जयपुर का दिव्य राम स्तंभ: 108 पवित्र स्तंभों में खास पहचान, सवा करोड़ ‘श्रीराम’ नामों से गूंजता आस्था का केंद्र

जयपुर के मुरली मनोहर जी मंदिर में स्थित दिव्य राम स्तंभ, जहां सवा करोड़ ‘श्रीराम’ नाम और वाल्मीकि रामायण के श्लोक अंकित हैं, देश के 108 पवित्र स्तंभों में विशेष स्थान रखता है।

Mar 27, 2026 - 11:50
जयपुर का दिव्य राम स्तंभ: 108 पवित्र स्तंभों में खास पहचान, सवा करोड़ ‘श्रीराम’ नामों से गूंजता आस्था का केंद्र
जयपुर का दिव्य राम स्तंभ: 108 पवित्र स्तंभों में खास पहचान, सवा करोड़ ‘श्रीराम’ नामों से गूंजता आस्था का केंद्र

जयपुर। राजधानी जयपुर में स्थित एक ऐसा राम मंदिर है, जिसे अत्यंत पवित्र और दिव्य माना जाता है। यह मंदिर अपनी धार्मिक महिमा और अनोखी संरचना के कारण देशभर में विशेष पहचान रखता है।

यह पावन स्थल गंगापुर बाहार, बदनपुरा स्थित श्री मुरली मनोहर जी मंदिर परिसर में स्थित है, जहां स्थापित राम स्तंभ श्रद्धा और आस्था का अनूठा प्रतीक है।

देशभर में कुल 108 राम स्तंभ स्थापित किए गए हैं, लेकिन राजस्थान में केवल दो ही स्तंभ मौजूद हैं—एक जयपुर और दूसरा पुष्कर में। जयपुर का यह स्तंभ उन्हीं पवित्र स्तंभों में शामिल है, जो इसे और भी विशेष बनाता है।

 रामायण के श्लोकों से सजी पवित्र संरचना

इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां पत्थर की शिलाओं पर वाल्मीकि रामायण के मूल श्लोक अंकित किए गए हैं।
मंदिर में भगवान श्रीराम सात सीढ़ियों के ऊपर विराजमान हैं, जो रामायण के सात कांडों का प्रतीक मानी जाती हैं।

 सवा करोड़ ‘श्रीराम’ नामों की स्थापना

राम स्तंभ के भीतर सवा करोड़ से अधिक भक्तों द्वारा लिखे गए “श्री राम” नाम स्थापित हैं। इसे अत्यंत दिव्य माना जाता है। मान्यता है कि यहां परिक्रमा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और मन को विशेष शांति मिलती है।

संत रामानुज जियर स्वामीजी ने की स्थापना

इस पवित्र राम दरबार की स्थापना दक्षिण भारत से आए त्रिदंडी श्रीमन्नारायण रामानुज जियर स्वामीजी द्वारा वर्ष 1966 में की गई थी।
स्थापना के दौरान 9 दिनों तक वाल्मीकि रामायण का पाठ और पंचकुंडी हवन आयोजित किया गया, जिसके बाद मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया।

108 महायज्ञों से जुड़ा इतिहास

धार्मिक मान्यता के अनुसार, वर्ष 1941 में रामायण के अपमान के बाद स्वामीजी ने 1960 से 1969 के बीच 9 वर्षों में 108 श्रीमद् रामायण महायज्ञ आयोजित किए। जयपुर का यह स्तंभ उन्हीं 108 स्तंभों में से एक है, जिनका विस्तार आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में हुआ।

परंपरा

और उत्सव आज भी जीवित

मंदिर में आज भी रामानुज संप्रदाय की पंचरात्र आगम परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की जाती है। हर साल रामनवमी के अवसर पर यहां दिव्य औषधियों से विशेष अभिषेक होता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु सामूहिक परिक्रमा में शामिल होते हैं। आस्था, इतिहास और आध्यात्म का यह संगम जयपुर के इस राम स्तंभ को न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद खास बनाता है।

Kashish Sain Bringing truth from the ground