बाड़मेर जिला परिषद में वार्डों की संख्या दो कम होकर 37 हुई: गुड़ामालानी और धोरीमन्ना को बालोतरा में शामिल करने से बदला प्रशासनिक और वोटों का गणित
राजस्थान सरकार ने 31 दिसंबर 2025 को बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में बदलाव किया, जिसमें गुड़ामालानी और धोरीमन्ना उपखंड बाड़मेर से बालोतरा में शामिल किए गए, जबकि बायतु उपखंड बालोतरा से बाड़मेर में जोड़ा गया। इससे बाड़मेर जिला परिषद के वार्ड 39 से घटकर 37 हो गए, ग्राम पंचायतें 685 से 625 और पंचायत समितियां 18 से 17 रह गईं। नए ढांचे में बाड़मेर में 7 उपखंड व 11 तहसीलें, बालोतरा में 5 उपखंड व 9 तहसीलें होंगी। यह बदलाव जनगणना 2027 से पहले किया गया, जिस पर कांग्रेस ने इसे तुगलकी फरमान बताकर विरोध किया है।
राजस्थान के बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में हालिया बदलाव ने न केवल प्रशासनिक संरचना को प्रभावित किया है, बल्कि पंचायती राज व्यवस्था में भी बड़ा परिवर्तन ला दिया है। नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही राज्य सरकार द्वारा 31 दिसंबर 2025 को जारी अधिसूचना के तहत बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी और धोरीमन्ना उपखंडों को बालोतरा जिले में शामिल कर दिया गया, जबकि बायतु उपखंड को बालोतरा से हटाकर पुनः बाड़मेर में जोड़ा गया। इस परिसीमन के कारण बाड़मेर जिला परिषद के वार्डों की संख्या 39 से घटकर 37 हो गई है, जिसकी संशोधित सूची रविवार को जारी कर दी गई।
इस बदलाव से जिले की ग्राम पंचायतों की संख्या 685 से घटकर 625 रह गई है, जबकि पंचायत समितियों की संख्या 18 से कम होकर 17 हो गई है। इन 17 पंचायत समितियों में कुल 266 वार्ड होंगे, जिनमें बाड़मेर और चौहटन पंचायत समिति में सर्वाधिक 19-19 वार्ड होंगे। जिला परिषद वार्डों के लिए न्यूनतम जनसंख्या 22 हजार और अधिकतम 50 हजार रखी गई है, जबकि पंचायत समिति वार्डों के लिए यह आधार 2 हजार जनसंख्या पर रखा गया है।जिला कलेक्टर टीना डाबी ने संशोधित वार्ड प्रारूप का प्रकाशन जारी किया है और आपत्तियों के लिए 7 जनवरी 2026 सुबह 11 बजे तक कलेक्टर कार्यालय में सुनवाई का समय निर्धारित किया है। यह बदलाव आगामी पंचायती राज चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया है, जिससे वोटों के गणित में व्यापक बदलाव आएगा।
बाड़मेर जिले के नए प्रशासनिक ढांचे की विस्तृत गणित परिसीमन के बाद बाड़मेर जिले में अब 7 उपखंड, 11 तहसीलें, 7 उप तहसीलें, 17 पंचायत समितियां और 625 ग्राम पंचायतें होंगी। उपखंडों का विस्तार इस प्रकार है:बाड़मेर उपखंड: इसमें बाड़मेर, बाड़मेर ग्रामीण, बाटाडू और नोखड़ा तहसीलें शामिल हैं। उप तहसीलें: विशाला, चवा और मांगता। पंचायत समितियां: बाड़मेर, विशाला, डूंगेरो का तला, बाड़मेर ग्रामीण, बाटाडू, आडेल और मांगता (कुल 7)। इसमें बाटाडू, आडेल और मांगता तीन नई पंचायत समितियां जोड़ी गई हैं।शिव उपखंड: शिव तहसील और भियाड़ उप तहसील। पंचायत समितियां: शिव और भियाड़।गडरा रोड उपखंड: गडरा रोड तहसील और हरसाणी उप तहसील। पंचायत समिति: गडरा रोड।रामसर उपखंड: रामसर तहसील और रामसर पंचायत समिति।चौहटन उपखंड: चौहटन और धनाऊ तहसीलें, लीलसर उप तहसील। पंचायत समितियां: चौहटन, धनाऊ और लीलसर।सेड़वा उपखंड: सेड़वा तहसील, फागलिया उप तहसील। पंचायत समितियां: सेड़वा और फागलिया।बायतु उपखंड: बायतु तहसील और बायतु पंचायत समिति। (यह बालोतरा से बाड़मेर में शामिल किया गया।)
बालोतरा जिले का नया गणित बालोतरा जिले में अब 5 उपखंड, 9 तहसीलें और 5 उप तहसीलें होंगी। प्रमुख रूप से:बालोतरा उपखंड में पचपदरा, कल्याणपुर, गिड़ा और पाटोदी तहसीलें।उप तहसीलें: जसोल, दूदवा, सवाऊ पदमसिंह, हीरा की ढाणी और पादरू।पंचायत समितियां: सिवाना, बालोतरा, कल्याणपुर, गिड़ा, पाटोदी, समदड़ी, सिणधरी, पादरू, गुड़ामालानी, धोरीमन्ना और पायला कल्ला।
राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव यह परिसीमन पाकिस्तान सीमा से सटे क्षेत्रों को प्रभावित करता है और लगभग 2.5 लाख मतदाताओं के राजनीतिक समीकरण बदल सकता है। बायतु विधानसभा क्षेत्र अब पूरी तरह बाड़मेर में है, जबकि गुड़ामालानी विधानसभा बालोतरा में चली गई है। इस फैसले पर राजनीतिक विवाद भी गहरा गया है। कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने इसे "तुगलकी फरमान" करार देते हुए कहा कि यह प्रशासनिक रूप से तर्कसंगत नहीं है और गुड़ामालानी क्षेत्र के लोगों के लिए जिला मुख्यालय की दूरी बढ़ा देगा। बायतु विधायक हरीश चौधरी ने भी शायराना अंदाज में विरोध जताया, जबकि पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने इसे जनसुविधा के विपरीत बताया। दूसरी ओर, भाजपा समर्थक इसे सही ठहरा रहे हैं।