नालंदा के मघड़ा शीतलाष्टमी मंदिर में भगदड़: 8 महिलाओं की मौत, 6 से ज्यादा घायल
बिहार के नालंदा जिले के मघड़ा गांव स्थित शीतलाष्टमी मंदिर में चैत्र के आखिरी मंगलवार को भारी भीड़ में भगदड़ मच गई। इस हादसे में 8 महिलाओं की मौत हो गई जबकि 6 से अधिक लोग घायल हैं। मंदिर का छोटा गर्भगृह और अनियंत्रित भीड़ इस त्रासदी का मुख्य कारण बनी। प्रशासन ने मंदिर और मेला क्षेत्र को बंद कर दिया है।
बिहार के नालंदा जिले में माता शीतला के प्रसिद्ध मंदिर में चैत्र माह के आखिरी मंगलवार को हुई भगदड़ में 8 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। सभी मृतक महिलाएं हैं। इस हादसे में 6 से अधिक लोग घायल हुए हैं। घटना मघड़ा गांव स्थित शीतलाष्टमी मंदिर में हुई, जहां हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए उमड़ पड़े थे।
हादसे का विवरण
नालंदा जिले के बिहारशरीफ से लगभग 5 किलोमीटर दूर मघड़ा गांव में माता शीतला का यह प्राचीन सिद्धपीठ स्थित है। चैत्र कृष्ण पक्ष की शीतला अष्टमी (शीतलाष्टमी) के अवसर पर यहां हर साल भारी भीड़ जुटती है। इस बार चैत्र का आखिरी मंगलवार होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या और भी ज्यादा थी। मंदिर का गर्भगृह काफी छोटा है, जिससे भीड़ नियंत्रण में दिक्कत हुई।
एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि मंदिर में इतनी भयंकर भीड़ थी कि लोग एक-दूसरे पर चढ़ रहे थे। सभी को जल्दी-जल्दी आगे बढ़कर पूजा करने की होड़ मची हुई थी। कोई लाइन में लगकर दर्शन नहीं करना चाह रहा था। इसी अफरा-तफरी में भगदड़ मच गई, जिससे कई महिलाएं कुचल गईं।
मृतकों और घायलों की जानकारी
मृतकों की संख्या: 8 (सभी महिलाएं), पहचान हुई मृतक: रीता देवी (50 वर्ष), नालंदा निवासी,रेखा देवी (45 वर्ष), शेष मृतकों की पहचान अभी बाकी है। घायलों को तुरंत मॉडल अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। मंदिर और अस्पताल परिसर में हादसे के बाद चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल था।
एक पीड़ित परिवार के सदस्य (रेखा देवी के बेटे) ने बताया, “मम्मी मेला देखने गई थीं। हजारों की भीड़ थी। मैं घर पर था। जब सूचना मिली तो मौके पर पहुंचा, लेकिन तब तक मां की मौत हो चुकी थी।”
परंपरा और भीड़ का कारण
शीतला अष्टमी के दिन परंपरा के अनुसार घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता। भक्त एक दिन पहले तैयार किया ठंडा (बासी) भोजन माता को भोग लगाते हैं। इस दिन मंदिर में लंबी कतारों में दर्शन होते हैं, लेकिन इस बार भीड़ इतनी अनियंत्रित हो गई कि व्यवस्था चरमरा गई। मघड़ा मेला भी लगा हुआ था, जिससे आसपास और भी ज्यादा लोग जमा हो गए थे।
प्रशासन की कार्रवाई
हादसे के तुरंत बाद प्रशासन ने मंदिर और मेला क्षेत्र को बंद करवा दिया। पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने में जुट गया। घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।यह घटना धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन की कमी की ओर इशारा करती है। छोटे गर्भगृह, संकीर्ण रास्ते और अचानक उमड़ने वाली भीड़ अक्सर ऐसी त्रासदियों का कारण बनती है।