“रिकॉर्ड वोटिंग के बाद बदलेगा खेल या फिर वही कहानी? असम के नतीजों से पहले बढ़ी धड़कनें”
असम में इस बार रिकॉर्ड मतदान ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। क्या बढ़ा वोटिंग प्रतिशत सत्ता बदलने का संकेत है या फिर कहानी कुछ और है?
तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में जबरदस्त मतदान के बाद अब सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। पूर्वोत्तर के अहम राज्य असम में इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है। जहां भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश में है, वहीं कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए पूरा जोर लगा रही है।
ऐतिहासिक मतदान, 75 साल का रिकॉर्ड टूटा
असम में इस बार 126 सीटों पर करीब ढाई करोड़ मतदाताओं ने अपने वोट डाले। इस दौरान 85.96 फीसदी मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले 75 सालों में सबसे ज्यादा है। यह आंकड़ा पिछली बार के मुकाबले करीब 3.5 फीसदी ज्यादा है।
क्या बढ़ा मतदान सत्ता परिवर्तन का संकेत?
आमतौर पर यह माना जाता है कि ज्यादा मतदान का मतलब सत्ता के खिलाफ नाराजगी होती है, लेकिन असम के आंकड़े इस धारणा को पूरी तरह सही साबित नहीं करते।
साल 2016 में यहां मतदान करीब 8 फीसदी बढ़ा था और भाजपा ने सरकार बनाई थी। वहीं 2021 में मतदान में गिरावट के बावजूद भाजपा अपनी सीटें बचाने में सफल रही। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि इस बार बढ़ा हुआ मतदान किसके पक्ष में जाएगा।
मुस्लिम वोटों की भूमिका अहम
असम में मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में हैं और कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इस बार मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में 90 से 95 फीसदी तक मतदान हुआ है।
पिछली बार कांग्रेस और एआईयूडीएफ साथ लड़े थे, लेकिन इस बार दोनों अलग-अलग चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में अगर मुस्लिम वोट बंटते हैं तो इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है, वहीं एकजुटता विपक्ष को मजबूत कर सकती है।
नेताओं की साख पर भी नजर
इस चुनाव में नेताओं की छवि भी बड़ा मुद्दा बनी हुई है। भाजपा का प्रचार मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा, जबकि कांग्रेस की कमान गौरव गोगोई के हाथ में है।
यह चुनाव सिर्फ पार्टियों का नहीं, बल्कि नेतृत्व की परीक्षा भी माना जा रहा है।
क्या कहता है पिछले चुनावों का अनुभव?
देश के अन्य राज्यों के आंकड़े बताते हैं कि मतदान प्रतिशत बढ़ने या घटने से सीधे तौर पर नतीजे तय नहीं होते।
उत्तर प्रदेश में समान मतदान प्रतिशत के बावजूद सीटों में बड़ा अंतर देखा गया, वहीं महाराष्ट्र में मतदान बढ़ने के साथ ही सत्तारूढ़ गठबंधन को फायदा मिला।
नतीजों पर टिकी निगाहें
कुल मिलाकर असम में रिकॉर्ड मतदान ने सियासी माहौल को और गरमा दिया है। हालांकि यह साफ तौर पर कहना मुश्किल है कि इसका फायदा किसे मिलेगा। अब सभी की नजरें चुनाव परिणामों पर टिकी हैं, जो इस पूरे समीकरण को साफ करेंगे।