राजस्थान विधानसभा में भैंस और गाय के दूध को लेकर भिड़े मंत्री किरोड़ी लाल मीणा और गोविंद सिंह डोटासरा
राजस्थान विधानसभा में डोटासरा और किरोड़ी लाल मीणा के बीच पंचायतीराज अनुदान, ‘दूध’ विवाद और राष्ट्रभक्ति पर जोरदार बहस, बजट, परिसीमन और प्रशासनिक मुद्दों पर हंगामा।
डोटासरा vs किरोड़ी लाल मीणा: विधानसभा में ‘दूध’ और राष्ट्रभक्ति पर बहस
जयपुर। राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में पंचायतीराज विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान जोरदार नोकझोंक देखने को मिली। कांग्रेस के पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और भाजपा के वरिष्ठ नेता किरोड़ी लाल मीणा के बीच बहस के दौरान ‘दूध’ और राष्ट्रभक्ति को लेकर मज़बूत तकरार हुई।
डोटासरा ने पंचायतीराज में गलत परिसीमन और ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ को लेकर सवाल उठाए। जब डोटासरा ने किरोड़ी से पूछा, “शाखा में किसका दूध पिलाते हैं?” तो किरोड़ी लाल मीणा ने जवाब दिया—रानी लक्ष्मीबाई। इसके बाद डोटासरा ने मदन दिलावर पर चुटकी लेते हुए कहा कि किरोड़ी लाल साधु हैं और चिंता करने की जरूरत नहीं।
इस पर किरोड़ी लाल मीणा ने जोर देकर कहा कि संघ की शाखा में उन्हें राष्ट्रभक्ति सिखाई गई। उन्होंने कहा, “हमारा काम राष्ट्र की सेवा करना है, पद के पीछे नहीं भागते। शाखा में हमें तेजाजी, चंद्रशेखर, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, तिलक और सरदार पटेल का दूध पिलाया जाता था।”
गाय और भैंस के दूध को लेकर भी सदन में हल्की बहस हुई। डोटासरा ने कहा कि हमारे लोक देवताओं का सम्मान है, लेकिन यह भी देखना चाहिए कि पंचायतीराज और शिक्षा मंत्री किस दूध से बड़े हुए। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने इस बहस पर आपत्ति जताई।
डोटासरा ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना और मुख्यमंत्री थार क्षेत्र योजना में खर्च और बजट का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने परिसीमन में असमानता और पंचायतीराज व्यवस्था कमजोर करने के आरोप भी लगाए।
डोटासरा ने कहा, “सरकार अपने वादे पूरे नहीं कर पा रही। अधिकारी और कर्मचारी प्रमोशन तक नहीं कर पा रहे। 15वें वित्त आयोग की योजनाएं ऑनलाइन शुरू नहीं हो सकीं। जनता जवाब देगी, ‘पब्लिक सब जानती है’।
सदन में यह बहस कई मुद्दों पर केंद्रित रही—बजट, परिसीमन, योजनाएं और नेतृत्व पर जनता की नजर।