आसाराम को बड़ा झटका: राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग से रेप मामले में उम्रकैद की सजा बरकरार रखी, अब करना होगा सरेंडर

राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग से यौन शोषण मामले में आसाराम की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने सह-आरोपियों को बरी कर दिया, जबकि आसाराम को अब सरेंडर करने के आदेश दिए गए हैं।

May 27, 2026 - 12:32
आसाराम को बड़ा झटका: राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग से रेप मामले में उम्रकैद की सजा बरकरार रखी, अब करना होगा सरेंडर

राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर) ने बुधवार (27 मई 2026) को एक अहम फैसले में नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रख दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद आसाराम की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं और अब उन्हें सरेंडर करना होगा।

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच—जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित—ने यह फैसला सुनाया। हालांकि इस मामले में सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को कोर्ट ने बरी कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला अगस्त 2013 का है, जब जोधपुर स्थित आसाराम के आश्रम में एक नाबालिग छात्रा ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। शिकायत के बाद जोधपुर के महिला थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी।

प्रमुख घटनाक्रम:

  • 21 अगस्त 2013 – जोधपुर महिला थाने में नाबालिग की शिकायत पर FIR दर्ज
  • 31 अगस्त 2013 – इंदौर आश्रम से आसाराम की गिरफ्तारी
  • 6 नवंबर 2013 – 1021 पेज की चार्जशीट दाखिल
  • 25 अप्रैल 2018 – जोधपुर विशेष पॉक्सो कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई

इसके बाद मामला हाईकोर्ट में अपील के रूप में चला, जिस पर लगभग 3 महीने तक सुनवाई चली।

 हाईकोर्ट में क्या हुआ?

हाईकोर्ट में 16 फरवरी 2026 से 20 अप्रैल 2026 तक लगातार सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने 20 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे 27 मई को सुनाया गया।

दोनों पक्षों की दलीलें

बचाव पक्ष का तर्क

आसाराम के वकीलों ने दलील दी कि:

  • मामला मनगढ़ंत और झूठा है
  • पीड़िता के बयान और माता-पिता के बयान में विरोधाभास है
  • घटना की रात कोई कॉल रिकॉर्ड नहीं मिला
  • सह-आरोपियों को बरी किया गया, इसलिए आसाराम को भी राहत मिलनी चाहिए

अभियोजन पक्ष का तर्क

पीड़िता की ओर से अधिवक्ता पी.सी. सोलंकी और सरकारी वकीलों ने कहा कि:

  • POCSO मामलों में पीड़िता का बयान ही पर्याप्त सबूत हो सकता है
  • गवाहों पर हमले और हत्या की घटनाएं साक्ष्य मिटाने की साजिश का संकेत हैं
  • आरोपी के खिलाफ पर्याप्त मजबूत सबूत मौजूद हैं

 कोर्ट का फैसला क्या रहा?

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि:

  • नाबालिग से यौन शोषण मामले में आजीवन कारावास की सजा बरकरार रहेगी
  • सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को सबूतों के अभाव में बरी किया गया
  • आसाराम को अब सरेंडर करना होगा

 गुजरात केस में भी सजा

आसाराम को इससे पहले जनवरी 2023 में गुजरात के गांधीनगर आश्रम में एक महिला अनुयायी से दुष्कर्म मामले में भी आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है।

 जमानत और कानूनी स्थिति

86 वर्षीय आसाराम लंबे समय से स्वास्थ्य कारणों के आधार पर अंतरिम जमानत का प्रयास कर रहे थे। उन्हें समय-समय पर मेडिकल आधार पर राहत भी मिली थी, लेकिन कोर्ट ने अब सजा को बरकरार रखते हुए उनके सरेंडर का रास्ता साफ कर दिया है।

निष्कर्ष

राजस्थान हाईकोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि गंभीर यौन अपराध मामलों में न्यायिक प्रक्रिया बेहद सख्त है। आसाराम के लिए यह फैसला एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है, क्योंकि अब उन्हें जेल लौटना होगा।

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