बाड़मेर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच पोस्टर विवाद: जिलाध्यक्ष और पीसीसी सदस्य के समर्थकों में हुई तीखी बहस, लक्ष्मणसिंह गोदारा ने शांत करवाया मामला

बाड़मेर के सिणधरी सर्किल पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष लक्ष्मणसिंह गोदारा और पीसीसी सदस्य ठाकराराम माली के पोस्टर को लेकर दोनों गुटों के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। एक-दूसरे पर पोस्टर फाड़ने के आरोप लगे। जिलाध्यक्ष मौके पर पहुंचे और मामले को शांत करवा दिया। पुलिस भी पहुंची, लेकिन कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ।

Dec 30, 2025 - 12:17
बाड़मेर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच पोस्टर विवाद: जिलाध्यक्ष और पीसीसी सदस्य के समर्थकों में हुई तीखी बहस, लक्ष्मणसिंह गोदारा ने शांत करवाया मामला

बाड़मेर शहर में कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी गुटबाजी का एक छोटा लेकिन चर्चित मामला सामने आया है। शहर के सिणधरी सर्किल ओवरब्रिज पर पोस्टर लगाने को लेकर कांग्रेस के दो गुटों के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। एक पक्ष कांग्रेस जिलाध्यक्ष लक्ष्मणसिंह गोदारा के समर्थक थे, जबकि दूसरे पक्ष पीसीसी (प्रदेश कांग्रेस कमेटी) सदस्य ठाकराराम माली के समर्थक। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर अपने नेताओं के पोस्टर फाड़ने का आरोप लगाया। मामला इतना बढ़ गया कि देर रात मौके पर बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। हालांकि, समय रहते जिलाध्यक्ष लक्ष्मणसिंह गोदारा खुद मौके पर पहुंचे और कार्यकर्ताओं से बातचीत कर पूरे विवाद को शांत करवा दिया। कोतवाली पुलिस भी सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची और कार्यकर्ताओं को समझाकर वहां से रवाना करवाया।

घटना की पूरी जानकारी: कैसे शुरू हुआ विवाद? दरअसल, यह पूरा मामला पीसीसी सदस्य ठाकराराम माली के जन्मदिन के अवसर पर उनके समर्थकों द्वारा शहर में पोस्टर लगाने से जुड़ा है। सिणधरी सर्किल ओवरब्रिज के पिलरों पर पहले से कांग्रेस जिलाध्यक्ष लक्ष्मणसिंह गोदारा के पोस्टर लगे हुए थे (कुछ रिपोर्ट्स में इन्हें "कोचिंग" पोस्टर भी कहा गया है, लेकिन संदर्भ कांग्रेस नेताओं के ही हैं)। सोमवार देर रात ठाकराराम माली के समर्थक वहां जन्मदिन की बधाई वाले पोस्टर लगाने पहुंचे।उन्होंने जिलाध्यक्ष के पोस्टर को पूरी तरह हटाने या फाड़ने की बजाय कुछ हिस्सों को फाड़कर या आधा-अधूरा छोड़कर उसके ऊपर अपने पोस्टर चिपका दिए।यह देखकर लक्ष्मणसिंह गोदारा के समर्थक मौके पर पहुंच गए। उन्होंने विरोध जताते हुए कहा कि अगर पोस्टर लगाना है तो पुराने पोस्टर को पूरी तरह हटाकर या उसके ऊपर ही लगाओ, आधा-अधूरा फाड़कर क्यों अपमान कर रहे हो?इस बात पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। आरोप लगे कि ठाकराराम माली के समर्थकों ने जानबूझकर जिलाध्यक्ष के पोस्टर फाड़े।जवाब में माली के समर्थकों ने भी जिलाध्यक्ष के पक्ष पर उनके जन्मदिन पोस्टर फाड़ने का आरोप लगाया।बहस के दौरान दोनों तरफ से एक-दूसरे को भला-बुरा कहने और गर्मा-गर्मी का माहौल बन गया।

जिलाध्यक्ष की भूमिका: मामला शांत कैसे हुआ? सूचना मिलते ही कांग्रेस जिलाध्यक्ष लक्ष्मणसिंह गोदारा, जो उस समय धोरीमन्ना से बाड़मेर की ओर आ रहे थे, तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं से अलग-अलग और फिर सामूहिक बातचीत की। कार्यकर्ताओं को समझाया कि यह छोटी-मोटी बात है और पार्टी की एकता को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। उनकी दखल से कुछ ही देर में माहौल शांत हो गया और कार्यकर्ता वहां से चले गए।इधर, कोतवाली पुलिस को भी घटना की सूचना मिली। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित रखते हुए कार्यकर्ताओं को समझाकर रवाना करवाया। किसी तरह की मारपीट या बड़ा विवाद नहीं हुआ, इसलिए कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

नेताओं के बयान: क्या बोले लक्ष्मणसिंह गोदारा और ठाकराराम माली? जिलाध्यक्ष लक्ष्मणसिंह गोदारा ने मामले को मामूली बताया। उन्होंने कहा, "पोस्टर लगाने को लेकर कार्यकर्ताओं में थोड़ी कहासुनी हुई थी। मैं मौके पर पहुंचकर सबको समझाया और मामला शांत करवा दिया। अगर आपस में कोई मनमुटाव है तो उसे दूर कर लिया जाएगा। कांग्रेस कार्यकर्ता एकजुट हैं और पार्टी के लिए काम कर रहे हैं।"पीसीसी सदस्य ठाकराराम माली ने खुद को घटना से अलग रखते हुए कहा, "मुझे इस बारे में सोशल मीडिया से जानकारी मिली है। मेरे शुभचिंतकों ने जन्मदिन पर पोस्टर लगाए थे। जिस किसी ने भी पोस्टर फाड़े, उन्होंने जैसा सोचा वैसा किया। मैं इसमें ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहता।"

पृष्ठभूमि: कांग्रेस में गुटबाजी का संकेत? बाड़मेर कांग्रेस में लंबे समय से गुटबाजी की चर्चाएं रही हैं। लक्ष्मणसिंह गोदारा हाल ही में जिलाध्यक्ष बने हैं और वे पूर्व विधायक हरीश चौधरी के करीबी माने जाते हैं। वहीं ठाकराराम माली भी पार्टी के सक्रिय नेता हैं। यह पोस्टर विवाद पार्टी के अंदरूनी मतभेदों का छोटा उदाहरण माना जा रहा है, हालांकि दोनों नेताओं ने इसे बड़ा मुद्दा नहीं बनने दिया।यह घटना दर्शाती है कि चुनावी मौसम में या नेताओं के व्यक्तिगत आयोजनों पर भी छोटी बातें कैसे बड़ा रूप ले सकती हैं, लेकिन समय पर नेतृत्व की दखल से पार्टी की छवि बची रही। बाड़मेर कांग्रेस अब आगे की रणनीति पर फोकस कर रही है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.