राजस्थान पुलिस में बड़ा धमाका! कौन है वो होनहार IPS, जिस पर लगा 'माफिया' से सांठगांठ का दाग? भजनलाल सरकार का बड़ा एक्शन!
भीलवाड़ा में एक ऐसी 'सांठगांठ' का पर्दाफाश हुआ है जिसने जयपुर से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया। 2022 बैच के एक होनहार IPS अफसर की संदिग्ध भूमिका और माफिया के साथ उस 'गुप्त समझौते' का क्या है सच?
भीलवाड़ा/जयपुर: राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पुलिस महकमे की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रक्षक ही जब भक्षक बन जाए, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? भीलवाड़ा सदर में तैनात 2022 बैच के युवा आईपीएस अधिकारी माधव उपाध्याय को गारनेट माफिया के साथ कथित तौर पर हाथ मिलाने के आरोपों के बाद राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से APO (पदस्थापन की प्रतीक्षा में) कर दिया है।
क्या है 'गारनेट' वसूली का वो काला खेल?
भीलवाड़ा का कोटड़ी क्षेत्र बेशकीमती पत्थर 'गारनेट' के अवैध खनन के लिए बदनाम है। आरोप है कि यहाँ अवैध खनन और परिवहन को संरक्षण देने के बदले कारोबारियों से मोटी रकम वसूली जा रही थी। पुलिस ने जब इस मामले में चार आरोपियों को दबोचा, तो पूछताछ में जो नाम सामने आया उसने जयपुर मुख्यालय तक हड़कंप मचा दिया। गिरफ्तार आरोपियों ने सीधे तौर पर आईपीएस माधव उपाध्याय की भूमिका की ओर इशारा किया है।
सत्ता, सियासत और माफिया: त्रिकोणीय गठजोड़!
इस पूरे प्रकरण में राजनैतिक तड़का तब लगा जब गिरफ्तार आरोपियों में से एक अजय पांचाल का कनेक्शन जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा से निकला। चर्चा है कि विधायक ने ही आरोपी पांचाल की मुलाकात पुलिस के आला अधिकारियों से करवाई थी। अब सतर्कता विभाग की जांच इस बिंदु पर टिकी है कि क्या यह सिर्फ एक शिष्टाचार मुलाकात थी या फिर सत्ता, पुलिस और माफिया के बीच कोई गहरा 'लेन-देन' का लिंक है।
होनहार इंजीनियर से 'दागी' अफसर तक का सफर
माधव उपाध्याय राजस्थान कैडर के उन अधिकारियों में गिने जाते थे जिनसे विभाग को बड़ी उम्मीदें थीं।
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प्रोफाइल: मूल रूप से भरतपुर के रहने वाले माधव ने MNIT जयपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की।
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UPSC सफर: अपने तीसरे प्रयास में All India Rank 148 हासिल कर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था।
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विवाद: अगस्त 2025 में भीलवाड़ा एएसपी (सदर) के रूप में उनकी पहली फील्ड पोस्टिंग हुई थी, लेकिन महज कुछ महीनों में ही करियर पर 'माफिया' का दाग लग गया।
केवल APO या होगी कठोर कार्रवाई?
जानकारों का मानना है कि ऐसे गंभीर मामलों में केवल एपीओ करना पर्याप्त नहीं है। संयुक्त शासन सचिव डॉ. धीरज कुमार सिंह के आदेश के बाद अब इस पूरे मामले की सतर्कता जांच अजमेर जीआरपी एसपी नरेंद्र सिंह को सौंपी गई है। विजिलेंस टीम अब यह पता लगाएगी कि वसूली का यह पैसा ऊपर तक कहाँ-कहाँ पहुँच रहा था। फिलहाल चारों आरोपी तीन दिन के पुलिस रिमांड पर हैं और माना जा रहा है कि पूछताछ में कई और 'सफेदपोश' चेहरों से नकाब उतर सकता है।