जिस स्कूल बस से घर पहुंचा उसी बस ने ली मासूम की जान मां की चीखें गूंजीं.

उदयपुर के झाड़ोल में 4 साल का मासूम बच्चा उसी स्कूल बस से उतरते ही उसके पिछले टायर से कुचलकर मारा गया, जिससे वह स्कूल से घर लौटा था। ड्राइवर की लापरवाही से हुई मौत पर मां चीख पड़ीं, पिता ने अस्पताल की खराब व्यवस्था पर आक्रोश जताया। परिवार का इकलौता बेटा था। ड्राइवर गिरफ्तार, पुलिस जांच कर रही है।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
October 29, 2025 • 12:49 PM  25
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जिस स्कूल बस से  घर पहुंचा उसी बस ने ली मासूम की जान मां की चीखें गूंजीं.
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जिस स्कूल बस से  घर पहुंचा उसी बस ने ली मासूम की जान मां की चीखें गूंजीं.

उदयपुर, 29 अक्टूबर 2025: राजस्थान के उदयपुर जिले के झाड़ोल क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ है, जहां मात्र 4 साल के एक मासूम बच्चे की जान उसी स्कूल बस ने ले ली, जिससे वह दोपहर में स्कूल से घर लौटा था। यह घटना न सिर्फ लापरवाही की मिसाल है, बल्कि माता-पिता के सपनों पर भी करारा प्रहार साबित हुई। परिवार का इकलौता बेटा, जो अभी दुनिया को देखते ही था, बस के पिछले टायर के नीचे कुचल गया। मां का शव देखते ही फूट-फूटकर रोना और पिता का अस्पताल में व्यवस्था न होने का दर्द भरा रोना- देखकर हर कोई स्तब्ध है।

हादसे की दर्दनाक पूरी कहानी

मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे का समय था। झाड़ोल क्षेत्र के एक छोटे से गांव में रहने वाला 4 साल का मासूम बच्चा, जिसका नाम अभी स्पष्ट नहीं हुआ है, अपनी स्कूल बस से घर पहुंचा। वह नर्सरी का छात्र था और रोज की तरह खुशी-खुशी बस में सवार होकर आया। जैसे ही बस रुकी और बच्चा उतरने लगा, ड्राइवर ने बिना इधर-उधर देखे तेजी से बस को आगे बढ़ा दिया। मासूम कुछ कदम ही चला था कि वह बस से टकरा गया और सड़क पर गिर पड़ा। बस का पिछला टायर उसके छोटे से शरीर पर से गुजर गया, जिससे मौके पर ही उसकी सांसें थम गईं।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बच्चा बस से उतरते ही अपनी मां की ओर दौड़ा था, जो दरवाजे पर उसका इंतजार कर रही थी। लेकिन वह दृश्य देखते ही मां की चीखें आसमान छूने लगीं। "मेरा बेटा... मेरा इकलौता लाल!" चीखते हुए वह शव की ओर लपकी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। परिवार के अन्य सदस्यों ने तुरंत ड्राइवर को रोका, लेकिन वह घबरा गया और मौके से भागने की कोशिश की। ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया।

परिवार का गहरा सदमा: इकलौता बेटा, टूटा आसरा

यह बच्चा परिवार का इकलौता बेटा था। पिता एक छोटे से मजदूर हैं, जो खेतों में काम करके गुजारा चलाते हैं, जबकि मां घर संभालती है। बच्चे की मौत ने पूरे परिवार को शोक की चादर ओढ़ा दी है। मां का रो-रोकर बुरा हाल है; वह बार-बार कहती हैं, "वह अभी खेलने की उम्र का था, स्कूल से लौटकर हमेशा हंसता-खेलता आता था। आज वह हमेशा के लिए चला गया।" पिता ने गुस्से और दर्द भरे लहजे में कहा, "हमारा इकलौता सहारा था। अब कौन संभालेगा?" परिवार ने बताया कि बच्चा बहुत होशियार और शरारती था, जो मां के साथ हमेशा चिपका रहता था।

अस्पताल में हंगामा: व्यवस्था पर सवाल, परिवार ने जताया आक्रोश

शव को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां की बदहाली ने परिवार के घावों पर नमक छिड़क दिया। पिता ने आरोप लगाया कि अस्पताल में न तो उचित इलाज की व्यवस्था थी, न ही एम्बुलेंस समय पर पहुंची। "शव को देखते ही डॉक्टरों ने कहा कि कुछ नहीं हो सकता, लेकिन बेसिक सुविधाएं भी न थीं। एम्बुलेंस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा," उन्होंने कहा। परिवार और ग्रामीणों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। सैकड़ों लोग इकट्ठा हो गए, जो लापरवाही के खिलाफ नारे लगाने लगे। पुलिस को भारी मशक्कत कर स्थिति संभालनी पड़ी। वीडियो फुटेज में दिख रहा है कि परिवारजन अस्पताल के बाहर धरना दे रहे थे, जबकि पुलिस उन्हें शांत करने की कोशिश कर रही थी।

पुलिस कार्रवाई: ड्राइवर गिरफ्तार, जांच जारी

झाड़ोल थाना पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर केस दर्ज कर लिया। बस ड्राइवर को हिरासत में ले लिया गया है। प्रारंभिक जांच में ड्राइवर की लापरवाही सामने आ रही है। एसपी उदयपुर ने बताया कि ड्राइवर के खिलाफ आईपीसी की धारा 304A (लापरवाही से मौत) और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। बस का फिटनेस सर्टिफिकेट और ड्राइवर का लाइसेंस भी चेक किया जा रहा है। पुलिस ने कहा कि स्कूल प्रशासन पर भी कार्रवाई हो सकती है, अगर उनकी ओर से कोई चूक पाई गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जो हादसे के कारणों को स्पष्ट करेगी।

व्यापक प्रभाव: सुरक्षा पर सवाल, जागरूकता की जरूरत

यह हादसा राजस्थान में स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ड्राइवरों को बच्चों के उतरने के बाद इंतजार करने की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। उदयपुर जिले में पिछले एक साल में ऐसे 5 से ज्यादा हादसे हो चुके हैं, जहां लापरवाही से बच्चों को नुकसान पहुंचा। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें संकरी होने से खतरा और बढ़ जाता है। अभिभावक संगठनों ने मांग की है कि स्कूल बसों में सीसीटीवी अनिवार्य हो और ड्राइवरों की साप्ताहिक जांच हो।यह घटना न सिर्फ एक परिवार का दर्द है, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी। मासूमों की सुरक्षा में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं। प्रशासन को तत्काल कदम उठाने होंगे, वरना ऐसे हादसे बढ़ते जाएंगे।

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

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