10वीं की छात्रा ने बोर्ड परीक्षा से पहले किया आत्महत्या का प्रयास: सुसाइड नोट में लिखा- "सॉरी मम्मी और भैया, मैं आपकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई"

अजमेर में 10वीं की एक छात्रा ने स्कूल के कम अटेंडेंस नोटिस और लगातार टीचर्स द्वारा टॉर्चर व अलग-थलग करने के कारण विष पीकर आत्महत्या का प्रयास किया। सुसाइड नोट में उसने मम्मी-भैया से माफी मांगी और स्कूल में होने वाली परेशानियों का जिक्र किया। वह अस्पताल में आईसीयू में है।

Feb 3, 2026 - 17:26
10वीं की छात्रा ने बोर्ड परीक्षा से पहले किया आत्महत्या का प्रयास: सुसाइड नोट में लिखा- "सॉरी मम्मी और भैया, मैं आपकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई"

राजस्थान के अजमेर शहर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां 10वीं कक्षा की एक छात्रा ने स्कूल द्वारा भेजे गए नोटिस के बाद आत्महत्या का प्रयास किया। छात्रा ने विषाक्त पदार्थ (फिनाइल) पी लिया, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई। वह फिलहाल जेएलएन अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है और उसका इलाज चल रहा है। यह घटना मंगलवार दोपहर करीब 12:30 बजे अलवर गेट थाना क्षेत्र में हुई।

सुसाइड नोट में क्या लिखा था?

छात्रा ने घटना से पहले एक पेज का सुसाइड नोट लिखा, जिसमें उसने अपनी पीड़ा और स्कूल में हो रही परेशानियों का जिक्र किया। नोट के मुख्य अंश इस प्रकार हैं:"सॉरी मम्मी और भैया मैं आपकी उम्मीद पर सही साबित नहीं हो पाई... आई एम सॉरी कि मुझे यह करना पड़ रहा है।क्योंकि मुझे स्कूल जाना अच्छा नहीं लगता था। वहां पर सब मुझे टॉर्चर करते थे, मेरे से कोई भी बात नहीं करता था और अगर कोई करता था उसको बोलते कि वह अच्छी लड़की नहीं है।मेरी स्कूल और क्लास में सिर्फ एक दोस्त थी। उसके भी घर वालों को बुलाकर टीचर्स बोलते थे कि यह अच्छी लड़की नहीं और हमको बात भी नहीं करने देते हैं। मुझे नहीं पसंद अब स्कूल जाना।दसवीं स्टार्टिंग से ही सब टीचर्स मुझे वर्बल्ली टॉर्चर करते थे और अब मेरी अटेंडेंस कम है, इसलिए यह लोग मेरा फ्यूचर बर्बाद कर रहे हैं। मैं यह सब और नहीं झेल सकती।मम्मी आई एम सॉरी मेरे सारे दोस्त मुझे चिढ़ाएंगे कि मुझसे दसवीं पास नहीं हुई, इसलिए मैं नहीं जीना चाहती। अपना ख्याल रखना और ध्यान रखना।"यह नोट छात्रा की मानसिक स्थिति और स्कूल में लगातार होने वाले उत्पीड़न को दर्शाता है।

घटना कैसे हुई?

छात्रा निजी स्कूल में 10वीं कक्षा में पढ़ रही थी। जनवरी में प्री-बोर्ड परीक्षाओं के बाद पीटीएम (पैरेंट-टीचर मीटिंग) हुई थी, जिसमें उसकी अटेंडेंस 60% बताई गई। लेकिन कुछ दिनों पहले स्कूल ने अचानक उसकी अटेंडेंस 50% बताकर एडमिट कार्ड जारी न करने का नोटिस भेज दिया। परिवार पिछले 4-5 दिनों से स्कूल के चक्कर काट रहा था, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।मंगलवार को मां के मोबाइल पर फिर से व्हाट्सएप के जरिए उपस्थिति कम होने और एडमिट कार्ड न मिलने का नोटिस आया। छात्रा ने इसे पढ़ लिया। इसके बाद वह घर के पास स्थित फार्म पर गई और वहां विषाक्त पदार्थ पी लिया।जब उसका बड़ा भाई घर पहुंचा, तो बहन को अचेत अवस्था में देखकर जोर से चिल्लाया। आवाज सुनकर परिवार के अन्य सदस्य इकट्ठा हुए और तुरंत एंबुलेंस बुलाकर उसे जेएलएन अस्पताल ले गए, जहां आईसीयू में उसका उपचार जारी है।

परिवार का आरोप: स्कूल ने की लगातार परेशानी

छात्रा की मां ने स्कूल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि:टीचर्स ने छात्रा को लगातार वर्बल टॉर्चर किया।अन्य छात्रों और उनके अभिभावकों को उससे बात करने से मना किया गया।उसके एकमात्र दोस्त के अभिभावकों को बुलाकर कहा गया कि "यह अच्छी लड़की नहीं है" और "इसकी वजह से आपके बच्चों के मार्क्स कम आ रहे हैं"।इस वजह से छात्रा पूरी तरह अकेली पड़ गई और डिप्रेशन में चली गई।एडमिट कार्ड के लिए लगातार चक्कर लगाने के बावजूद स्कूल ने कोई सहयोग नहीं किया।परिवार का कहना है कि स्कूल की इन हरकतों और बोर्ड परीक्षा से जुड़े दबाव ने छात्रा को इस कदम तक पहुंचा दिया।

समाज के लिए चिंता का विषय

यह घटना छात्रों पर बढ़ते परीक्षा दबाव, स्कूलों में बुलिंग और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी को उजागर करती है। अटेंडेंस के नाम पर एडमिट कार्ड रोकना और छात्रों को अलग-थलग करना जैसे कदम गंभीर मानसिक संकट पैदा कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों को छात्रों की मानसिक स्थिति पर अधिक ध्यान देना चाहिए और अभिभावकों-साथियों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.