भैराणा धाम विवाद पर देर रात समझौता: बेनीवाल का जयपुर कूच टला, RIICO प्रोजेक्ट पर बनेगी कमेटी
भैराणा धाम के पास प्रस्तावित RIICO इंडस्ट्रियल एरिया को लेकर राजस्थान में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला।
राजस्थान के भैराणा धाम के पास प्रस्तावित RIICO इंडस्ट्रियल एरिया को लेकर बुधवार देर रात बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम देखने को मिला। दिनभर चले विरोध प्रदर्शन और कई दौर की वार्ताओं के बाद जब कोई ठोस समाधान नहीं निकला तो राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल संत समाज और हजारों समर्थकों के साथ जयपुर कूच पर निकल पड़े।
हालांकि देर रात प्रशासन और संघर्ष समिति के बीच हुई बातचीत के बाद फिलहाल आंदोलन टल गया है। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सहमति बनी है कि पूरे प्रोजेक्ट की समीक्षा के लिए एक संयुक्त कमेटी बनाई जाएगी।
दिनभर चला विरोध प्रदर्शन
बुधवार को भैराणा धाम में संत समाज, ग्रामीणों और आरएलपी कार्यकर्ताओं ने RIICO इंडस्ट्रियल एरिया के विरोध में प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों का आरोप था कि प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र से धार्मिक आस्था, पर्यावरण और वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचेगा।
शाम करीब 7 बजे हनुमान बेनीवाल बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ सभा स्थल पहुंचे। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा और कहा कि संतों और ग्रामीणों की भावनाओं की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी।
3 घंटे तक चली वार्ता, नहीं निकला समाधान
रात 9 बजे से प्रशासन और संघर्ष समिति के बीच बातचीत शुरू हुई। जयपुर कलेक्टर संदेश नायक, आईजी राहुल प्रकाश और RIICO अधिकारियों ने संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की।
सूत्रों के अनुसार सात में से पांच मांगों पर सहमति बनने के संकेत मिले थे। सरकार की ओर से भैराणा धाम के लिए 150 बीघा जमीन के साथ अतिरिक्त 100 बीघा भूमि सुरक्षित रखने का प्रस्ताव रखा गया था।
लेकिन संत समाज और आंदोलनकारियों ने इस प्रस्ताव को पर्याप्त नहीं माना। उनका कहना था कि पूरे दादू तपोवन क्षेत्र को सुरक्षित घोषित किया जाए और RIICO परियोजना को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए।
जयपुर कूच के दौरान बढ़ा तनाव
जब देर रात तक कोई अंतिम सहमति नहीं बनी तो हनुमान बेनीवाल ने आधी रात जयपुर कूच का ऐलान कर दिया। इसके बाद हजारों समर्थक जयपुर की ओर रवाना हो गए।
आंदोलनकारियों ने बिचून क्षेत्र में पुलिस का पहला नाका तोड़ दिया, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया। इसके बाद मौखमपुरा मोड़ पर भारी पुलिस बल तैनात कर बैरिकेडिंग की गई और काफिले को रोक दिया गया।
यहीं पर एक बार फिर प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच वार्ता शुरू हुई।
कमेटी गठन पर बनी सहमति
आखिरकार देर रात हुई बातचीत में समाधान की दिशा में सहमति बन गई। तय हुआ कि प्रस्तावित RIICO इंडस्ट्रियल एरिया को री-डिजाइन किया जाएगा और इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों, RIICO प्रतिनिधियों, संत समाज और संघर्ष समिति के सदस्यों की संयुक्त कमेटी बनाई जाएगी।
यह कमेटी पूरे मामले का अध्ययन कर विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। रिपोर्ट में नदी-नालों, धार्मिक क्षेत्र, पर्यावरण और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा।
बेनीवाल बोले- हमारी मांगें लगभग मान ली गईं
हनुमान बेनीवाल ने दावा किया कि सरकार ने 800 बीघा जमीन पर RIICO का काम फिलहाल रोक दिया है। साथ ही डेयरी के लिए दिए गए दो प्लॉट भी स्थगित कर दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि आगामी 15 से 20 दिनों में पूरे RIICO क्षेत्र को निरस्त कराने की दिशा में कार्रवाई होगी। बेनीवाल ने इसे “राजस्थान के जवानों और संत समाज की जीत” बताया।
संत समाज की क्या हैं चिंताएं?
संत समाज और संघर्ष समिति का कहना है कि भैराणा धाम केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि दादू तपोवन, गौशालाओं, वन्य जीवों और औषधीय वनस्पतियों से जुड़ा संवेदनशील क्षेत्र है।
आंदोलनकारियों का तर्क है कि यहां इंडस्ट्रियल एरिया बनने से प्रदूषण बढ़ेगा, हरियाली खत्म होगी और धार्मिक वातावरण प्रभावित होगा।
सरकार का पक्ष भी मजबूत
वहीं सरकार का कहना है कि यह क्षेत्र औद्योगिक और लॉजिस्टिक दृष्टि से बेहद अहम है। यह इलाका नेशनल हाईवे, जयपुर रिंग रोड और कोटपूतली-किशनगढ़ एक्सप्रेस-वे से जुड़ा हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक यह क्षेत्र दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के बफर जोन का हिस्सा माना जा रहा है। यहां भविष्य में ट्रेन कार्गो टर्मिनल विकसित करने की योजना भी प्रस्तावित है।
जमीन को लेकर क्या है विवाद?
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार पूरे क्षेत्र में लगभग 800 बीघा जमीन है। इसमें से करीब 150 बीघा जमीन भैराणा धाम के नाम दर्ज है, जबकि बाकी करीब 650 बीघा भूमि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज बताई जा रही है।
यही जमीन अब विवाद का केंद्र बनी हुई है।
फिलहाल टला आंदोलन, लेकिन विवाद जारी
देर रात समझौते के बाद फिलहाल जयपुर कूच टल गया है, लेकिन आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब सभी की नजर कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी है, जो अगले एक महीने में सरकार को सौंपी जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्थान की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है।