राजसमंद में सांसद और SP के बीच छिड़ी जंग, मुख्यमंत्री तक पहुंचा मामला
राजसमंद जिले में प्रशासन, पुलिस और राजनीति के बीच तनाव जैसा माहौल हैं। राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ और जिले की पुलिस अधीक्षक ममता गुप्ता के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है।
राजसमंद: राजस्थान के राजसमंद जिले में इन दिनों प्रशासन, पुलिस और राजनीति के बीच जबरदस्त खींचतान देखने को मिल रही है। यह विवाद अब केवल मतभेद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खुलकर एक 'पावर वॉर' के रूप में सामने आ गया है। राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ और जिले की पुलिस अधीक्षक (SP) ममता गुप्ता के बीच का टकराव अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की चौखट तक पहुँच गया है।
क्यों आमने-सामने हैं सांसद और SP?
सांसद और एसपी के बीच लंबे समय से दूरियां बनी हुई हैं। स्थिति यह है कि दोनों किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में एक साथ शामिल होने से कतराते हैं। अब मामला इतना गंभीर हो गया है कि सांसद महिमा कुमारी ने मुख्यमंत्री को दो अलग-अलग पत्र लिखकर एसपी ममता गुप्ता को तुरंत निलंबित (Suspend) करने और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने की मांग की है।
विवाद की मुख्य वजहें: स्याही कांड और हत्याकांड
इस टकराव के पीछे दो मुख्य घटनाएं मानी जा रही हैं:
मार्ग नामकरण और स्याही कांड: विवाद की शुरुआत तब हुई जब नगर परिषद ने 'महाराणा राजसिंह मार्ग' का नाम बदलकर 'आचार्य महाश्रमण अहिंसा मार्ग' कर दिया। इसका विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं ने नगर परिषद आयुक्त पर स्याही फेंक दी। पुलिस ने इस मामले में भरत दवे नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार कर उस पर SC-ST एक्ट लगा दिया। सांसद का आरोप है कि पुलिस ने एकपक्षीय कार्रवाई की और सत्ता के दबाव में निर्दोषों को प्रताड़ित किया।
हरीश जोशी हत्याकांड: धोइंदा निवासी हरीश जोशी की हत्या के बाद जिले में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठे। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने पहले गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने समय पर एक्शन नहीं लिया। सांसद ने इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली को 'सुस्त और गैर-जिम्मेदाराना' करार दिया है।
सांसद के पत्र में गंभीर आरोप
सांसद ने 24 दिसंबर 2025 और उसके बाद जनवरी 2026 में लिखे पत्रों में स्पष्ट कहा है कि:
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जिले में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आमजन में असुरक्षा का भाव है।
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पुलिस अधीक्षक की कार्यप्रणाली से प्रशासनिक संतुलन बिगड़ रहा है।
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पुलिस की कार्यशैली भेदभावपूर्ण है, जिससे जनता का पुलिस पर से विश्वास उठ रहा है।
राजसमंद का यह 'MP vs SP' विवाद अब राजस्थान की राजनीति का केंद्र बन गया है। एक तरफ जहां पुलिस अपनी कार्रवाई को कानूनी रूप से सही बता रही है, वहीं सांसद इसे जनता की आवाज और सम्मान की लड़ाई बता रही हैं। अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर टिकी हैं कि वे सांसद की मांग पर क्या कड़ा कदम उठाते हैं।