जयपुर रेलवे स्टेशन पर बुजुर्ग तीर्थ यात्रियों का हंगामा: “नहीं ले जाना था तो क्यों बुलाया?”
जयपुर रेलवे स्टेशन पर राजस्थान सरकार की मुफ्त वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के तहत गंगासागर जाने वाली स्पेशल ट्रेन में सीटों से ज्यादा बुजुर्ग पहुंच गए। तय संख्या से अतिरिक्त 120 बुजुर्गों को वापस भेजने पर परिजनों ने हंगामा किया, हाथापाई हुई। सुबह से चाय-पानी तक नहीं मिला और कई बुजुर्ग भूखे लौटे। विभाग ने वंचित यात्रियों को 18 दिसंबर की अगली यात्रा में प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया।
जयपुर, 10 दिसंबर 2025: राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी “वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना-2025” के तहत मंगलवार को जयपुर रेलवे स्टेशन पर उस समय हंगामा हो गया जब सैकड़ों बुजुर्गों को निर्धारित संख्या से अधिक आने की वजह से घर लौटने को कहा गया। ये बुजुर्ग वातानुकूलित विशेष ट्रेन “राजस्थान वाहिनी भारत गौरव” से पश्चिम बंगाल के गंगासागर तीर्थ यात्रा पर जा रहे थे।
क्या था प्लान? जयपुर, उदयपुर और अजमेर संभाग से कुल 1,000 चयनित बुजुर्गों को इस ट्रेन से भेजने की योजना थी। संभागवार कोटा: उदयपुर 350, अजमेर 350, जयपुर 270 (कुल 970 + 30 रिजर्व सीटें)। हर कोच में दो सरकारी अधिकारी भी तैनात किए गए थे। ट्रेन मंगलवार देर रात गंगासागर के लिए रवाना हो गई।
लेकिन हुआ क्या? देवस्थान विभाग के अधिकारी हर बार की तरह “सुरक्षित पक्ष” रखने के लिए निर्धारित संख्या से ज्यादा लोगों को फोन करते हैं, क्योंकि कुछ यात्री अंतिम समय में नहीं आ पाते। इस बार जयपुर संभाग के लिए 270 के स्थान पर लगभग 350-370 लोगों को फोन कर दिए गए। नतीजा यह हुआ कि लगभग सभी बुलाए गए बुजुर्ग स्टेशन पहुंच गए। इससे करीब 120 अतिरिक्त यात्री हो गए, जिन्हें वापस भेजना पड़ा।
हंगामा और हाथापाई की नौबत शाम 5 बजे जब अतिरिक्त आए यात्रियों को टिकट नहीं दिए गए तो उनके परिजनों ने स्टेशन के बाहर बने तीर्थ यात्रा टेंट में हंगामा शुरू कर दिया।कुछ जगह तो परिजनों और अधिकारियों के बीच हाथापाई तक हो गई।बुजुर्गों ने गुस्से में कहा: “हमें नहीं ले जाना था तो दो-दो बार फोन करके क्यों बुलाया गया?”एक बुजुर्ग महिला ने धमकी दी: “तीर्थ यात्रा नहीं करवाई तो पटरी पर लेट जाएंगे।”कई बुजुर्गों ने मांग की: “ट्रेन में जगह नहीं है तो बस से ही भेज दो, आधा किराया भी ले लो।”
बुजुर्गों की शिकायतें सुबह से स्टेशन पर बैठे हैं, चाय-पानी तक नहीं दिया गया।जिन्हें टिकट मिला, केवल उन्हें ही खाना दिया गया; बाकी भूखे-प्यासे रहे।कुछ यात्रियों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उनके फॉर्म तक फाड़ दिए।दूर-दराज के इलाकों (झुंझुनूं, सीकर, दौसा आदि) से आए बुजुर्ग और उनके परिजन पूरी तरह मायूस होकर लौटे।
एक परिवार की आपबीती खेतड़ी (झुंझुनूं) निवासी प्रवीण कुमावत ने बताया:“मेरी मां भगवती देवी (62) और पिता राधेश्याम कुमावत (72) को दो-दो बार फोन आया था। हम खुशी-खुशी जयपुर आए। अब कह रहे हैं कि ज्यादा यात्री आ गए, टिकट नहीं दे सकते। इतनी दूर से आए, न खाना, न पानी, और अब घर लौटने को कह रहे हैं।”
विभाग का पक्ष देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त महेंद्र देवतवाल ने कहा:“जो 120 यात्री आज वंचित रह गए, उन्हें 18 दिसंबर को प्राथमिकता के आधार पर अगली तीर्थ यात्रा में भेजा जाएगा। यह तकनीकी कारणों से हुआ, जानबूझकर नहीं।”
मूल समस्या क्या है? हर साल की तरह इस बार भी विभाग ने “एक्स्ट्रा कॉल” की पुरानी प्रथा अपनाई, लेकिन इस बार लगभग सभी बुलाए गए यात्री पहुंच गए। नतीजा: सिस्टम फेल, बुजुर्गों की भावनाएं आहत, और सरकार की योजना पर सवाल।राजस्थान सरकार की यह मुफ्त तीर्थ यात्रा योजना बेहद लोकप्रिय है, लेकिन मंगलवार का यह वाकया बताता है कि लोकप्रियता के साथ-साथ बेहतर प्रबंधन और पारदर्शी चयन प्रक्रिया की भी उतनी ही जरूरत है। नहीं तो हर बार “ज्यादा बुलाओ, कुछ तो छट जाएंगे” वाला जुआ बुजुर्गों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ बन जाता है।