भजनलाल सरकार का 'वॉर-फुटिंग' एक्शन! आखिर सलूंबर के मासूमों की जान कौन ले रहा है? जानिए खौफनाक सच!
क्या राजस्थान में पैर पसार रही है कोई नई महामारी? सलूंबर में बच्चों की लगातार मौतों ने सरकार से लेकर स्वास्थ्य महकमे तक को हिला दिया है। आखिर क्या छुपा रहे हैं अधिकारी और क्या कह रही है लैब रिपोर्ट? इस बड़े खतरे की पूरी जानकारी, देखिए यहाँ!
सलूंबर/जयपुर: राजस्थान के नवनिर्मित जिले सलूंबर से एक ऐसी दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है जिसने सरकार से लेकर स्वास्थ्य महकमे तक की नींद उड़ा दी है। जिले के घाटा और लालपुरा गांवों में पिछले एक सप्ताह के भीतर 5 मासूम बच्चों की अचानक हुई मौतों ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। हल्का बुखार, शरीर में कमजोरी और फिर चंद घंटों में मौत—इस अनसुलझी पहेली ने ग्रामीणों को डरा दिया है।
6 दिन, 5 मौतें और एक 'अनसुलझी' पहेली
लालपुरा और घाटा गांवों में मातम पसरा हुआ है। दीपक (5), सीमा (3), लक्ष्मण (7), राहुल (4) और काजल—ये वो नाम हैं जिन्होंने इस अज्ञात बीमारी के कारण दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि बच्चों को पहले मामूली बुखार आता है, फिर शरीर टूटने लगता है और देखते ही देखते उनकी हालत इतनी बिगड़ जाती है कि उदयपुर के एमबी अस्पताल पहुँचने तक वे दम तोड़ देते हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का 'वॉर-फुटिंग' एक्शन
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर से सीधा मोर्चा संभाला है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त लहजे में 'वॉर-फुटिंग' (युद्ध स्तर) पर काम करने के निर्देश दिए हैं।
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विशेषज्ञ टीम रवाना: आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर के टॉप डॉक्टरों की टीम को तुरंत प्रभावित गांवों में भेजा गया है।
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CS की निगरानी: मुख्य सचिव वी श्रीनिवास खुद वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पल-पल की अपडेट ले रहे हैं।
ग्राउंड जीरो पर 'The Khatak' की पड़ताल: घर-घर सैंपलिंग और स्क्रीनिंग
स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ के निर्देश पर सलूंबर के सीएमएचओ और उनकी पूरी टीम ने गांवों में डेरा डाल दिया है।
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सघन स्क्रीनिंग: हर घर में जाकर बच्चों की सेहत जांची जा रही है।
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एंटी-लार्वा ऑपरेशन: मच्छरों से होने वाली बीमारी के शक में फॉगिंग और सोर्स रिडक्शन शुरू कर दिया गया है।
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ब्लड सैंपलिंग: बीमार बच्चों और उनके परिजनों के ब्लड सैंपल लेकर लैब भेजे गए हैं।
परिजनों का दर्द और सिस्टम पर आक्रोश
जांच के दौरान स्वास्थ्य टीम को ग्रामीणों के भारी विरोध का भी सामना करना पड़ा। एक पीड़ित पिता ने भावुक होकर सैंपल देने से इनकार कर दिया। उनका आरोप है कि उन्होंने धरियावद से लेकर उदयपुर तक के अस्पतालों के चक्कर काटे, लेकिन डॉक्टर बीमारी ही नहीं पकड़ पाए। परिजनों का कहना है कि समय रहते सही इलाज मिलता तो उनके बच्चे आज जिंदा होते।
प्रशासन की अपील: सावधानी ही बचाव है
एसडीएम दिनेश आचार्य और बीसीएमएचओ डॉ. सिंटु कुमावत ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं। प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि:
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पानी उबालकर पिएं।
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आसपास गंदगी न होने दें।
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बुखार होने पर झाड़-फूंक के बजाय तुरंत सरकारी अस्पताल पहुँचें।
विशेषज्ञों की राय: डॉक्टरों का मानना है कि यह कोई घातक वायरल, बैक्टीरियल इंफेक्शन या फिर जलजनित बीमारी हो सकती है। असली सच लैब रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।