FIR से ठीक पहले बड़ा मोड़! भाटी-रावणा विवाद में क्या होने वाला है ‘राज़ीनामा’?

बाड़मेर में रविंद्र सिंह भाटी और छोटू सिंह रावणा के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह मामला अब कलेक्ट्रेट और पुलिस तक पहुँच चुका है। छोटू सिंह ने विधायक पर धमकी देने का आरोप लगाते हुए सुरक्षा की मांग की है, वहीं राजपूत समाज ने इसे व्यक्तिगत विवाद बताते हुए दोनों पक्षों से शांति और समझौते की अपील की है। FIR दर्ज होने से पहले सुलह की कोशिशें जारी हैं।

Apr 1, 2026 - 11:49
FIR से ठीक पहले बड़ा मोड़! भाटी-रावणा विवाद में क्या होने वाला है ‘राज़ीनामा’?

बाड़मेर 1अप्रैल 2026 (राजस्थान ) :- पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर जिले में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी और लोकभजन गायक छोटू सिंह रावणा के बीच शुरू हुआ विवाद अब गंभीर रूप ले चुका है। सोशल मीडिया पर शुरू हुई तकरार अब कलेक्ट्रेट और पुलिस प्रशासन तक पहुँच गई है, जिससे इलाके में सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है।

हालांकि इस बढ़ते तनाव के बीच समाज के वरिष्ठ लोग और संगठन अब इसे शांत करने के प्रयास में जुट गए हैं।

राजपूत समाज की अपील विवाद को समाजों का मुद्दा न बनाएं

बाड़मेर की श्री राजपूत समाज सेवा समिति ने माहौल को बिगड़ता देख हस्तक्षेप किया है। समिति के पदाधिकारियों ने साफ कहा कि यह विवाद दो व्यक्तियों के बीच का है, इसे दो समाजों के बीच टकराव का रूप देना गलत होगा।

समिति ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और आपसी संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। साथ ही, उन लोगों की भी आलोचना की गई है जो इस मुद्दे को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।

छोटू सिंह की प्रशासन से गुहार: “मुझे सुरक्षा चाहिए”

मंगलवार को छोटू सिंह रावणा अपने समर्थकों के साथ बाड़मेर कलेक्ट्रेट पहुँचे। बड़ी संख्या में एकत्रित लोगों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए विधायक के खिलाफ कार्रवाई और रावणा को सुरक्षा देने की मांग की।

रावणा ने आरोप लगाया कि उन्हें जान का खतरा है और उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने में भी दबाव बनाया जा सकता है। उन्होंने खुद को एक कलाकार बताते हुए कहा कि वे राजनीति नहीं, बल्कि न्याय और सुरक्षा की मांग लेकर आए हैं।

विवाद की शुरुआत फोन कॉल और धमकी के आरोप

पूरा मामला एक कथित फोन कॉल से शुरू हुआ, जिसमें छोटू सिंह ने विधायक पर धमकी देने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से जान से मारने की बात कही गई।

वहीं दूसरी ओर विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने इन आरोपों को सीधे तौर पर स्वीकार नहीं किया, लेकिन संकेत दिया कि कुछ लोग दूसरों के जरिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

FIR से पहले बढ़ा सस्पेंस: क्या होगा राजीनामा?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मामला पुलिस थाने तक जाकर और गंभीर होगा या फिर समाज के हस्तक्षेप से ‘राजीनामा’ हो पाएगा। 1 अप्रैल शिव थाने में संभावित FIR को लेकर दोनों पक्षों में हलचल बनी हुई है।

राजनीतिक और सामाजिक असर की आशंका

राजस्थान में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सरकार सामाजिक संतुलन बनाए रखने की बात करती रही है। ऐसे में बाड़मेर जैसे संवेदनशील सीमावर्ती जिले में यह विवाद प्रशासन के लिए भी चुनौती बन गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते समाधान नहीं निकला तो इसका असर न केवल सामाजिक रिश्तों पर पड़ेगा, बल्कि आने वाले स्थानीय चुनावों पर भी देखने को मिल सकता है।

शांति या टकराव—अगला कदम तय करेगा दिशा

फिलहाल स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। एक ओर FIR की संभावना है, तो दूसरी ओर समाज के वरिष्ठों की सुलह की पहल भी जारी है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह विवाद शांत होता है या और अधिक गहराता है।