NEET 2026 रद्द होते ही छात्रों पर बढ़ा 30 हजार का अतिरिक्त खर्च, आर्थिक के साथ मानसिक तनाव भी बढ़ा

NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद राजस्थान के कोचिंग हब सीकर में फिर से छात्रों की हलचल बढ़ गई है। कई छात्र दोबारा तैयारी के लिए लौट रहे हैं, जबकि अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ और छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।

May 13, 2026 - 15:21
NEET 2026 रद्द होते ही छात्रों पर बढ़ा 30 हजार का अतिरिक्त खर्च, आर्थिक के साथ मानसिक तनाव भी बढ़ा

NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर के लाखों विद्यार्थियों के सामने एक बार फिर अनिश्चितता की स्थिति खड़ी हो गई है। 3 मई को आयोजित हुई इस परीक्षा में देशभर से 22.79 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। राजस्थान के कोचिंग हब सीकर में भी इस फैसले का बड़ा असर देखने को मिल रहा है। सीकर जिले के 102 परीक्षा केंद्रों पर करीब 29,979 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 29,600 छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे। अब परीक्षा रद्द होने के बाद इन्हीं छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी होगी।

NEET रद्द होते ही फिर शुरू हुई सीकर की हलचल

जैसे ही NTA ने परीक्षा रद्द करने का आदेश जारी किया, उसके कुछ ही समय बाद सीकर के कोचिंग संस्थानों और हॉस्टल संचालकों के फोन लगातार बजने लगे। जो छात्र परीक्षा देकर अपने घर लौट चुके थे, वे अब फिर से सीकर आने की तैयारी कर रहे हैं। कोचिंग संस्थानों में टेस्ट सीरीज, डाउट क्लासेज, लाइब्रेरी और सेल्फ स्टडी के लिए दोबारा भीड़ बढ़ने लगी है।

छात्रों और अभिभावकों का भरोसा डगमगाया

कई विद्यार्थियों ने कहा कि लगातार पेपर लीक जैसी घटनाओं से उनका भरोसा परीक्षा प्रणाली और एजेंसियों पर कमजोर हो रहा है। छात्रों का कहना है कि वर्षों की मेहनत के बाद जब परीक्षा रद्द होती है, तो मानसिक दबाव के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ जाता है।

अतिरिक्त खर्च से बढ़ी चिंता

एक छात्र को सीकर में एक साल की तैयारी के दौरान हॉस्टल, कोचिंग, किताबें, भोजन और अन्य खर्च मिलाकर लगभग ढाई से तीन लाख रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं। अब परीक्षा दोबारा होने के कारण छात्रों और अभिभावकों को करीब एक से डेढ़ महीने के अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ेगा, जो लगभग 30 हजार रुपए तक बताया जा रहा है।

“अब 700 से ज्यादा अंक लाने की कोशिश करूंगी”

हनुमानगढ़ के नोहर की छात्रा आरजू चौधरी ने बताया कि परीक्षा में उसके करीब 700 अंक आने की उम्मीद थी। परीक्षा रद्द होने की खबर मिलते ही वह फिर लाइब्रेरी पहुंच गई और दोबारा तैयारी शुरू कर दी। उसका कहना है कि अब वह पहले से भी बेहतर स्कोर करने की कोशिश करेगी और सकारात्मक सोच के साथ तैयारी जारी रखेगी।

“अच्छा मेडिकल कॉलेज मिल रहा था”

जोधपुर के छात्र मनोज ने बताया कि उसके लगभग 650 अंक बनने की उम्मीद थी और उसे अच्छे मेडिकल कॉलेज की संभावना नजर आ रही थी। लेकिन परीक्षा रद्द होने से अब पूरी स्थिति दोबारा अनिश्चित हो गई है। वहीं सीकर के छात्र नरेंद्र टोडावत ने कहा कि यदि दोबारा होने वाला पेपर कठिन आया तो नुकसान हो सकता है। साथ ही परिवार पर आर्थिक दबाव भी बढ़ेगा।

कुछ छात्रों ने फैसले को सही भी बताया

चूरू की छात्रा दिव्या राठौड़ ने कहा कि यदि पेपर लीक हुआ था तो परीक्षा रद्द होना जरूरी था, क्योंकि इससे कटऑफ असामान्य रूप से बढ़ सकती थी और मेहनती छात्रों का नुकसान होता। उनका कहना है कि दोबारा परीक्षा एक नया अवसर है और अब सभी छात्र फिर से तैयारी में जुट गए हैं।

एक्सपर्ट्स की सलाह

कोचिंग विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा को अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है, इसलिए छात्रों का पढ़ाई का रिद्म पूरी तरह टूटा नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों को सोशल मीडिया और अफवाहों से दूर रहकर नियमित टेस्ट सीरीज, सेल्फ स्टडी और पॉजिटिव माइंडसेट के साथ तैयारी करने की सलाह दी है।

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