जयपुर राशन घोटाला: 34 ट्रकों से 'गायब' हुआ गरीबों का निवाला, 53 लाख के गेहूं का क्या हुआ? जानिए पूरा मामला!
सरकारी डिपो से निकले लेकिन राशन दुकानों तक नहीं पहुँचे 34 ट्रक! जयपुर में करोड़ों के गेहूं घोटाले का सनसनीखेज खुलासा, जानिए पूरी खबर
जयपुर: राजधानी जयपुर में गरीबों के निवाले पर डाका डालने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सरकारी राशन वितरण प्रणाली (PDS) में बड़ी सेंधमारी करते हुए एक ट्रांसपोर्ट फर्म ने 34 राशन दुकानों तक पहुंचने वाला 1790 क्विंटल गेहूं रास्ते में ही गायब कर दिया। सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर और कालाबाजारी के इस खेल का भंडाफोड़ होने के बाद अब विभाग में हड़कंप मच गया है।
बाजार में बेच दिया गरीबों का अनाज
मामला जयपुर रसद विभाग (II) से जुड़ा है। रसद अधिकारी निशांत पंचोली की रिपोर्ट पर सांगानेर सदर थाने में एम/एस भरत लाल शिव सहाय एण्ड संस के प्रोपराइटर विनोद कुमार शर्मा के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। जांच में सामने आया कि ट्रांसपोर्ट फर्म को सीडब्ल्यूसी सीतापुरा डिपो से गेहूं उठाकर जयपुर के ग्रामीण इलाकों—चौमूं, चाकसू, जालसू, आमेर, आंधी, जमवारामगढ़, बस्सी और झोटवाड़ा की 34 दुकानों तक पहुंचाना था। लेकिन ट्रांसपोर्टर ने ईमानदारी की जगह कालाबाजारी को चुना और करीब 53 लाख रुपये का गेहूं खुले बाजार में बेच दिया।
चोरी पकड़ी गई तो 'मार्च' को बताया 'फरवरी'
इस घोटाले को छिपाने के लिए ट्रांसपोर्टर ने बड़ी चालाकी दिखाई। जब फरवरी का कोटा दुकानों तक नहीं पहुंचा और दुकानदारों ने शिकायत की, तो ट्रांसपोर्टर ने मार्च 2026 के कोटे का 1311 क्विंटल गेहूं उठाकर उन दुकानों पर भेज दिया और कागजों में उसे 'फरवरी की सप्लाई' दिखाने की कोशिश की। लेकिन रसद विभाग की विजिलेंस टीम ने जब बारीकी से जांच की, तो तारीखों और स्टॉक का यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया।
हर ट्रक से की 'थोड़ी-थोड़ी' चोरी
पुलिस और विभागीय जांच में एक चौंकाने वाला तरीका सामने आया है। पकड़े जाने के डर से ट्रांसपोर्टर ने किसी एक ट्रक को पूरा गायब करने के बजाय, सभी 34 ट्रकों से थोड़ा-थोड़ा गेहूं निकाला। उसे लगा कि मामूली कमी पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा, लेकिन 1790 क्विंटल की भारी कमी ने पूरे खेल की पोल खोल दी।
53 लाख की होगी वसूली और कानूनी कार्रवाई
खाद्य विभाग अब इस गबन की पाई-पाई वसूलने की तैयारी में है। आरोपी फर्म से 53 लाख रुपये की रिकवरी की जाएगी। सांगानेर सदर थाना पुलिस ने आवश्यक वस्तु अधिनियम और गबन की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।