एक दर्दनाक हादसा जिसमें पिता को बचाने की कोशिश में दो बेटों ने भी अपनी जान गंवा दी — हनुमानगढ़ के रासूवाला गांव में पानी की डिग्गी में तीनों की मौत
हनुमानगढ़ जिले के संगरिया थाना क्षेत्र के रासूवाला गांव में मंगलवार शाम एक दर्दनाक हादसा हुआ। खेत में फसलों पर स्प्रे करने गए गुरदीप सिंह (40) पैर फिसलने से पड़ोसी की पानी की डिग्गी में गिर गए। उन्हें बचाने के प्रयास में दोनों बेटे लखविंद्र सिंह (22) और राजविंद्र सिंह (16) भी डिग्गी में कूद गए, लेकिन निकास न होने से तीनों डूबकर मौत के मुंह में समा गए। ग्रामीणों ने रस्सी से शव बाहर निकाले। परिवार में अब सिर्फ मां और एक बेटी बची हैं। पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
हनुमानगढ़ जिले के संगरिया थाना क्षेत्र के रासूवाला गांव में मंगलवार शाम एक बेहद हृदयविदारक हादसा हुआ, जिसमें एक पिता और उसके दो बेटों की पानी की डिग्गी (खेत में बने बड़े पानी के टैंक) में डूबने से मौत हो गई। यह घटना इतनी दुखद है कि बेटों ने पिता को बचाने के लिए खुद डिग्गी में कूद दिया, लेकिन तीनों बाहर नहीं निकल पाए और मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस त्रासदी ने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी है।
घटना कैसे हुई?
मृतक गुरदीप सिंह (उम्र लगभग 40 वर्ष) अपने बड़े बेटे लखविंद्र सिंह (22 वर्ष) और छोटे बेटे राजविंद्र सिंह (16 वर्ष) के साथ अपने खेत में फसलों पर कीटनाशक स्प्रे करने गए थे। स्प्रे के लिए पानी की जरूरत पड़ने पर वे पड़ोसी जसवीर सिंह के खेत में बनी डिग्गी के पास पहुंचे।पानी लेते समय गुरदीप सिंह का पैर फिसल गया और उनका संतुलन बिगड़ने से वे डिग्गी में गिर पड़े। डिग्गी में बाहर निकलने के लिए कोई रैंप, सीढ़ी या सुरक्षित निकास की व्यवस्था नहीं थी। डूबते पिता को देखकर दोनों बेटे उन्हें बचाने के लिए तुरंत डिग्गी में कूद गए। लेकिन गहरे पानी और निकास न होने के कारण तीनों ही डूब गए। कुछ ही मिनटों में उनकी मौत हो गई।
परिजनों को कैसे पता चला?
उस समय खेत के आसपास कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था। जब तीनों देर शाम तक घर नहीं लौटे, तो परिवार और ग्रामीणों ने चिंता जताई। रात करीब 8 बजे ग्रामीण खेत की ओर तलाश करने पहुंचे। डिग्गी के किनारे पर टोपी, बेल्ट, कपड़े, जूते और चप्पल बिखरे पड़े देखकर उन्हें हादसे का अंदेशा हुआ।पानी में तैरती तीनों लाशें दिखीं। ग्रामीणों ने रस्सियों की मदद से शवों को बाहर निकाला।
परिवार की स्थिति
गुरदीप सिंह खेतीबाड़ी करते थे। बड़ा बेटा लखविंद्र सिंह बीएसटीसी का छात्र था, जबकि छोटा बेटा राजविंद्र सिंह 10वीं कक्षा में पढ़ता था। अब परिवार में सिर्फ गुरदीप सिंह की पत्नी और एक बेटी बची हैं। इस हादसे ने परिवार को पूरी तरह से तबाह कर दिया है।
पुलिस और पोस्टमॉर्टम
संगरिया थानाधिकारी अमर सिंह ने बताया कि शवों को संगरिया सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया। बुधवार सुबह पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। गुरदीप सिंह के भाई जसवीर सिंह ने थाने में मामला दर्ज करवाया है।