रामनवमी पर अयोध्या में ‘सूर्य तिलक’: 500 साल बाद रामलला के जन्मोत्सव पर विज्ञान और आस्था का अद्भुत संगम
अयोध्या में रामनवमी पर रामलला का ‘सूर्य तिलक’ हुआ, जहां 4 मिनट तक सूर्य की किरणें उनके ललाट पर पड़ीं। यह आस्था और विज्ञान का अद्भुत संगम था।
अयोध्या। रामनवमी के पावन अवसर पर अयोध्या से एक ऐतिहासिक और भावनात्मक दृश्य सामने आया, जिसने हर रामभक्त को भावविभोर कर दिया। यह सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था और विज्ञान के संगम का अद्भुत उदाहरण बन गया।
500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भव्य मंदिर में विराजमान रामलला का यह पहला जन्मोत्सव था। इस खास मौके पर दोपहर ठीक 12 बजे ‘सूर्य तिलक’ का दिव्य दृश्य देखने को मिला।
4 मिनट तक चला ‘सूर्य तिलक’
ठीक दोपहर 12 बजे, सूर्य की किरणें एक विशेष वैज्ञानिक तकनीक के जरिए दर्पण और लेंस से होकर सीधे रामलला के ललाट पर पड़ीं। करीब 4 मिनट तक यह अद्भुत दृश्य जारी रहा। ऐसा प्रतीत हुआ मानो सूर्यवंश के आराध्य भगवान राम का अभिषेक स्वयं सूर्यदेव कर रहे हों।
IIT रुड़की के वैज्ञानिकों की भूमिका
इस अनोखे ‘सूर्य तिलक’ को संभव बनाने में IIT रुड़की के वैज्ञानिकों की अहम भूमिका रही। उन्होंने आधुनिक तकनीक का उपयोग कर इस व्यवस्था को सटीक समय और कोण पर स्थापित किया, जिससे यह दिव्य क्षण साकार हो सका।
गूंजा ‘जय श्री राम’ का उद्घोष
पूरी अयोध्या नगरी ‘जय श्री राम’ के नारों से गूंज उठी। मंदिर परिसर से लेकर गलियों तक भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर कोई इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनना चाहता था।
आस्था और विज्ञान का संगम
यह घटना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नए भारत की उस तस्वीर को दर्शाती है जहां परंपरा और तकनीक साथ-साथ आगे बढ़ रही हैं।
सूर्य की किरणों से हुआ यह तिलक भक्ति, विज्ञान और सांस्कृतिक विरासत के अद्भुत मेल का प्रतीक बन गया। अयोध्या में हुआ यह ‘सूर्य तिलक’ एक ऐतिहासिक क्षण के रूप में याद किया जाएगा, जिसने देश-दुनिया को आस्था की नई ऊंचाइयों से रूबरू कराया।