए बोर्ड के चुनाव होने तक शहर की पूरी जिम्मेदारी इस अंतरिम प्रशासन पर रहेगी। यह व्यवस्था विकास परियोजनाओं को तेजी देने, बजट प्रबंधन को मजबूत करने और जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान में मददगार साबित हो सकती है।

पार्षदों और जनता की मिली-जुली राय

एनडीटीवी की टीम ने शहर के आम नागरिकों और पूर्व पार्षदों से बातचीत की। एक पूर्व पार्षद ने कहा कि कार्यकाल खत्म होने से जनता और प्रशासन के बीच की सीधी कड़ी कमजोर पड़ गई है, लेकिन एकल निगम से कार्यों में तेजी आएगी। पहले दो निगमों के कारण अधिकारियों की संख्या अधिक होने से वित्तीय बोझ बढ़ गया था, जो अब कम होगा। जोधपुर छोटा शहर है, यहां दो निगमों की जरूरत नहीं थी – अब विकास की रफ्तार बढ़ेगी। जनता को अब सीधे अधिकारियों से काम करवाना पड़ेगा, जो चुनौतीपूर्ण लेकिन अधिक प्रभावी साबित हो सकता है। कई नागरिकों ने भी सहमति जताई कि एक निगम से शहर की योजना अधिक एकीकृत होगी, हालांकि कुछ ने निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में जवाबदेही पर सवाल उठाए। कुल मिलाकर, यह बदलाव शहर के लिए लंबे समय में फायदेमंद माना जा रहा है, जहां आम लोगों के काम आसानी से पूरे होंगे और प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी।