RMC फर्जीवाड़ा केस: पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा गिरफ्तार, 12वीं पास लोगों को बनाया डॉक्टर; 18 आरोपी पकड़ाए, 93 संदिग्ध रडार पर

राजस्थान में मेडिकल फर्जीवाड़े के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें RMC के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा सहित 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि फर्जी FMG सर्टिफिकेट के जरिए 12वीं पास लोगों तक को डॉक्टर बनाकर रजिस्ट्रेशन दिया गया। SOG की जांच में 93 संदिग्धों की पहचान हुई है और आगे भी कार्रवाई जारी है।

Mar 25, 2026 - 17:38
RMC फर्जीवाड़ा केस: पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा गिरफ्तार, 12वीं पास लोगों को बनाया डॉक्टर; 18 आरोपी पकड़ाए, 93 संदिग्ध रडार पर

राजस्थान में मेडिकल फर्जीवाड़े के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में कुल 18 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें 15 MBBS कैंडिडेट और एक दलाल भी शामिल है।

9 जिलों में एक साथ कार्रवाई

एसओजी के एडीजी विशाल बंसल के अनुसार, डीआईजी पारिस देशमुख के नेतृत्व में राज्यभर के 9 जिलों में एक साथ दबिश दी गई। 22 टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर इस फर्जीवाड़े से जुड़े लोगों को पकड़ा।

फर्जी FMG सर्टिफिकेट से रजिस्ट्रेशन का खेल

जांच में सामने आया है कि विदेश से MBBS करने वाले ऐसे कैंडिडेट, जो FMG (Foreign Medical Graduate) एग्जाम पास नहीं कर सके थे, उन्होंने फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने की कोशिश की।आरोप है कि इस पूरे खेल में काउंसिल के अंदर के लोगों की मिलीभगत थी, जिससे बिना वैध जांच के ही प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन जारी कर दिए गए।

12वीं पास लोगों को बना दिया डॉक्टर

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि कुछ मामलों में 12वीं पास लोगों को भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर बना दिया गया।न तो उनकी मेडिकल डिग्री की सही जांच हुई और न ही इंटर्नशिप का कोई रिकॉर्ड देखा गया।

93 संदिग्धों की पहचान

एसओजी की जांच में अब तक 93 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिन्होंने फर्जी FMG सर्टिफिकेट के जरिए मेडिकल रजिस्ट्रेशन हासिल करने या करवाने की कोशिश की।एजेंसी को इस पूरे नेटवर्क में बड़े पैमाने पर पैसों के लेन-देन के सबूत भी मिले हैं।

पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां

इस केस की शुरुआत पहले तीन MBBS डॉक्टरों की गिरफ्तारी से हुई थी। इसके बाद दो और आरोपियों को पकड़ा गया, जो विदेश से पढ़ाई कर लौटे थे और पूरे रैकेट को ऑपरेट कर रहे थे। पूछताछ में ही इस बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ।

दलाल और अधिकारियों की मिलीभगत

जांच में यह भी सामने आया कि तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, उनके सहयोगी (नोडल अधिकारी) और एक दलाल की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार कर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।

मंत्री के निर्देश पर बनी थी जांच कमेटी

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद 1 अक्टूबर 2024 को चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने 5 सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी।कमेटी की अंतरिम रिपोर्ट में अनियमितताएं सामने आने पर डॉ. राजेश शर्मा को पहले ही निलंबित कर दिया गया था। अब इस मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई है।इनमें कई ऐसे लोग थे जिन्होंने न तो मेडिकल की पढ़ाई की और न ही इंटर्नशिप, फिर भी उन्हें डॉक्टर बना दिया गया।

फर्जी ई-मेल और दस्तावेजों से हुआ खेल

फर्जी डॉक्टरों ने आवेदन के दौरान दूसरे राज्यों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और NOC में छेड़छाड़ कर जाली दस्तावेज लगाए।यहां तक कि वेरिफिकेशन के नाम पर फर्जी ई-मेल अटैच कर दिए गए, लेकिन काउंसिल ने बिना जांच किए ही रजिस्ट्रेशन जारी कर दिए।

आगे और गिरफ्तारियां संभव

एसओजी ने सभी आरोपियों को जयपुर लाकर पूछताछ शुरू कर दी है। कोर्ट से पीसी रिमांड लेकर पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जाएगी।एजेंसी का कहना है कि आने वाले समय में इस मामले में और भी बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.