नीमकाथाना के पूर्व विधायक फूलचंद गुर्जर का निधन: किसान नेता और दो बार के विधायक का संघर्षपूर्ण सफर समाप्त
राजस्थान के नीमकाथाना से दो बार विधायक रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता और किसान नेता फूलचंद गुर्जर का जयपुर में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार थे। शिक्षक से सरपंच और फिर विधायक बने फूलचंद गुर्जर ने किसानों के हितों के लिए कई संघर्ष किए। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है और अंतिम संस्कार नीमकाथाना में होगा।
राजस्थान के सीकर जिले के नीमकाथाना क्षेत्र से दो बार विधायक रहे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और प्रसिद्ध किसान नेता फूलचंद गुर्जर का शुक्रवार को जयपुर में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और जयपुर के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन की खबर से पूरे नीमकाथाना क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। परिवार के सदस्यों के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार नीमकाथाना में किया जाएगा।फूलचंद गुर्जर का जन्म 1953 में सीकर जिले के मोठूका गांव में हुआ था। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से इतिहास में स्नातकोत्तर (एम.ए.) की डिग्री हासिल की थी। वे खेलों में भी सक्रिय रहे और वॉलीबॉल तथा बास्केटबॉल में जिला स्तर पर विजेता रह चुके थे। इसके अलावा, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के लिए भी वे हमेशा सक्रिय रहे।
शिक्षक से सरपंच और फिर विधायक तक का सफर फूलचंद गुर्जर ने अपने करियर की शुरुआत शिक्षक के रूप में की। 1972 से 1978 तक वे जयपुर के बनीपार्क स्थित सरस्वती विद्या निकेतन में अध्यापक के तौर पर कार्यरत रहे। इसके बाद राजनीति में कदम रखा और 1978 में वे ग्राम पंचायत बेगा की नांगल के सरपंच चुने गए। पूरे पांच साल तक उन्होंने सरपंच के रूप में कार्य किया।राजनीतिक करियर में बड़ा मुकाम उन्हें 1985 में मिला, जब वे नीमकाथाना से भाजपा के टिकट पर आठवीं राजस्थान विधानसभा के लिए चुने गए। उन्होंने 1985 से 1990 तक विधायक के रूप में सेवा दी। इसके बाद 1990 में फिर से चुनाव जीतकर नौवीं विधानसभा (1990-1992) में सदस्य बने। हालांकि, 1993 और 1998 के विधानसभा चुनावों में वे भाजपा के प्रत्याशी रहे, लेकिन जीत नहीं हासिल कर सके।
विधानसभा सदस्य के रूप में फूलचंद गुर्जर ने विभिन्न समितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:1985-1987: अधीनस्थ विधान संबंधी समिति के सदस्य,1987-1988: पुस्तकालय समिति के सदस्य,1988-1990: सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति के सदस्य,1990-1992: प्राक्कलन समिति (ख) के सदस्य।नीमकाथाना क्षेत्र में वे किसान नेता के रूप में मशहूर थे और किसानों के हितों के लिए कई संघर्ष किए। भाजपा नेता प्रमोद बिजौर ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी को एक बड़ी क्षति पहुंची है। उनका कार्यकाल संघर्षपूर्ण रहा और उन्होंने किसानों के लिए कई लड़ाइयां लड़ीं।
परिवार में भी राजनीतिक विरासत फूलचंद गुर्जर का परिवार भी राजनीति में सक्रिय रहा। उनके बेटे संतोष गुर्जर पाटन पंचायत समिति के प्रधान रह चुके थे (2015-2020)। बाद में 2020 के पंचायत चुनाव में वे सदस्य चुने गए, लेकिन दुर्भाग्यवश दो साल पहले हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया। संतोष गुर्जर की पत्नी चंदा देवी भी नीमकाथाना पंचायत समिति की प्रधान रह चुकी हैं (2005-2010)।फूलचंद गुर्जर का निधन न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। वे एक साधारण शिक्षक से लेकर किसान नेता और विधायक तक का सफर तय करने वाले प्रेरणादायी व्यक्तित्व थे। उनके निधन पर क्षेत्र के लोगों, राजनीतिक दलों और सहयोगियों से श्रद्धांजलि संदेश आ रहे हैं।