राजस्थान में VDO (ग्राम विकास अधिकारी) अंतिम परिणाम का इंतजार: युवाओं की बेचैनी और बोर्ड पर सवाल
राजस्थान में ग्राम विकास अधिकारी (VDO) भर्ती 2025 के अंतिम परिणाम का इंतजार कर रहे हजारों युवा अभ्यर्थी बेचैन हैं। लिखित परीक्षा, स्कोरकार्ड और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद RSSB द्वारा फाइनल मेरिट लिस्ट और चयन सूची अभी तक जारी नहीं की गई है। सोशल मीडिया पर युवा बोर्ड अध्यक्ष और सरकार पर सवाल उठा रहे हैं कि मात्र 850 पदों वाली भर्ती में इतनी देरी क्यों हो रही है। सरकार रोजगार के बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर युवाओं को अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। अभ्यर्थी जल्द से जल्द अंतिम परिणाम घोषित करने की मांग कर रहे हैं।
राजस्थान के हजारों युवा अभ्यर्थी इन दिनों ग्राम विकास अधिकारी (Village Development Officer - VDO) भर्ती के अंतिम परिणाम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB/RSSB) द्वारा आयोजित इस भर्ती में लिखित परीक्षा दिसंबर 2025 में पूरी हो चुकी है और उसके बाद के चरण (दस्तावेज सत्यापन, मेडिकल वेरिफिकेशन आदि) भी आगे बढ़ चुके हैं, लेकिन अंतिम चयन सूची (Final Result/Selection List) अभी तक घोषित नहीं हुई है। इससे अभ्यर्थियों में गुस्सा और निराशा बढ़ रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर युवा बोर्ड और सरकार पर सवाल उठा रहे हैं।
भर्ती की पृष्ठभूमि
रिक्तियां: कुल 850 पद (Non-TSP क्षेत्र में 683 और TSP क्षेत्र में 167)।परीक्षा तिथि: 2 नवंबर 2025 को लिखित परीक्षा आयोजित हुई, जिसमें लगभग 5.12 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए।लिखित परीक्षा का परिणाम: 19 दिसंबर 2025 को जारी किया गया। इसमें सफल अभ्यर्थियों की रोल नंबर सूची PDF के रूप में उपलब्ध कराई गई और दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) की प्रक्रिया शुरू हुई।स्कोरकार्ड: फरवरी 2026 में जारी किया गया।अगले चरण: दस्तावेज सत्यापन के बाद कुछ अभ्यर्थियों के लिए मेडिकल वेरिफिकेशन (PH कैंडिडेट्स के लिए मार्च 2026 में शेड्यूल) भी हुआ।अंतिम परिणाम (Final Recommendation/Merit List with cut-off) जनवरी-फरवरी 2026 में आने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन मार्च 2026 के अंत तक भी यह घोषित नहीं हुआ है। बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट (rssb.rajasthan.gov.in) पर अन्य भर्तियों (जैसे JEN) के परिणाम समय-समय पर आ रहे हैं, लेकिन VDO का अंतिम नतीजा अटका हुआ है।
युवाओं की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पर सवाल
सोशल मीडिया (खासकर X पर) युवा अभ्यर्थी लगातार पोस्ट कर रहे हैं। हाल के पोस्ट्स में कहा जा रहा है कि:VDO रिपोर्ट/प्रक्रिया आए हुए दो सप्ताह से ज्यादा समय बीत चुका है, फिर भी मौन साधे हुए हैं।बोर्ड अध्यक्ष @alokrajRSSB पर सीधे सवाल उठाए जा रहे हैं।एक पोस्ट में बोर्ड की “हठधर्मिता” का जिक्र करते हुए अंतिम परिणाम की मांग की गई है।युवा पूछ रहे हैं कि जब पटवारी जैसी बड़ी भर्ती का परिणाम रिकॉर्ड समय में जारी हो सकता है, तो मात्र 850 पदों वाली VDO का फाइनल रिजल्ट क्यों लंबित है?अभ्यर्थी आरोप लगा रहे हैं कि प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हो रही है, जिससे उनका करियर प्रभावित हो रहा है। कई युवा कह रहे हैं कि वे महीनों से तैयारी और इंतजार में लगे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर रोजगार की प्रक्रिया सुस्त नजर आ रही है।
सरकार की दावों और वास्तविकता के बीच अंतर
राजस्थान सरकार युवाओं के लिए रोजगार के बड़े-बड़े दावे करती रही है और विभिन्न विभागों में भर्तियां निकालने की घोषणाएं करती है। लेकिन VDO जैसी भर्तियों में बार-बार देरी, परिणामों का इंतजार और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते रहते हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि लिखित परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन जैसे चरण पूरे होने के बावजूद अंतिम सूची न आने से अनिश्चितता बनी हुई है।बोर्ड की ओर से अभी तक इस देरी का कोई स्पष्ट आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है। कुछ पुरानी रिपोर्ट्स में बोर्ड मीटिंग, स्क्रूटनी (आपत्ति निस्तारण) या अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं का जिक्र मिलता है, लेकिन मार्च 2026 तक स्पष्ट अपडेट नहीं आया है।
क्या करें अभ्यर्थी?
नियमित रूप से rssb.rajasthan.gov.in की Results सेक्शन चेक करें।बोर्ड के आधिकारिक नोटिस और अध्यक्ष के अपडेट्स पर नजर रखें।कोई गलत सूचना या अफवाह से बचें; केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।VDO भर्ती राजस्थान के पंचायती राज विभाग के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ग्राम विकास अधिकारी गांवों के विकास कार्यों में सीधे जुड़े होते हैं। ऐसे में अंतिम परिणाम का शीघ्र घोषण होना न सिर्फ अभ्यर्थियों के हित में है, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया की दक्षता भी दर्शाता है।युवाओं की मांग है कि बोर्ड जल्द से जल्द अंतिम मेरिट लिस्ट, कट-ऑफ और चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी करे ताकि नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ सके। फिलहाल स्थिति यह है कि इंतजार जारी है और सोशल मीडिया पर युवाओं की बेचैनी बढ़ती जा रही है।