लू से मिलेगी राहत या आने वाला है नया ट्विस्ट ? क्या राजस्थान में होगी ज्यादा बारिश...

राजस्थान में इस साल भीषण गर्मी से राहत मिलने के संकेत हैं। मौसम विभाग के अनुसार दिन का तापमान सामान्य से कम रहेगा और लू के दिनों में भी कमी आएगी। इसका मुख्य कारण बार-बार सक्रिय हो रहे वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और मार्च में हुई ज्यादा बारिश है। हालांकि रात का तापमान थोड़ा ज्यादा रह सकता है। पश्चिमी राजस्थान में हल्की गर्मी बनी रह सकती है, लेकिन पिछले सालों जैसी तीव्र गर्मी नहीं पड़ेगी।

Apr 1, 2026 - 12:17
लू से मिलेगी राहत या आने वाला है नया ट्विस्ट ? क्या राजस्थान में होगी ज्यादा बारिश...
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राजस्थान 1 अप्रैल 2026 :- राजस्थान में इस साल मौसम का मिजाज आम सालों से अलग रहने वाला है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार राज्य में भीषण गर्मी का असर कम रहेगा, जबकि बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत ज्यादा देखने को मिल सकती हैं। इसका सीधा असर यह होगा कि लोगों को लू और तेज धूप से कुछ हद तक राहत मिलेगी।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस बदलाव के पीछे प्रमुख वजह लगातार सक्रिय रहने वाले वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) हैं। मार्च महीने में भी इन सिस्टम्स का असर पूरे प्रदेश में देखने को मिला, जिसके चलते करीब 20 दिनों तक रुक-रुककर बारिश, आंधी और ओलावृष्टि हुई। इससे तापमान पर ब्रेक लगा और गर्मी ज्यादा नहीं बढ़ पाई।

दिन में कम तपिश, रातें रह सकती हैं गर्म

पूर्वानुमान के अनुसार दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से कम रहने की संभावना है, लेकिन रात का तापमान सामान्य से थोड़ा ज्यादा रह सकता है। यानी दिन में गर्मी का असर कम होगा, जबकि रातें अपेक्षाकृत गर्म महसूस हो सकती हैं।

हीटवेव के दिनों में आएगी कमी

इस बार प्रदेश में हीटवेव (लू) के दिनों की संख्या भी सामान्य से काफी कम रहने का अनुमान है। खासकर जयपुर, अजमेर, भरतपुर और कोटा संभाग में लू का असर सबसे कम रहेगा।

हालांकि पश्चिमी राजस्थान—जैसे बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर—में लू के कुछ दिन सामान्य या थोड़ा ज्यादा हो सकते हैं, लेकिन यहां भी पिछले वर्षों जैसी तीव्र गर्मी की संभावना कम जताई गई है।

क्या होती है हीटवेव?

मौसम विभाग के अनुसार जब तापमान सामान्य से करीब 5 डिग्री सेल्सियस अधिक हो जाता है और गर्म, शुष्क हवाएं चलती हैं, तो उसे हीटवेव कहा जाता है। वहीं, जब तापमान 47 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है, तो स्थिति गंभीर हीटवेव की मानी जाती है।

मार्च में बदला मौसम का ट्रेंड

इस साल मार्च के शुरुआती दिनों में तापमान तेजी से बढ़ा और पारा 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया था। लेकिन 10 मार्च के बाद लगातार आए पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम ने करवट ली। बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई।

पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों—जैसे बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, चूरू और श्रीगंगानगर—में अधिकतम तापमान 37 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। मार्च में सबसे ज्यादा तापमान करीब 40.8 डिग्री सेल्सियस बाड़मेर में दर्ज किया गया, लेकिन महीने के अंत तक पारा 40 डिग्री से नीचे ही बना रहा।

क्यों मिल रही है गर्मी से राहत?

विशेषज्ञों के अनुसार इस बार बार-बार आने वाले मौसमीय सिस्टम, बादल और बारिश की वजह से सूरज की तपिश सीधे जमीन तक नहीं पहुंच पाई। यही कारण है कि तापमान नियंत्रित रहा और हीटवेव की स्थिति नहीं बनी।राजस्थान के लिए इस साल गर्मी राहत भरी रहने के संकेत हैं। जहां एक ओर लू और अत्यधिक तापमान से राहत मिलेगी, वहीं बारिश की बढ़ती गतिविधियां किसानों और आम लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं। हालांकि मौसम में बदलाव के कारण सतर्क रहना भी जरूरी होगा, क्योंकि अचानक आंधी-बारिश जैसी घटनाएं भी बढ़ सकती हैं।