ऐसा क्या बोला गहलोत ने, जिससे सियासी हलचल मच गई, SI भर्ती का क्या है पूरा मामला, जानिए पूरी खबर
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने राज्य सरकार को लेकर कई अहम मुद्दों पर बड़ा बयान दिया। किसानों, RGHS बकाया और SI भर्ती को लेकर उनके सवालों ने सियासी हलचल बढ़ा दी। लेकिन उन्होंने जो कहा, वह चर्चा का केंद्र बन गया…
जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हुए फसल नुकसान को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि किसानों को राहत देने के लिए तुरंत नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिया जाना चाहिए।
किसानों को राहत देने की मांग
गहलोत ने कहा कि मौसम की मार झेल रहे किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार को सक्रिय होकर समय पर राहत देनी चाहिए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसान राज्य की प्राथमिकता होने चाहिए।
RGHS बकाया पर नाराजगी
पूर्व मुख्यमंत्री ने RGHS के तहत लंबित भुगतानों को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अस्पतालों का 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया अटका हुआ है, जिससे मरीजों को इलाज में दिक्कतें आ रही हैं।
गहलोत के मुताबिक कई निजी अस्पताल अब सीधे मरीजों से पैसे मांग रहे हैं, जो गंभीर स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यह बकाया कब तक चुकाया जाएगा।
विपक्ष की भूमिका पर बयान
गहलोत ने कहा कि विपक्ष का काम सवाल उठाना है और जनता ने उन्हें इसी जिम्मेदारी के लिए चुना है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह मुद्दों पर स्पष्ट और गंभीर जवाब दे, न कि टालमटोल करे।
SI भर्ती और कानून व्यवस्था पर सवाल
सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा-2021 को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने कहा कि कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन न्याय में देरी चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों में भी पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, लेकिन केवल राजस्थान को ही बदनाम किया गया।
कन्हैयालाल हत्याकांड पर भी उठाए सवाल
गहलोत ने कन्हैयालाल टेलर हत्याकांड की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दो साल से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद आरोपियों को सजा नहीं मिलना चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले में जरूरत से ज्यादा गवाह बनाए गए, जिससे न्याय प्रक्रिया में देरी हो रही है।